निरीक्षण से बौखलाई नपाध्यक्ष ने निरीक्षण पर उठाया सवाल, डीएम ने बैठा दी जांच, अब 11 बिंदुओं पर खुलेगा पालिका का राज

 


🔴पालिका के ‘विकास’ पर डीएम की नजर, 11 बिंदुओं की जांच से खुलेगा सरकारी धन का हिसाब नोटिस बनाम निरीक्षण की जंग के बीच डीएम का रुख कडा, सात दिन में मांगी 11 बिंदुओं की रिपोर्ट

🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। नगर पालिका परिषद कुशीनगर में विकास कार्यों पर खर्च धन को लेकर उठते सवाल अब महज आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहे। मीडिया की लगातार रिपोर्टों और शिकायतों के बीच एसडीएम के औचक निरीक्षण ने पालिका के कामकाज को जांच के घेरे में ला दिया। निरीक्षण से बिलबिलाई नपाध्यक्ष की ओर से एसडीएम को नोटिस देकर अधिकारिता पर उठाया गया सवाल पालिका अध्यक्ष किरन जायसवाल की गले की फांस बन गयी। सबब यह है कि नपाध्यक्ष की नोटिस की स्याही अभी फीकी भी नही हुई कि जिलाधिकारी ने नगरपालिका के खिलाफ 11 बिन्दुओ की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर सात दिन में अभिलेखीय और स्थलीय रिपोर्ट तलब की है।  अब सवाल यह नहीं कि एसडीएम को निरीक्षण का अधिकार था या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि नगर पालिका की फाइलें खुलेंगी तो विकास की तस्वीर सामने आएगी या सरकारी धन के कथित खेल की पर्तें खुलेगी ? यानी अब बहस इस बात पर नहीं होगी कि एसडीएम नगर पालिका क्यों पहुंचे, बल्कि जांच यह बताएगी कि नगर पालिका में विकास कार्यों के नाम पर अब तक  क्या खेल होता रहा है।

कहना न होगा कि नगर पालिका में कराए जा रहे विकास कार्य लंबे समय से सवालों के घेरे में हैं। सड़क, इंटरलॉकिंग, नाली, सौंदर्यीकरण और अन्य निर्माण कार्यों में खर्च धन, काम की गुणवत्ता, लागत, सामग्री और भुगतान प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे और शिकायतें सामने आती रहीं। मीडिया ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।इसी बीच प्रशासन तक शिकायतें पहुंचीं। सूत्रों के अनुसार, नगर पालिका की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम कसया ने नगर पालिका कार्यालय का औचक निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान अभिलेखों और पंजिकाओं की पड़ताल किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद नपाध्यक्ष किरन जायसवाल की ओर से एसडीएम को नोटिस जारी कर निरीक्षण के अधिकार और प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए गए।

🔴 प्रशासनिक जांच की लगी मुहर

डीएम के 25 अगस्त 2026 के आदेश के सामने आने के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर पहले से चल रही चर्चाओं को अब प्रशासनिक जांच की मुहर मिल गई है।शिकायतकर्ता राहुल सिंह की शिकायत में नगर पालिका परिषद कुशीनगर में कराए जा रहे निर्माण कार्यों और विद्युत सामग्री से संबंधित कार्यों में भारी अनियमितता किए जाने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के इन्हीं 11 बिंदुओं पर अब प्रशासन दस्तावेज और जमीन दोनों पर पड़ताल करेगा।


🔴एसडीएम के निरीक्षण पर उठे सवाल के बीच डीएम ने खोल दी जांच की फाइल

जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर का आदेश उस समय सामने आया है, जब बीते दिनों नगर पालिका कार्यालय में उपजिलाधिकारी कसया विवेक कुमार मिश्र ने औचक निरीक्षण किया था और इस निरीक्षण से बौखलाई  नपाध्यक्ष किरन जायसवाल की ओर से बकाये पत्र जारी कर सवाल खड़े किए गए थे। इतना ही नही नपाध्यक्ष की बौखलाहट का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होने एसडीएम के निरीक्षण, अभिलेखों की मांग और अधिकार क्षेत्र पर न सिर्फ आपत्ति जताई बल्कि सवाल भी खडे कर दिये। लेकिन अब तस्वीर बदल गयी है। जिस नगर पालिका के निरीक्षण पर ‘अधिकार’ को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे थे, उसी पालिका के निर्माण कार्यों और विद्युत सामग्री की खरीद से जुड़े 11 बिंदुओं की जांच के लिए जिलाधिकारी ने बाकायदा कमेटी बैठा दी है। यानी मामला अब केवल यह नहीं रह गया कि एसडीएम को निरीक्षण का अधिकार था या नहीं। अब असली सवाल यह है कि नगर पालिका में विकास और खरीद के नाम पर हुए काम-काज का हिसाब-किताब क्या कहता है।


🔴तीन सदस्यीय कमेटी करेगी अभिलेखीय और स्थलीय जांच

जिलाधिकारी ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसमें उपजिलाधिकारीकसया विवेक कुमार मिश्र को  अध्यक्ष, सहायक अभियंता विद्युत वितरण खंड कुशीनगर एंव सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग (प्रांतीय खंड), कुशीनगर मुकेश वर्मा को सदस्य नामित किया गया है। कमेटी को शिकायत में उल्लिखित बिंदुओं पर अभिलेखीय एवं स्थलीय निरीक्षण कर संयुक्त आख्या, स्पष्ट संस्तुति सात दिन के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जांच केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी। कागज पर क्या हुआ और जमीन पर वास्तव में क्या हुआ दोनों का मिलान किया जाएगा।

🔴एसडीएम के निरीक्षण से शुरू हुआ विवाद, डीएम के आदेश पर पहुंचा निर्णायक मोड़

घटनाक्रम की पूरी कड़ी को देखें तो तस्वीर साफ है। शिकायतें उठीं, मीडिया ने मुद्दे को लगातार सामने रखा, एसडीएम ने नगर पालिका का औचक निरीक्षण किया, नपाध्यक्ष ने निरीक्षण पर सवाल उठाते हुए नोटिस दिया और अब डीएम ने 11 बिंदुओं की जांच के लिए कमेटी बैठा दी।अब  बहस इस बात पर होनी चाहिए  कि जनता के पैसे से हुए विकास कार्यों का हिसाब कौन देगा?सात दिन बाद आने वाली जांच रिपोर्ट इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी। फिलहाल डीएम के आदेश ने नगर पालिका के उन फाइलों पर प्रशासन की नजर डाल दी है, जिनमें अब तक विकास के दावे दर्ज है। अब देखना यह है कि फाइलों के पन्नों से विकास की तस्वीर निकलती है या सरकारी धन के कथित बंदरबांट के खेल की कहानी। 

नोट-अगले अंक पढे..... अध्यक्ष जी! राकेश जायसवाल किस अधिनियम और शासनादेश के तहत ईओ के साथ कर रहे है निर्माण कार्यों का निरीक्षण, इनको कब जारी होगा नोटिस? 

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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