20 साल से जमे लेखपाल पर गंभीर आरोप, ग्रामसभा की जमीन पर खेल का दावा 🔵 मंडलायुक्त के दरबार में

🔴 पांच मकान, लग्जरी गाड़ियां और करोड़ों की जमीन के दावों ने खड़े किए सवाल, राजस्व अभिलेखों की जांच की मांग

🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर।ग्रामसभा की जमीन, राजस्व अभिलेख और सरकारी संपत्तियों की रखवाली की जिम्मेदारी जिन राजस्वकर्मियों पर है, उन्हीं पर अब गंभीर सवाल उठ गए हैं। बात कर रहे है जिले के तमकुहीराज तहसील में तैनात लेखपाल/राजस्व निरीक्षक जयंत गुप्ता की,जिनके  खिलाफ धधवा जगदीश गांव के राजकुमार यादव ने राजस्व निरीक्षक जयंत गुप्ता पर ग्रामसभा की संपत्ति के कथित दुरुपयोग,जमीनों पर अवैध कब्जा और अपने करीबी व्यक्ति के जरिए अकूत संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाते हुए गोरखपुर मंडलायुक्त से शिकायत की है।

 शिकायतकर्ता ने संबंधित राजस्व कर्मी जयंत गुप्ता की संपत्ति से लेकर ग्रामसभा की जमीनों के अभिलेखों तक की जांच कराने की मांग की है। जानकार कहते है कि आरोप सही हैं तो यह सिर्फ एक राजस्वकर्मी का मामला नहीं, बल्कि सरकारी जमीन की निगरानी और राजस्व व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल है।

🔴 दो दशक की तैनाती पर सवाल, तबादले का खेल या महज संयोग?

तरयासुजान थाना क्षेत्र के घघवा जगदीश गांव निवासी राजकुमार यादव ने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि जयंत गुप्ता करीब 20 वर्षों से क्षेत्र में तैनात हैं।शिकायतकर्ता का दावा है कि बीच-बीच में कुछ महीनों के लिए स्थानांतरण होने के बाद वह फिर उसी क्षेत्र में लौट आते हैं।सवाल यह है कि यदि तैनाती और वापसी का यह सिलसिला वास्तव में चलता रहा है, तो इसके पीछे क्या प्रशासनिक परिस्थितियां रहीं? क्या संबंधित कर्मचारी की तैनाती और स्थानांतरण के रिकॉर्ड की समीक्षा की गई है? लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में बने रहने से स्थानीय स्तर पर हितों के टकराव की आशंका तो नहीं पैदा हुई?इन सवालों का जवाब विभागीय अभिलेखों की जांच से ही सामने आ सकता है।

🔴 करीबी के नाम पर संपत्ति का दावा, आय के स्रोतों की जांच की मांग

शिकायत में एक ऐसे व्यक्ति का भी जिक्र है, जिसे आवेदक ने संबंधित राजस्वकर्मी का करीबी बताया है। आरोप है कि इस व्यक्ति के पास नगर में पांच स्थानों पर मकान, लग्जरी गाड़ियां और करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि संपत्तियों का विवरण शिकायती पत्र में दिया गया है। हालांकि, संपत्तियों का मालिकाना हक, उनके वास्तविक मूल्य और आय के स्रोतों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इसके बावजूद शिकायत में उठाए गए सवाल जांच की मांग जरूर करते हैं। यदि संपत्तियों और संबंधित राजस्वकर्मी के बीच किसी अनुचित लेन-देन या पद के दुरुपयोग का संबंध सामने आता है, तो यह जांच का गंभीर विषय होगा। इसके लिए संपत्ति के दस्तावेजों, खरीद के स्रोतों और संबंधित लेन-देन की पड़ताल जरूरी है।


🔴 गाटा संख्या 800, 802 और 799 पर नजर, ग्रामसभा की जमीन किसके कब्जे में?

शिकायत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ग्रामसभा की जमीनों से जुड़ा है। आवेदन में गाटा संख्या 800 (आबादी), 802 (नवीन परती) और 799 (सड़क) का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि इन जमीनों पर कथित अनियमितताएं हुई हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन भूखंडों का स्थान महत्वपूर्ण है और इन पर मौजूद कीमती पेड़ों को लेकर भी राजस्व अभिलेखों में अनियमितता बरते जाने का आरोप है। मण्डलायुक्त को दिये प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि गाटा संख्या 802 और 799 पर मौजूद पेड़ों का पूरा विवरण अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि गाटा संख्या 802 की जमीन पर मौजूद पुराने पेड़ों और कथित कब्जे के मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।ऐसे में जांच के तीन अहम बिंदु हैं पहला, राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि का वास्तविक क्षेत्रफल और मौके की स्थिति क्या है? दूसरा, ग्रामसभा की जमीन पर किसका कब्जा है और वह वैध है या अवैध? तीसरा, सरकारी भूमि पर मौजूद पेड़ों का विवरण अभिलेखों में दर्ज है या नहीं? इन बिंदुओं की स्थलीय जांच और अभिलेखों के मिलान से ही आरोपों की सच्चाई स्पष्ट हो सकती है। राजकुमार यादव ने मंडलायुक्त गोरखपुर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

🔵रिपोर्ट-संजय चाणक्य /संयोग श्रीवास्तव 


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