तमकुहीराज में बालू के कथित ‘कागजी खेल’ से हड़कंप, 12 चक्का ट्रक और 25 घनमीटर का आईएसटीपी

 

🔴तमकुहीराज में बालू के कथित ‘कागजी खेल’ से हड़कंप, 12 चक्का ट्रकऔर 25 घनमीटर का आईएसटीपी

🔴बालू परिवहन के ‘मैनेजमेंट’ पर उठी उंगली

🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। बालू के धंधे में अब खेल सिर्फ ट्रकों की ओवरलोडिंग का नहीं, कागजों की ‘लोडिंग’ का भी नजर आ रहा है। तमकुहीराज में 12 चक्का ट्रक यूपी53ईटी/1621 पर कथित तौर पर 25 घनमीटर बालू का आईएसटीपी सामने आने के बाद परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि आईएसटीपी किसी बड़े ट्रेलर के लिए तैयार हुआ था, बाद में ट्रेलर का नंबर हटाकर 12 चक्का ट्रक का नंबर चढ़ा दिया गया, लेकिन 25 घनमीटर की मात्रा बदलना भूल गए। यानी नंबर बदल गया, वाहन बदल गया, मगर कागज पर बालू की मात्रा वहीं रह गई। अब सवाल यह है कि यह महज तकनीकी चूक है या बालू के खेल में कागजों के जरिए रास्ता बनाने का सुनियोजित तरीका?मामला इसलिए भी गंभीर है कि क्षेत्र में बड़े वाहनों को कथित तौर पर महज चार घनमीटर के आईएसटीपी पर चलाने और पिकेटों से ‘मैनेजमेंट’ के जरिए वाहनों को पार कराने की चर्चाएं हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि पिछले दो महीनों के आईएसटीपी, खदानों के डिस्पैच रिकॉर्ड और सड़क पर दौड़े वाहनों का मिलान हो गया, तो कागजों में छिपी कहानी और सड़क पर दौड़ते ट्रकों की हकीकत आमने-सामने होगी।मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि यूपी53 ईटी /1621 जैसे 12 चक्का वाहन की वास्तविक लोडिंग क्षमता कितनी है और उसके मुकाबले आईएसटीपी में 25 घनमीटर बालू कैसे दर्ज हुई? क्या वाहन की क्षमता और दस्तावेज में दर्ज मात्रा का कोई तकनीकी आधार है? या फिर किसी दूसरे, बड़े वाहन के लिए तैयार आईएसटीपी में बाद में नंबर बदलकर इसका इस्तेमाल किया गया?इन सवालों का जवाब दस्तावेजों की तकनीकी जांच और संबंधित खदान के रिकॉर्ड के मिलान कराने से ही सामने आ सकता है। इस लिए सिर्फ सड़क पर वाहन देखकर मामला निपटाने के बजाय आईएसटीपी  का मूल रिकॉर्ड, वाहन का पंजीयन, खदान का डिस्पैच रजिस्टर और इलेक्ट्रॉनिक लॉग एक साथ खंगालना जरूरी है।

🔴चार घनमीटर के आईएसटीपी से बड़े वाहनों का खेल?

तमकुहीराज क्षेत्र में एक और गंभीर आरोप चर्चा में है।आरोप है कि 14, 16, 18 और 22 चक्का वाहनों को छोटे वाहन के रूप में दिखाकर महज चार घनमीटर का  आईएसटीपी जारी कराया जा रहा है। यदि ऐसा हो रहा है तो सवाल सिर्फ नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व के संभावित नुकसान का भी है।इस कथित खेल की असल तस्वीर किसी एक वाहन को पकड़ने से नहीं, बल्कि पिछले दो महीनों के रिकॉर्ड के डेटा मिलान से सामने आएगी। वाहन नंबर, वाहन का प्रकार,  आईएसटीपी में दर्ज मात्रा, खदान से निकलने का समय और गंतव्य इन सभी बिंदुओं का क्रॉस-वेरिफिकेश कराया जाए तो संदिग्ध पैटर्न आसानी से पकड़ा जा सकता है।

