🔵 घोटाले की फाइल में नाम, फिर भी संवेदनशील तटबंध की कमान!
🔴महेश सिंह की पांच साल से कुशीनगर में तैनाती पर उठा सवाल, घिरी जिम्मेदारी
🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। जनपद में एपी तटबंध टूटने के बाद सिंचाई विभाग बाढ खंड की कार्यप्रणाली के साथ-साथ अधिशासी अभियंता महेश कुमार सिंह की तैनाती व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। सबब यह है कि बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता महेश कुमार सिंह वर्ष 2021-22 से जिले में तैनात हैं जबकि उनका नाम गोमती रिवर फ्रंट परियोजना से जुड़ी जांच में सामने आया था। इस प्रकरण में वर्ष 2023 में फील्ड मे इनकी तैनाती को लेकर शासन स्तर पर रोक संबंधी निर्देश जारी किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद महेश कुमार सिंह की कुशीनगर में फील्ड तैनाती बनी रही। अब एपी तटबंध टूटने के बाद सवाल उठ रहा है कि संवेदनशील बाढ़ प्रभावित जिले में वर्षों से महेश कुमार को फील्ड की जिम्मेदारी दिए जाने और शासन के निर्देशों के बीच विभागीय स्तर पर क्या खेला हो रहा था?
बेशक!मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के तटबंध टूटा तो सवाल सिर्फ टूटे हिस्से तक सीमित नहीं रहा। तटबंध की संवेदनशील जिम्मेदारी उस इंजीनियर के हाथ में होने को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। क्योकि अधिशासी अभियंता के जिले में वर्षों पुरानी तैनाती व्यवस्था के सवाल भी बाहर आ गए। गोमती रिवर फ्रंट प्रकरण में नाम सामने आने और वर्ष 2023 में ऐसे अभियंताओं की फील्ड तैनाती को लेकर शासन स्तर पर रोक के बावजूद बाढ़ खंड कुशीनगर के अधिशासी अभियंता महेश कुमार सिंह की जिले में वर्षों तक बनी रही तैनाती को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम है। सवाल इसलिए गंभीर है कि यह तैनाती किसी सामान्य कार्यालय की नहीं, बल्कि बाढ़ और तटबंधों की निगरानी वाली फील्ड जिम्मेदारी की है। अब एपी तटबंध टूटने के बाद वही पुराना सवाल फिर सामने है जब फील्ड पोस्टिंग को लेकर शासन की मंशा स्पष्ट थी तो कुशीनगर में महेश कुमार सिंह को वर्षों तक संवेदनशील तटबंधों की कमान किस आदेश और किस आधार पर मिली रही?
🔴 तटबंध टूटा तो उठे सवाल
28 सितंबर की रात मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के तटबंध के टूटने के बाद महेश कुमार सिंह की भूमिका और तैनाती को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह है कि कुशीनगर में तैनाती के दौरान उनके पास संवेदनशील एपी तटबंध की जिम्मेदारी भी रही। ऐसे में सवाल यह है कि जिस इंजीनियर की फील्ड तैनाती को लेकर शासन स्तर पर रोक का आदेश सामने आया था, उसे इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कैसे मिलती रही?
🔴 जांच हुई, कार्रवाई का दावा किया गया, फिर तैनाती कैसे?
गोमती रिवर फ्रंट मामले में वर्ष 2017 में न्यायिक जांच के आदेश के बाद सीबीआई ने भी 30 नवंबर 2017 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। बाद की कार्रवाई में 180 इंजीनियरों और कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की बात सामने आई। बजट जारी होने के बावजूद परियोजना में काम अधूरा रहने का मामला भी जांच के दायरे में रहा।इसी पूरे घटनाक्रम के बीच 2023 में फील्ड तैनाती को लेकर जारी निर्देश अब कुशीनगर में महेश कुमार सिंह की तैनाती के सवाल से जुड़ गए हैं।
🔴 2021-22 से कुशीनगर में तैनाती
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक महेश कुमार सिंह वर्ष 2021-22 से कुशीनगर में तैनात हैं। अब तटबंध टूटने के बाद उनकी जिम्मेदारी और तैनाती की प्रक्रिया पर सवाल खड़े होना विभाग के लिए भी गंभीर विषय बन गया है। मामला सिर्फ तटबंध टूटने का नहीं, बल्कि उस तटबंध की निगरानी किसके जिम्मे थी और शासन के पुराने निर्देशों का कितना पालन हुआ इसकी भी पड़ताल का है। सबसे बड़ा सवाल यही है जब फील्ड तैनाती पर रोक का आदेश था, तो कुशीनगर के संवेदनशील तटबंध की जिम्मेदारी उसी इंजीनियर तक कैसे पहुंची?
🔴 रिपोर्ट - संजय चाणक्य


