प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री के साथ राकेश की तस्वीर! पालिका बताए राकेश के पद और अधिकार?

 

🔴 “पालिका के सरकारी बैनर पर राकेश की तस्वीर! किस शासनादेश ने बनाया ‘जनप्रतिनिधि’?

🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। नगर पालिका परिषद कुशीनगर में अध्यक्ष के पति राकेश जायसवाल की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।नियम विरुद्ध तरीके से ईओ के साथ निर्माण कार्यों के निरीक्षण, पत्नी की जगह मुख्यमंत्री की वर्चुअल बैठक में शामिल होने और विकास कार्यों के शिलापट्टों पर पत्नी के नाम के साथ अपना नाम अंकित कराने उठ रहे सवाल का जबाब अभी सामने आया नही  कि अब नगर पालिका की ओर से आयोजित कार्यक्रमों के बैनरों पर भी राकेश जायसवाल की तस्वीर दिखाई देने का मामला चर्चा में है।ऐसे मे बडा सवाल यह है कि नगर पालिका द्वारा आयोजित कार्यक्रम के बैनर पर अध्यक्ष पति राकेश जायसवाल का तस्वीर किस शासनादेश के तहत लगाई गयी? 

बतादे कि जिस बैनर पर प्रधानमंत्री मोदी मुख्यमंत्री योगी, नगर विकास मंत्री और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की तस्वीरें लगाई गई हैं, उसी बैनर पर राकेश जायसवाल की तस्वीर लगाया गया है जो अपने आप में गंभीर सवाल है?मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि सामने आया बैनर किसी निजी आयोजन का नहीं, बल्कि नगर पालिका परिषद कुशीनगर द्वारा आयोजित ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ कार्यक्रम का है। बैनर पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री समेत जनप्रतिनिधियों की तस्वीरें लगी हैं। इसी क्रम में जिस व्यक्ति की तस्वीर राकेश जायसवाल की बताई जा रही है, उसके नगर पालिका के आधिकारिक बैनर पर राकेश जायसवाल की तस्वीर को लेकर अब सीधा सवाल खड़ा हो गया है। आखिर किस शासनादेश, किस सरकारी आदेश अथवा किस वैधानिक पद के आधार पर यह तस्वीर लगाई गई?


🔴 किस अधिकार से सरकारी बैनर पर फोटो

बेशक! नगर पालिका के कार्यक्रम के आधिकारिक बैनर पर किसी व्यक्ति की तस्वीर लगना सामान्य निजी प्रचार से अलग विषय है। खासकर तब, जब उसी बैनर पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हों।ऐसे में नगर पालिका प्रशासन से सीधा सवाल है कि राकेश जायसवाल किस पद पर हैं?क्या वह निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं? क्या नगर पालिका के किसी वैधानिक पद पर हैं?क्या उन्हें नगर पालिका की ओर से किसी सरकारी आदेश के तहत अधिकृत किया गया है?अगर हां, तो वह आदेश सार्वजनिक किया जाए।

🔴 अध्यक्ष पति से सरकारी बैनर तक पहुंच कैसे?

मामला सिर्फ एक तस्वीर का नहीं है। तस्वीर सामने आने के साथ पिछली घटनाएं भी सवालों के घेरे मे हैं।पहले ईओ के साथ निर्माण कार्यों के निरीक्षण को लेकर सवाल उठा। फिर मुख्यमंत्री की वर्चुअल बैठक में निर्वाचित अध्यक्ष की जगह पति की मौजूदगी चर्चा में आई। विकास कार्यों के शिलापट्टों पर अध्यक्ष के नाम के साथ पति का नाम अंकित होने को लेकर सवाल उठे, और अब नगर पालिका के आधिकारिक कार्यक्रम के बैनर पर  नियम विरुद्ध राकेश जायसवाल की तस्वीर सुरसा की तरह मुंह बाये खडी है। सवाल यह है कि अध्यक्ष के पति के रूप में शुरू हुई मौजूदगी आखिर नगर पालिका के सरकारी प्रचार तक कैसे पहुंच गई?

🔴 2012 का शासनादेश फिर सवालों के केंद्र में

उत्तर प्रदेश नगर विकास विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर 10 अक्टूबर 2012 का शासनादेश संख्या 3905/नौ-1-2012-8ई/1995 दर्ज है। इसका विषय है“स्थानीय नगर निकायों में निर्वाचित महिला पदाधिकारियों के पति अथवा संबंधियों का निकाय के प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप के संबंध में दिशा-निर्देश।” यह शासनादेश निर्वाचित महिला पदाधिकारी द्वारा अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का स्वतंत्र रूप से निर्वहन किए जाने तथा उनके स्थान पर अथवा उनके साथ संबंधियों या अन्य व्यक्तियों को निकाय के कार्यों में शामिल न किए जाने संबंधी निर्देश हैं। ऐसे में कुशीनगर नगर पालिका का यह बैनर ने शासनादेश के औचित्य पर ही सवाल खडा कर दिया है। 

🔴 फोटो लगी है तो जिम्मेदारी भी तय हो

अब सवाल यह भी है कि बैनर किसने तैयार कराया?फोटो लगाने का निर्देश किसने दिया? बैनर की स्वीकृति किस अधिकारी ने दी? क्या अधिशासी अधिकारी ने इसे स्वीकृत किया? क्या नगर पालिका के किसी अभिलेख में राकेश जायसवाल को इस कार्यक्रम के लिए अधिकृत प्रतिनिधि बताया गया है?अगर कोई लिखित आदेश या अधिकृत पदनाम नहीं है तो फिर नगर पालिका के आधिकारिक बैनर पर उनकी तस्वीर लगाने का प्रशासनिक आधार क्या था?

🔴 रिपोर्ट - संजय चाणक्य



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