🔴टड़वा से बनकटा तक पिकेटों पर उठ रहे सवाल

तमकुही थाना क्षेत्र के टड़वा चौराहा, सरेया खुर्द पुल, समउर, रकबा और बनकटा इलाके में बिना आईएसटीपी अथवा संदिग्ध दस्तावेज वाले बालू लदे वाहनों के आवागमन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।आरोप है कि कुछ वाहनों को स्थानीय स्तर पर कथित ‘मैनेजमेंट’ के जरिए सीमा पार कराया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि पिकेटों से गुजरने वाले वाहनों और उनके आईएसटीपी का मिलान नहीं कराया जाता है तो निगरानी व्यवस्था की वास्तविक सच सामने नही आयेगा। जानकारों का कहना है कि पिकेट पर तैनाती, वाहन जांच और रोजाना पकड़े-छोड़े गए वाहनों का रिकॉर्ड इस पूरे मामले की महत्वपूर्ण कड़ी हो सकता है। तरयासुजान में नंबर बदलने का मामला पहले ही सामने आ चुका इसी बीच तरयासुजान थाना क्षेत्र में आईएसटीपी से बचने के लिए एक वाहन पर दूसरे ट्रक का नंबर इस्तेमाल किए जाने के आरोप में बीआर 28 जीए/9448 वाहन पकड़े जाने और जालसाजी का मुकदमा दर्ज होने की घटना भी सामने आ चुकी है। ऐसे में तमकुहीराज में कथित आईएसटीपी छेड़छाड़ के आरोप को महज अफवाह मानकर नजर अंदाज करना जांच एजेंसियों के लिए आसान नहीं होगा। जानकार कहते है कि दोनों घटनाओं की कार्यप्रणाली में यदि कोई समानता सामने आती है तो यह भी जांच का विषय होगा कि कहीं बालू परिवहन में दस्तावेज और वाहन नंबर के साथ छेड़छाड़ कोई अलग-अलग घटनाएं हैं या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा।

🔴कप्तान के आदेश के बावजूद सड़क पर सवाल

अवैध बालू परिवहन पर पुलिस अधीक्षक केशव कुमार की सख्ती और कार्रवाई के निर्देशों के बावजूद यदि संदिग्ध आईएसटीपी वाले वाहनों का लगातार सीमा क्षेत्र में आवाजाही हो रहा हैं, तो सवाल स्थानीय निगरानी तंत्र पर उठना स्वाभाविक है।

🔴आदेश ऊपर से और ‘मैनेजमेंट’ नीचे से

यह आरोप सही है तो व्यवस्था की पूरी कड़ी की जांच जरूरी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पिछले दो महीनों में कितने आईएसटीपी  जारी हुए और उनमें कितने वाहनों की वास्तविक क्षमता से अधिक मात्रा दर्ज हुई? कितने वाहनों के नंबर और आईएसटीपी के विवरण में विसंगति मिली? कितने वाहन खदान से निकले और कितने वास्तव में संबंधित गंतव्य तक पहुंचे?

🔴डीएम-एसपी कराएं दो माह के आईएसटीपी का क्रॉस-वेरिफिकेशन

विशेषज्ञों की माने तो मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पिछले दो महीनों में जारी सभी आईएसटीपी का वाहनवार ऑडिट कराया जाना चाहिए। संबंधित बालू खदानों से कुशीनगर, गोरखपुर और महराजगंज की ओर भेजे गए वाहनों की सूची निकालकर उनके  आईएसटीपी से मिलान हो।इसके साथ ही वाहन के आरसी रिकॉर्ड, चक्का संख्या, अनुमन्य क्षमता और आईएसटीपी में दर्ज मात्रा का तकनीकी परीक्षण कराया जाए।यदि जांच में एक भी ऐसा पैटर्न सामने आता है जिसमें वाहन बदला गया, मात्रा नहीं बदली गई या बड़े वाहन को छोटे वाहन के रूप में दर्ज किया गया, तो जांच को सिर्फ वाहन चालक तक सीमित रखने के बजाय आईएसटीपी  जारी करने से लेकर खदान से लोडिंग और रास्ते में वाहन की निगरानी तक पूरी श्रृंखला की जिम्मेदारी तय करनी होगी। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन 12 चक्का ट्रक पर 25 घनमीटर बालू का आईएसटीपी और वाहन नंबर बदलने की आशंका ने इतने सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं कि अब जवाब सड़क पर नहीं, रिकॉर्ड की जांच में तलाशना होगा। यदि रिकॉर्ड साफ है तो जांच आरोपों को गलत साबित कर देगी; और यदि रिकॉर्ड में खेल है तो यही जांच उस नेटवर्क तक पहुंचने का रास्ता भी खोल सकती है, जहां से कथित तौर पर बालू, आईएसटीपी  और ‘मैनेजमेंट’ का खेल संचालित हो रहा है।

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य



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