लूना हॉस्पिटल में नरगिस की मौत पर अदालत का शिकंजा, FIR दर्ज करने का आदेश, अब खुलेगा राज!

🔴नरगिस की मौत पर अब नहीं चलेगी लीपापोती! अदालत ने FIR के साथ CCTV और CDR जांच के दिए आदेश

🔴CCTV से CDR तक होगी पड़ताल,ऑपरेशन के दौरान अस्पताल में कौन था अब पुलिस तलाशेगी जवाब

🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर।कसया के संचालित लूना हॉस्पिटल में चिकित्सको के लापरवाही के कारण दो जून को हुई नरगिस की मौत के मामले करीब चार महीने से कार्रवाई की बाट जोह रहे परिजनों को अब न्याय मिलने की उम्मीद जाग गयी है। सबब यह है कि इस प्रकरण में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कुशीनगर ने कसया पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।खास बात यह है कि जांच अब सिर्फ कागजों और बयानों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि अस्पताल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज, संबंधित डॉक्टरों की मोबाइल सीडीआर और लोकेशन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा आयुष्मान से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में होंगे। यानी अब यह पता लगाना पुलिस की जिम्मेदारी है कि नरगिस की मौत से पहले और बाद में अस्पताल में आखिर क्या हुआ था और उस समय वहां कौन-कौन लोग मौजूद थे।

बेशक! मामला इसलिए भी गंभीर है कि शिकायत में अस्पताल में आयुष्मान कार्ड प्रक्रिया के जरिए सरकार और मरीज के परिजनों से रुपये ऐंठने , नरगिस को ऑपरेशन के लिए भर्ती करने और ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकीय प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।अब इन आरोपों की सच्चाई पुलिस विवेचना में सामने आएगी।


🔴 मौत से पहले ओटी में क्या हुआ था?

शिकायत के मुताबिक नगर पालिका परिषद कसया के वार्ड संख्या-4 निवासी नर्गिस पत्नी तसलीम गाल ब्लैडर में पथरी की समस्या से पीड़ित थीं। परिजनों के अनुसार बेहतर इलाज की उम्मीद में उन्हे कसया स्थित लूना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि ऑपरेशन की प्रक्रिया के दौरान उसकी हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। मौत के बाद मामला शांत होने के बजाय सवालों में उलझता चला गया। कौन डॉक्टर मौजूद था? एनेस्थीसिया किसने दिया? ऑपरेशन की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे? अस्पताल में उस समय कौन मौजूद था? अब ऐसे सवालों का जवाब पुलिस की विवेचना में तलाशा जाएगा।

🔴सीसीटीवी  बताएगा अस्पताल में उस रात कौन-कौन था

अदालत के आदेश का सबसे अहम हिस्सा अस्पताल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से जुड़ा है। आदेश में एक जून 2026 से दो जून 2026 तक की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर उसकी जांच किए जाने की बात कही गई है। यानी अब कैमरों की रिकॉर्डिंग यह बता सकती है कि नरगिस के अस्पताल पहुंचने से लेकर घटना के बाद तक अस्पताल में कौन आया, कौन गया और ऑपरेशन थियेटर के आसपास कौन-कौन मौजूद था।इतना ही नहीं, अदालत ने संबंधित एनेस्थीसिया डॉक्टर और सर्जन के मोबाइल नंबरों की सीडीआर तथा लोकेशन की जांच को भी आवश्यक माना है। इससे अस्पताल के रिकॉर्ड और मौके पर मौजूदगी के दावों का मिलान किया जा सकेगा।

🔴 न्यायालय ने तय कर दिया जांच की दिशा 

न्यायालय ने सिर्फ मुकदमा दर्ज करने का आदेश नहीं दिया, बल्कि विवेचना के महत्वपूर्ण बिंदु भी सामने रखे हैं। सीसीटीवी फुटेज, आसपास के कैमरों की रिकॉर्डिंग, संबंधित डॉक्टरों के मोबाइल नंबरों की सीडीआर और लोकेशन जैसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच अब मामले की दिशा तय करेगी। यानी अब सवाल केवल यह नहीं रहेगा कि नरगिस की मौत कैसे हुई, बल्कि जांच में यह भी सामने लाना होगा कि ओटी में उस समय कौन-कौन मौजूद था, किसने एनेस्थीसिया दिया, सर्जरी की प्रक्रिया में कौन शामिल था और अस्पताल में चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं।

🔴पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्वास्थ्य विभाग के पत्र तक जांच के आधार

शिकायतकर्ता ने न्यायालय के समक्ष नरगिस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की छायाप्रति, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से संबंधित पत्राचार, 11 अगस्त 2026 के मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से जुड़े दस्तावेज, आयुष्मान से संबंधित संदेशों तथा पुलिस अधीक्षक को भेजी गई शिकायत की रजिस्ट्री रसीद समेत दस्तावेज प्रस्तुत किए। अदालत ने इन तथ्यों के आधार पर प्रकरण में विधि अनुसार कार्रवाई का रास्ता खोल दिया है।

🔴 अब सवाल सिर्फ मौत का नहीं, पूरी व्यवस्था का है

लूना हॉस्पिटल में महिला की मौत के बाद पहले भी अस्पताल की कार्यप्रणाली और चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर सवाल उठ चुके हैं। अब न्यायालय के आदेश ने पूरे प्रकरण को एफआईआर और आपराधिक विवेचना के दायरे में ला दिया है। ऐसे मे यदि आरोपों में दम नहीं है तो सीसीटीवी, सीडीआर, अस्पताल के रिकॉर्ड, डॉक्टरों की मौजूदगी और आयुष्मान से जुड़े दस्तावेज जांच के बाद तस्वीर साफ कर देंगे और यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी सिर्फ अस्पताल तक सीमित रहेगी या उन लोगों तक भी पहुंचेगी, जिनकी भूमिका जांच में सामने आएगी। फिलहाल इतना तय है कि नरगिस की मौत का मामला अब फाइलों में दबकर रहने वाला नहीं है। अदालत के आदेश के बाद कसया पुलिस के सामने मुकदमा दर्ज करने से लेकर साक्ष्य जुटाने तक की जिम्मेदारी है और इस जांच की दिशा सीसीटीवी सीडीआर तथा मेडिकल रिकॉर्ड तय करेगी हैं।

🔴 रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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