न्याय की कुर्सी से ‘जमीन का सौदा’, तहसीलदार चंदन शर्मा पर गंभीर आरोप”


🔵तहसीलदार की चली कलम और करोड़ों की जमीन मां के नाम बैनामा 

🔴जिस जमीन पर सुनाया फैसला, उसी का करा लिया बैनामा, तहसीलदार पर गंभीर आरोप”

🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। जनपद के कप्तानगंज तहसील में तैनात तहसीलदार चंदन शर्मा एक बार फिर आरोपों के घेरे में हैं, आरोप इतना संगीन है कि राजस्व विभाग की साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। तहसीलदार चंदन शर्मा पर लगे आरोप पर गौर करे तो उन्होंने करोड़ों रुपये कीमत की विवादित भूमि के मुकदमे में न्याय की कुर्सी को निजी सौदेबाजी का जरिया बना दिया। आरोप है कि तहसीलदार ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए विवादित जमीन के मुकदमे में एकपक्षीय फैसला दिया और बदले में उसी विवादित भूमि के हिस्से का बैनामा अपनी मां श्रीमती निर्मला शर्मा के नाम करा लिया।

चौंकाने वाली बात यह है कि विवादित भूखंड का बैनामा होने के बाद महज 15 दिनों के भीतर नामांतरण आदेश भी पारित कर दिया गया, जबकि सामान्य परिस्थितियों में ऐसे मामलों में लंबी प्रक्रिया और जांच होती है। इससे यह संदेह और गहरा गया है कि पूरा खेल पहले से तय पटकथा के तहत खेला गया। बताया जाता है कि संबंधित भूमि को लेकर वर्षों से विवाद चल रहा था और मामला राजस्व न्यायालय में विचाराधीन था। आरोप है कि तहसीलदार चंदन शर्मा ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर एक पक्षीय निस्तारण किया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिस अधिकारी को निष्पक्ष न्याय करना था, वही स्वयं विवादित संपत्ति का लाभार्थी बन बैठा।

🔴 फैसला भी अपना, फायदा भी अपना

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि सरकारी कुर्सी का खुला दुरुपयोग और न्यायिक प्रक्रिया की हत्या है। तहसील परिसर से लेकर गांवों तक इस मामले की चर्चा जोरों पर है। लोग यह कहने से गुरेज नही कर रहे है कि अब कप्तानगंज तहसील में फैसले कानून से नहीं, बल्कि जमीन के सौदे से तय होंगे? मामले को लेकर आम लोगों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री, राजस्व परिषद और उच्चाधिकारियों को शिकायत भेजकर तहसीलदार चंदन शर्मा के खिलाफ कठोर कार्रवाई और उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पूरे मामले में सत्ता और पद का दुरुपयोग कर नियमों को रौंदा गया। हालाकि जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर का कहना है कि  कप्तानगंज तहसील में कुछ जमीनों की खरीद-फरोख्त में स्थानीय तहसीलदार की भूमिका की बात सामने आई है. प्रकरण की जांच के लिए एसडीएम हाटा को जांच अधिकारी नामित कर दिया गया है। 


🔴तमकुहीराज में भी विवादों से रहा नाता

बेशक! यह पहला मौका नहीं है जब तहसीलदार चंदन शर्मा का नाम विवादों में आया है। इससे पहले जनपद के तमकुहीराज तहसील में तैनाती के दौरान भी उन पर कई गंभीर आरोप लगे थे। हालांकि तब मामला ठंडे बस्ते में चला गया, लेकिन कप्तानगंज में उठे नए बवंडर ने पुराने आरोपों को फिर जिंदा कर दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि  शासन इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई कर्ता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?

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