🔵 भिसवा लाला में प्रधान पर ‘अपनों को लाभ’ पहुंचाने का आरोप, पट्टे से कोटे तक घिरी भूमिका
🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। पडरौना विकास खंड की ग्राम पंचायत भिसवा लाला में ग्राम प्रधान रफीक की भूमिका को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी पट्टे की जमीन के आवंटन में प्रधान ने अपने परिवार के लोगों को लाभ पहुंचाया है। उनके पिता और भाई के नाम पट्टा होने तथा भाई की पत्नी के नाम सरकारी राशन की दुकान आवंटित होने का दावा किया गया है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि प्रधान ने दूसरे गांव सोहरौना में अपने नाम से पट्टा लिया है, जबकि कुछ पात्र पट्टाधारकों को उनकी जमीन पर कब्जा नहीं करने दिया जा रहा है। शिकायत करने पर स्थानीय लेखपाल और पंचायत सचिव की रिपोर्ट पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। मामले को लेकर गांव में असंतोष है और ग्रामीण पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि जिन जमीनों का आवंटन पात्र एवं जरूरतमंद लोगों के लिए होना चाहिए, उन पर प्रधान ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर परिवार के सदस्यों को लाभ पहुंचाया गया। ग्रामीणों के अनुसार प्रधान ने कथित रूप से अपने पिता और भाई के नाम पर पट्टा कराया, जबकि कई वास्तविक पट्टाधारकों को उनकी आवंटित भूमि पर कब्जा लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध करने वालों पर दबाव बनाया जाता है और पैसे की मांग किए जाने की भी शिकायतें हैं। रकम नहीं देने पर कथित तौर पर दूसरे लोगों के नाम से जमीन पर कब्जा कराने का प्रयास किया जाता है।
🔴भाई की पत्नी के नाम कोटा आवंटन पर सवाल
बेशक! मामला सिर्फ पट्टे की जमीन तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने प्रधान के भाई की पत्नी के नाम सरकारी राशन की दुकान आवंटित होने पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि पंचायत के निर्वाचित प्रधान के परिवार को लगातार सरकारी लाभ मिलता रहा तो पात्र ग्रामीणों के लिए व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यही वजह कोटा आवंटन की प्रक्रिया, पात्रता और संबंधित अभिलेखों की वास्तविक स्थिति की अधिकृत जांच आवश्यक है।
🔴सोहरौना में प्रधान रफीक के नाम पट्टे का दावा
ग्रामीणों का दावा है कि प्रधान रफीक ने पडरौना क्षेत्र के सोहरौना गांव में अपने नाम से पट्टा लिया है। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार सोहरौना पडरौना तहसील क्षेत्र का गांव है।अब सवाल यह है कि उक्त भूमि किस श्रेणी की है, उसका आवंटन किस नियम और पात्रता के आधार पर हुआ तथा प्रधान के नाम पट्टा किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत हुआ।इन सवालों का जवाब राजस्व अभिलेखों और सक्षम अधिकारी की जांच से ही स्पष्ट हो सकता है।
🔴 लेखपाल और सचिव की रिपोर्ट पर भी ग्रामीणों को भरोसा नहीं
ग्रामीणों ने हल्के के लेखपाल और ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि शिकायतों के बाद मौके की वास्तविक स्थिति के विपरीत रिपोर्ट तैयार कर मामले को दबाने का प्रयास किया जाता रहा।यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल प्रधान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजस्व और पंचायत स्तर पर तैयार की गई रिपोर्टों की निष्पक्षता भी जांच के दायरे में आएगी।भिसवा लाला के ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान के प्रभाव के कारण लोग खुलकर विरोध करने से डरते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ग्राम पंचायत की व्यवस्था कुछ प्रभावशाली लोगों के इर्द-गिर्द संचालित हो रही है या फिर सरकारी जमीन और योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंच रहा है?
🔴 सीडीओ से लेकर डीएम तक उठी निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने मामले में केवल कागजी जांच के बजाय जमीनों की मौके पर पैमाइश, पुराने और वर्तमान खतौनी अभिलेखों की जांच, पट्टा आवंटन की पत्रावलियों की पड़ताल, कोटे की दुकान के आवंटन की प्रक्रिया तथा संबंधित लेखपाल-सचिव की रिपोर्ट की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप गलत हैं तो जांच के बाद प्रधान को क्लीनचिट मिल जाएगी, लेकिन यदि सरकारी जमीन और पंचायत व्यवस्था के दुरुपयोग के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
नोट - प्रधान रफीक की कारगुजारी अगले अंक में पढे...!
रिपोर्ट - संजय चाणक्य

