यूपीपीसीएल के स्टोर में 'आईडी पासवर्ड’ का खेल, अमित सिंह कैसे कर रहा है योगेन्द्र गुप्ता के आईडी पासवर्ड इस्तेमाल

 

🔴साइबर अपराध : गोरखपुर मे बैठकर योगेन्द्र गुप्ता चला रहे है पडरौना और देवरिया विद्युत स्टोर का सिस्टम ऊपर से नीचे तक मिलीभगत की बू ! योगेन्द्र के प्रभाव में यूपीपीसीएल, क्यो नही हो रही अमित पर कार्रवाई?

🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। जिले के पडरौना विद्युत उपकेन्द्र के स्टोर को आउटसोर्सिंग कर्मचारी अमित सिंह द्वारा नियम विरुद्ध व अवैध तरीके से संचालन को लेकर चल रहे विवाद ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। सवाल सिर्फ यह नहीं कि आउटसोर्सिंग कर्मचारी अमित सिंह को स्टोर का काम किस नियम और आदेश से मिला, बल्कि सवाल यह है कि  विभागीय स्टोर इंचार्ज योगेन्द्र कुमार गुप्ता की अधिकृत यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल अमित सिंह कैसे कर रहे है? आखिर विभाग की डिजिटल पहचान किसके हाथ में है ? जानकारो का दावा है कि मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच होने पर कई परतें खुल सकती हैं।

सरकारी वित्तीय नियमों में स्टोर की अभिरक्षा, प्राप्ति, निर्गमन और सही अभिलेख रखने की जिम्मेदारी को गंभीरता से निर्धारित किया गया है। नियमों में स्टोर की कस्टडी सौंपे जाने वाले व्यक्ति से सुरक्षा की जिम्मेदारी लिए जाने का भी प्रावधान है। ऐसे में सवाल यह है कि जिस व्यक्ति के नाम पर विभागीय आईडी दर्ज है, वहा योगेन्द्र गुप्ता काम कर रहे है या उनकी डिजिटल पहचान के पीछे आउटसोर्सिंग कर्मचारी अमित सिंह बैठे है? मामला गंभीर है क्योंकि किसी अधिकारी व कर्मचारी की अधिकृत आईडी से होने वाली ऑनलाइन गतिविधियों का रिकॉर्ड सामान्यतः उसी यूजर प्रोफाइल से जुड़ता है। ऐसे में यदि आईडी योगेन्द्र की और संचालन अमित सिंह द्वारा किया जा रहा है तो स्टोर से संबंधित ऑनलाइन प्रविष्टि, सामग्री का निर्गमन, स्टॉक में बदलाव या अन्य डिजिटल कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी होगी? यही वह सवाल है जिसका जवाब अब विभागीय फाइल से नहीं, बल्कि सर्वर लॉग और तकनीकी जांच से मिल सकता है। जानकार बताते है कि यूपीपीसीएल की साइबर-सुरक्षा संबंधी आधिकारिक सामग्री में मजबूत पासवर्ड, यूजर प्रोफाइल की सुरक्षा और अनधिकृत पहुंच से बचाव पर स्पष्ट जोर दिया गया है। इसलिए इस मामले मे सिस्टम लॉग, लॉगिन हिस्ट्री, आईपी एड्रेस, डिवाइस विवरण और संबंधित डिजिटल ट्रांजैक्शन की निष्पक्ष जांच जरूरी है। 


🔴 स्टोर का हिसाब बताएगा असली कहानी

सरकारी नियमों के मुताबिक स्टोर की प्राप्ति, अभिरक्षा, निर्गमन और लेखांकन में जिम्मेदारी तथा रिकॉर्ड की शुद्धता महत्वपूर्ण है। इसलिए अब केवल यह पूछना पर्याप्त नहीं कि अमित सिंह स्टोर का कार्य देखते थे या देखते है  या नहीं। जांच का दायरा यह होना चाहिए कि किस तारीख को किस यूजर आईडी से कौन-सा काम हुआ और उस समय कंप्यूटर/डिवाइस किसके कब्जे में था।यदि आईडी योगेन्द्र गुप्ता की और संचालन अमित सिंह का था तो यह व्यवस्था किसके निर्देश पर चल रही थी? क्या इसकी लिखित अनुमति थी? क्या सक्षम अधिकारी को इसकी जानकारी थी? और यदि अनुमति नहीं थी तो इतने समय तक यह व्यवस्था चलती कैसे रही?

🔴 योगेन्द्र गुप्ता और अमित सिंह दोनों की भूमिका जांच के घेरे में 

यदि योगेन्द्र गुप्ता वास्तव में गोरखपुर और देवरिया स्टोर के साथ संबंधित स्टोर का प्रभार संभाल रहे हैं, तो उनकी यूजर आईडी से होने वाली प्रत्येक गतिविधि की जवाबदेही भी महत्वपूर्ण हो जाती है। दूसरी ओर, यदि अमित सिंह आउटसोर्सिंग कर्मचारी होते हुए उस आईडी से स्टोर का संचालन कर रहे है, तो यह भी जांच का विषय है कि उन्हें ऐसा करने की अनुमति किस नियम के तहत किसने दी।यानी सवाल अब सिर्फ यह नही है कि “अमित सिंह स्टोर का प्रभार कैसे सम्भाल रहे है। सवाल यह है कि “अमित के हाथ में योगेन्द्र गुप्ता की डिजिटल पहचान कैसे पहुंची?”


🔴विभागीय गलती या, साइबर अपराध 

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 सी में किसी अन्य व्यक्ति के इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर, पासवर्ड या विशिष्ट पहचान का धोखाधड़ी या बेईमानी से इस्तेमाल करना चोरी की पहचान के दायरे में आता है और इसके लिए तीन वर्ष तक की सजा तथा जुर्माने का प्रावधान है। वहीं धारा 43 बिना अनुमति कंप्यूटर या कंप्यूटर संसाधन तक पहुंच जैसे कृत्यों से संबंधित है और धारा 66, धारा 43 में वर्णित कृत्य को बेईमानी या धोखाधड़ी से किए जाने पर दंडनीय बनाती है। हालांकि सिर्फ पासवर्ड का किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किए जाने की शिकायत से अपराध स्वतः सिद्ध नहीं होता। यह जांच का विषय है कि क्या उपयोग अधिकृत था, किसने अनुमति दी, किस उद्देश्य से दी और उस आईडी से वास्तव में किसने लॉगिन किया। केंद्र सरकार भी स्पष्ट कर चुकी है कि आईटी एक्ट की इन धाराओं में दायित्वों का सवाल अनुमति व सहमति और कृत्य की प्रकृति पर निर्भर करता है।

🔴जांच अधिकारी नहीं, डिजिटल फोरेंसिक बताएगा सच

 इस पूरे प्रकरण में सिर्फ कागजी जांच पर्याप्त नहीं होगी। यूपीपीसीएल को चाहिए कि संबंधित सिस्टम के लॉगिन हिस्ट्री, लॉग फाइल, आईपी एड्रेस, डिवाइस/मशीन विवरण, लॉगिन का समय और स्टोर से संबंधित प्रत्येक डिजिटल ट्रांजैक्शन का तकनीकी ऑडिट कराये।साथ ही यह भी जांच हो कि योगेन्द्र कुमार गुप्ता ने अपनी आईडी/पासवर्ड अमित सिंह को दिया है या नहीं। यदि दिया है तो किसके आदेश पर, किस अवधि के लिए और किस विभागीय अनुमति के तहत?योगेन्द्र गुप्ता और अमित सिंह दोनों की भूमिका जांच के घेरे में क्यों न हो ?

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य


 

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