कप्तानगंज चीनी मिल की बाउंड्री में सरकारी जमीन! 3.85 करोड़ की कुर्की और बंजर भूमि पर कब्जे से उठे सवाल

🔴कप्तानगंज चीनी मिल की बाउंड्री में सरकारी जमीन! 3.85 करोड़ की कुर्की और बंजर भूमि पर कब्जे से उठे सवालकुशीनगर में छह सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट से उठे सवाल, 1.32 हेक्टेयर बंजर जमीन मिल की बाउंड्री के अंदर, नोटिस का जवाब भी नहीं मिला संतोषजनक 3.26 एकड़ बंजर जमीन मिल की बाउंड्री में कैद! आखिर सरकारी संपत्ति कब होगी कब्जामुक्त?

🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। जिले के कप्तानगंज की चीनी मिल से जुड़ी जमीन का मामला सरकारी अभिलेखों, करोड़ों रुपये की राजस्व वसूली और बंजर भूमि पर कब्जे के सवालों में उलझ गया है। 19 अगस्त 2026 की जांच आख्या में दर्ज इन तथ्यों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है, बंजर भूमि पर कब्जे का मामला अब तक क्यों नहीं सुलझा और करोड़ों रुपये की वसूली से जुड़े मामले में जमीन को भारमुक्त करने के बाद अभिलेख दुरुस्त करने की नौबत क्यों आई?मामले का दूसरा अहम पहलू यह है कि सोमैया ऑर्गेनिक्स इंडिया लिमिटेड की नौ गाटा संख्या वाली जमीन को 3,85,23,994 रुपये और अन्य देयों का भुगतान नहीं होने के कारण वर्ष 2016 में कुर्क किया गया था। जांच आख्या के अनुसार, 22 दिसंबर 2023 को संबंधित भूमि को भारमुक्त कर दिया गया, लेकिन दो गाटा संख्याओं की भारमुक्ति खतौनी में दर्ज नहीं हो सकी थी। इस त्रुटि को सुधारने के लिए तहसीलदार को पत्र भेजे जाने का उल्लेख भी रिपोर्ट में है।


🔴 छह सदस्यीय टीम ने की जांच, जिलाधिकारी को सौंपी आख्या

नगर पंचायत कप्तानगंज के वार्ड नंबर दो निवासी रामनरेश अग्रहरी की शिकायतों के आधार पर जिलाधिकारी के कार्यालय आदेश दिनांक 10 अप्रैल 2026 के तहत जांच टीम गठित की गई थी। टीम में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व),सहायक महानिरीक्षक निबंधन, हाटा और कप्तानगंज के उपजिलाधिकारी, जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) तथा जिला गन्ना अधिकारी को शामिल किया गया।जांच का दायरा तीन प्रमुख बिंदुओं तक सीमित था। पहला, डिस्टलरी के नाम पर जमीन के हस्तांतरण का आधार। दूसरा, संबंधित जमीन पर कुर्की, ऋण और बंधक की स्थिति। तीसरा, मिल परिसर में मौजूद बंजर, आबादी और राजकीय भूमि का विवरण।

🔴 3.85 करोड़ रुपये की वसूली के लिए कुर्क हुई थी जमीन

जांच रिपोर्ट में दर्ज राजस्व अभिलेखों के अनुसार, जेआर ऑर्गेनिक्स लिमिटेड, इकाई कप्तानगंज/सोमैया ऑर्गेनिक्स इंडिया लिमिटेड के नाम दर्ज नौ गाटा संख्याओं की जमीन को उपजिलाधिकारी कप्तानगंज ने 18 जनवरी 2016 को कुर्क किया था।कुर्की का आधार 3,85,23,994 रुपये तथा अन्य देयों का भुगतान नहीं होना बताया गया है। यह राशि सरकारी वसूली से जुड़ी कार्रवाई के संदर्भ में रिपोर्ट में दर्ज है। इसके बाद 22 दिसंबर 2023 को उपजिलाधिकारी के आदेश से संबंधित जमीन को भारमुक्त कर दिया गया। जांच आख्या के मुताबिक, गाटा संख्या 1198, 1215, 1229, 1292, 1399, 1488क और 779ख के साथ गाटा संख्या 780क तथा 1294क को भी भारमुक्त किया गया था।लेकिन रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक विसंगति सामने आई। गाटा संख्या 780क और 1294क को भारमुक्त किए जाने के बावजूद खतौनी में इसका उल्लेख दर्ज नहीं हो पाया था। जांच में इसे अभिलेखीय त्रुटि बताया गया और इसे दुरुस्त कराने के लिए तहसीलदार को पत्र भेजे जाने की जानकारी दी गई।यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जांच आख्या में खतौनी की प्रविष्टि छूटने को त्रुटिवश बताया गया है। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर इसे जानबूझकर की गई गड़बड़ी या भ्रष्टाचार कहा जाए या मानवीय त्रुटि यह गंभीर जांच का विषय है।  हालांकि, करोड़ों रुपये की वसूली से जुड़े प्रकरण में कुर्की और भारमुक्ति के आदेशों का राजस्व अभिलेखों में समय से सही अंकन होना प्रशासनिक जवाबदेही का अहम विषय है।

🔴 जमीन के हस्तांतरण में क्या कहता है निबंधन विभाग का रिकॉर्ड?

शिकायत में वर्ष 1970 में राज्यपाल के स्तर से डिस्टलरी के लिए जमीन दिए जाने और बाद में उसके अलग-अलग नामों पर हस्तांतरण को लेकर सवाल उठाए गए थे। उपनिबंधक हाटा की आख्या में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर बताया गया कि 16 सितंबर 1970 को शंकर डिस्टलरी एंड केमिकल वर्क्स लिमिटेड के पक्ष में 28.67 एकड़ जमीन से संबंधित विक्रय विलेख पंजीकृत हुआ था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संबंधित विलेख में कंपनी को भूमि गोदावरी शुगर मिल्स लिमिटेड को हस्तांतरित करने की अनुमति का जिक्र था।इसके बाद गोदावरी शुगर मिल्स लिमिटेड से सोमैया ऑर्गेनिक्स लिमिटेड के पक्ष में जमीन के विक्रय से संबंधित विलेख 8 नवंबर 1968 को पंजीकरण के लिए प्रस्तुत किए जाने का विवरण भी जांच आख्या में दिया गया है। स्टांप शुल्क की कमी के कारण यह प्रकरण तत्कालीन देवरिया के स्टांप प्राधिकारी के पास भेजा गया और बाद में विलेख 16 जून 1994 को पंजीकृत हुआ। उपनिबंधक हाटा की रिपोर्ट में इन विलेखों के अतिरिक्त सोमैया ऑर्गेनिक्स इंडिया लिमिटेड से संबंधित कोई अन्य विक्रय विलेख कार्यालय में पंजीकृत नहीं मिलने की बात कही गई है।दूसरी ओर, उपनिबंधक कप्तानगंज की रिपोर्ट में 19 अप्रैल 2022 को जेआर ऑर्गेनिक्स लिमिटेड, जिसे पूर्व में सोमैया ऑर्गेनिक्स इंडिया लिमिटेड बताया गया है, और ए. इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के बीच विक्रय अनुबंध पंजीकृत होने का उल्लेख है।इसकी अवधि समाप्त होने के बाद 15 अप्रैल 2025 को अवधि विस्तार का विलेख भी पंजीकृत कराया गया।



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