🔴 पहले भी प्रधान के पिता और भाई के नाम हो चुका पट्टा, प्रधान के परिवार मे ही सरकारी सुविधा क्यो? प्रधान रफीक पर उठे सवाल
सोहरौना गांव मे नियम विरुद्ध आवंटित भिसवा लाला के प्रधान का पट्टा
🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। सूबे के वजीजेआला योगी आदित्यनाथ जहां भू-माफियाओं पर नकेल कसने के लिए एंटी भू-माफिया अभियान चला रखा है वही लेखपाल व भू-माफियाओं के मिलीभगत से एंटी भू-माफिया अभियान जिले में हाथी दांत साबित हो रहा है। नतीजतन भू-माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद है कि खुद प्रधान के पद पर होते हुए रकीक अंसारी ने दुसरे ग्रामसभा मे बिना किसी प्रस्ताव व अनुमोदन के नियम विरुद्ध गांव की बेशकीमती सरकारी जमीन का पट्टा करा लिया है। इससे पहले प्रधान रफीक ने अपने पिता और भाई के नाम पट्टा व भाई की पत्नी के नाम सरकारी राशन की दुकान आवंटित कराया था। अब सवाल यह उठता है कि भिसवा लाला के ग्राम प्रधान रफीक अंसारी को ग्रामसभा सोहरौना में पट्टा किस नियम और पात्रता के आधार पर हुआ है ? सवाल यह है कि क्या एंटी भू-माफिया अभियान के तहत सरकारी जमीन के अनियमित आवंटन की जांच होगी या मामला राजस्व अभिलेखों तक ही सीमित रहेगा ? यह भविष्य के गर्भ मे है।
बेशक! मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सोहरौना गांव में भिसवा लाला के प्रधान रफीक अंसारी के नाम पट्टा है। सवाल यह है कि कोई व्यक्ति दूसरे गांव में जमीन का पट्टा ले सकता है या नहीं, इसके अलावा सवाल यह भी है कि संबंधित भूमि किस श्रेणी की थी, आवंटन के समय लागू नियम क्या थे और प्रधान निर्धारित पात्रता पूरी करते थे या नहीं। यदि भूमि सार्वजनिक उपयोग, आरक्षित श्रेणी अथवा ऐसी श्रेणी की है जिसका आवंटन संबंधित व्यक्ति के पक्ष में कानूनन प्रतिबंधित है, तो आवंटन की वैधता पर गंभीर प्रश्न खड़ा हो रहा हैं। वहीं, यदि भूमि का आवंटन नियमानुसार हुआ है तो तत्कालिक एसडीएम ने रफीक अंसारी को बेदख क्यो कर दिया था। ऐसी स्थिति मे प्रशासन को सोहरौना गांव में रफीक अंसारी के नाम नियम विरुद्ध पट्टे की मूल पत्रावली सामने लाकर यह स्पष्ट करना होगा कि प्रस्ताव किस स्तर पर तैयार हुआ, किस अधिकारी ने संस्तुति दी और सक्षम प्राधिकारी ने किस आधार पर आवंटन को मंजूरी दी।
🔴बिना प्रस्ताव पट्टा कराने का आरोप, लेखपाल की भूमिका भी जांच के दायरे में
सूत्रों के मुताबिक पडरौना विकासखंड क्षेत्र के सोहरौना गांव मे भिसवा लाला के ग्राम प्रधान रफीक अंसारी के नाम किये गये पट्टा बिना किसी प्रस्ताव के नियम विरुद्ध तरीके से लेखपाल द्वारा मोटी रकम लेकर किया गया है, जिसकी चर्चा लोगो के जुबान पर है। यदि प्रस्ताव के बिना या गलत तथ्यों के आधार पर रफीक के नाम से पट्टा आवंटित किया गया है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि संबंधित रिपोर्ट किसने तैयार की, भूमि का सत्यापन किस आधार पर किया गया और आवंटन की फाइल किन अधिकारियों के माध्यम से आगे बढ़ी। जानकारों का कहना है कि योगी सरकार की छवि धूमिल करने व एंटी भू-माफिया अभियान की माखौल उडाने के उददेश्य से तहसील के लेखपाल द्वारा मोटी रकम वसूल कर इस तरह के कृत्य को अंजाम दिया गया है। जिलाधिकारी को चाहिए कि जांच सिर्फ पट्टा प्राप्त करने वाले रफीक अंसारी तक सीमित न रखकर पूरी प्रक्रिया में शामिल राजस्व कर्मियों और अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराएं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो सके।
🔴भिसवा लाला में भी रफीक के परिवार के नाम पट्टा होने का दावा
भिसवा लाला के प्रधान रफीक अंसारी को लेकर ग्रामीणों की शिकायतें केवल सोहरौना के कथित पट्टे तक सीमित नहीं हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भिसवा लाला में रफीक अंसारी के पिता और भाई के नाम भी पट्टा आवंटित हुआ हैं। दूसरी ओर, कुछ पात्र पट्टाधारकों को आवंटित भूमि पर प्रधान द्वारा कब्जा नहीं दिलाने का आरोप भी लगाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि अपने अधिकार के लिए आवाज उठाने वालों पर दबाव बनाया जाता है। कुछ ग्रामीणों ने पैसे की मांग किए जाने का आरोप भी लगाया है। यहां जरूरी यह है कि एक ही पंचायत में परिवार के कई सदस्यों को सरकारी भूमि आवंटित हुई है, तो प्रशासन को प्रत्येक आवंटन की स्वतंत्र रूप से जांच करने मे गुरेज नही करनी चाहिए। इससे स्पष्ट हो जायेगा कि सभी पट्टे नियमानुसार हुए या किसी मामले में पात्रता अथवा प्रक्रिया की अनदेखी की गई।
🔴भाई की पत्नी के नाम कोटे की दुकान, प्रक्रिया पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने प्रधान रफीक के भाई की पत्नी के नाम सरकारी राशन की दुकान आवंटित होने पर भी सवाल उठाए हैं। इस मामले में दुकान आवंटन की तारीख, लागू पात्रता शर्ते, चयन प्रक्रिया और संबंधित आदेशों की जांच आवश्यक है। ताकि आवंटन प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन या अनुचित प्रभाव के साक्ष्य मिलते हैं, तो जिम्मेदारी तय की जा सके। ग्रामीणों ने स्थानीय लेखपाल और ग्राम पंचायत सचिव की ओर से तैयार की जाने वाली रिपोर्टों पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि शिकायतों के निस्तारण में वास्तविक स्थिति के विपरीत रिपोर्ट लगाए जाने से पात्र लोगों की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।इन आरोपों की जांच के लिए संबंधित शिकायतों, स्थलीय निरीक्षण रिपोर्टों और राजस्व अभिलेखों का मिलान किया जाना जरूरी है। यदि किसी कर्मचारी ने जानबूझकर गलत रिपोर्ट तैयार की है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
नोट-अगले अंक मे पढे भिसवा लाला गांव के प्रधान रफीक अंसारी की कारगुजारी की कहानी....
🔴 रिपोर्ट - संजय चाणक्य

