🔵 सुभाष यादव की नियुक्ति पर शासन का शिकंजा ! नियुक्ति से पदोन्नति तक की फाइल तलब
🔴 शिकायत और लगातार खबरों के बाद जागा शासन, सुभाष यादव की नियुक्ति,समायोजन की जांच के आदेश
🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में वरिष्ठ सहायक सुभाष यादव की नियुक्ति और समायोजन से जुड़े प्रकरण को मीडिया द्वारा लगातार प्रमुखता से उठाए जाने के बाद शासन ने अब मामले का संज्ञान ले लिया है। शासन स्तर से मामले की जांच के निर्देश जारी होने के साथ ही सुभाष यादव की नियुक्ति, समायोजन, पदोन्नति और सेवा पंजिका से जुड़े अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां तलब की गई हैं।सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक), शिक्षा निदेशालय, प्रयागराज ने 7 सितंबर 2026 को जारी पत्र में संबंधित अभिलेखों की जांच कर पूरी आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अब तक उठते रहे सवालों का जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि सरकारी फाइलों में दर्ज दस्तावेजों से तलाशा जाएगा।
बतादे कि निदेशालय ने सुभाष यादव से संबंधित नियुक्ति के अभिलेख, समायोजन के अभिलेख पदोन्नति से संबंधित आदेश व रिकॉर्ड और सेवा पंजिका की प्रमाणित छायाप्रतियां आदि मांगी हैं। अब जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि उनकी सेवा किस आधार पर शुरू हुई, बाद में किस आदेश के तहत समायोजन हुआ, पदोन्नति किन नियमों और सक्षम प्राधिकारी के आदेश के आधार पर हुई तथा सेवा पंजिका में पूरी सेवा अवधि का विवरण किस प्रकार दर्ज है। निदेशालय के पत्र में प्रदेश कार्यकारिणी, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ, जनपद कुशीनगर के सदस्य जनार्दन मिश्र के 6 अप्रैल 2026 के पत्र का भी हवाला दिया गया है। इसके अलावा निदेशालय के 20 जुलाई 2026 के पत्रांक नियुक्ति (1) बेसिक/1642/2026-17 का संदर्भ देते हुए सुभाष यादव की नियुक्ति/समायोजन से संबंधित शिकायतों का परीक्षण करने और पूरी आख्या के साथ अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश का उल्लेख किया गया है।
🔴 परिचारक की नियुक्ति से शुरू हुआ सफर, अब फाइलों की कसौटी पर
जानकारी के अनुसार सुभाष यादव की नियुक्ति 6 अक्टूबर 1989 को अनौपचारिक शिक्षा परियोजना में कसया विकासखंड के परिचारक पद पर हुई थी। इसके बाद उनकी सेवा, पद और आगे हुए समायोजन को लेकर समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।अब जबकि निदेशालय ने नियुक्ति से लेकर समायोजन और पदोन्नति तक के प्रमाणित अभिलेख मांगे हैं, ऐसे में 1989 से लेकर वरिष्ठ सहायक के पद तक पहुंचने की पूरी सेवा यात्रा रिकॉर्ड के आधार पर जांचे जाने की स्थिति बन गई है। हलाकि शासन द्वारा भेजी गयी सूचनाओं में सुभाष की नियुक्ति कही 1989 तो कही 1991 दर्शाया गया है जो यह साबित कर रहा है कि कही न कही लोचा जरुर है। अहम सवाल यह है कि सुभाष की नियुक्ति के समय लागू व्यवस्था क्या थी, सेवा आगे किस आदेश से बढ़ी, समायोजन किस पद पर और किस नियम के तहत हुआ तथा पदोन्नति के लिए कौन-सा आदेश और पात्रता आधार बना।
🔴 जांच में अभिलेख बोलेंगे
जानकारो का कहना है कि इस मामले में आगे की तस्वीर जांच रिपोर्ट और प्रमाणित दस्तावेजों से साफ होगी। यदि नियुक्ति, समायोजन और पदोन्नति नियमानुसार हुई है तो संबंधित आदेश और अभिलेख उसका आधार सामने आयेगा । वहीं किसी स्तर पर नियमों से जुड़ा कोई सवाल सामने आता है तो उसका परीक्षण भी इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर किया जा सकेगा। यानी अब मामला दावों और प्रतिदावों से निकलकर सरकारी रिकॉर्ड की मेज पर पहुंच गया है।
🔴स्थानांतरण के बीच नियुक्ति की जांच ने बढ़ाई हलचल
सुभाष यादव का नाम हाल में हुए लिपिकों के स्थानांतरण को लेकर भी चर्चा में रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्हें बलिया स्थानांतरित किए जाने के बावजूद कार्यमुक्त नही किए जाने को लेकर भी सवाल उठे हैं। इसी बीच नियुक्ति और समायोजन के अभिलेखों की जांच के लिए निदेशालय का पत्र सामने आने से विभागीय स्तर पर मामले को लेकर हलचल बढ़ गई है।एक ओर स्थानांतरण का आदेश और दूसरी ओर नियुक्ति, समायोजन एवं पदोन्नति के अभिलेखों की जांच अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित अधिकारी जांच को किस निष्कर्ष तक पहुंचाते हैं।
🔴 खुलेंगी सेवा फाइल की परतें?
जानकार बताते है कि निदेशालय के निर्देश के बाद गेंद अब संबंधित विभागीय अधिकारियों के पाले में है। वर्ष 1989 या फिर 1991 (शासन को भेजी गयी सूचना मे अलग अलग नियुक्ति तिथि व वर्ष दर्शाया गया है)की नियुक्ति से लेकर वरिष्ठ सहायक के पद तक पहुंचने के बीच कौन-कौन से आदेश जारी हुए, किन नियमों के तहत समायोजन हुआ और पदोन्नति का आधार क्या रहा इन सब सवालों का जवाब अब प्रमाणित अभिलेखों से सामने आयेगा।फिलहाल इतना तय है कि मामला अब केवल शिकायत या विभागीय चर्चा तक सीमित नहीं रहा। शिकायतें दर्ज हैं, निदेशालय का जांच निर्देश सामने है और जांच के लिए मांगे गए दस्तावेज भी स्पष्ट हैं, जो सुभाष यादव की नियुक्ति से लेकर वरिष्ठ सहायक तक की सेवा यात्रा की वास्तविक तस्वीर सामने रखेगी।
🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य



