महिला आयोग की उपाध्यक्ष के निरीक्षण में खुली स्वास्थ्य विभाग की सड़ी हकीकत, डॉक्टरों की ‘रेफरल दलाली’ पर फूटा गुस्सा
मरीज बेहाल, डॉक्टर मालामाल? मेडिकल कॉलेज में मचा हड़कंप
🔴 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। जिला मुख्यालय रवीन्द्रनगर स्थित मेडिकल कॉलेज में इलाज के नाम पर चल रहे खेल की परतें उस समय एक-एक कर खुलती चली गईं, जब उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी गुरुवार को अचानक अस्पताल पहुंच गईं। निरीक्षण के दौरान जो तस्वीर सामने आई,उसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली, लापरवाही और कथित कमीशनखोरी की पूरी कहानी बयां कर दी।अस्पताल में मरीज दर्द से कराहते मिले, तीमारदार परेशान दिखे और डॉक्टरों पर गरीबों को निजी जांच केंद्रों की तरफ धकेलने के गंभीर आरोप लगे। महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने जब मरीजों से सीधा संवाद किया तो शिकायतों की झड़ी लग गई। किसी ने कहा दवा बाहर से खरीदनी पड़ रही है, तो किसी ने बताया कि अस्पताल में मशीनें होने के बावजूद जांच बाहर कराई जा रही है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब स्त्री रोग विशेषज्ञ के कक्ष में निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर की रेफरल पर्चियां मिलीं। यानी सरकारी अस्पताल के अंदर से ही मरीजों को निजी सेंटरों की ओर भेजने का खेल खुलेआम चल रहा था। ओपीडी में भी कई मरीज बाहर जांच कराने की पर्चियां लेकर घूमते मिले।

यह सब देखकर महिला आयोग की उपाध्यक्ष का पारा चढ़ गया। उन्होंने सीएमएस और संबंधित डॉक्टरों को फटकार लगाते हुए कहा कि गरीब मरीजों को इलाज के नाम पर लूटा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी अस्पताल अगर निजी सेंटरों के लिए “दलाली केंद्र” बन जाएंगे, तो गरीब आखिर कहां जायेगें ? निरीक्षण के दौरान अस्पताल की लिफ्ट बंद मिली, जबकि उसके आसपास कर्मचारियों की बाइकें खड़ी थीं। वार्डों में गंदगी पसरी थी और दोपहर तक सफाई चल रही थी। इस पर उन्होंने कर्मचारियों को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि अस्पताल में मरीज इलाज के लिए आते हैं, यातना झेलने के लिए नहीं। जच्चा-बच्चा वार्ड में महिलाओं ने आरोप लगाया कि मरीजों की हालत की सही जानकारी तक नहीं दी जाती। वहीं न्यूरो विभाग की एक पर्ची में मरीज को अस्पताल से एक भी दवा न मिलने का मामला सामने आया। कई मरीजों ने यह भी बताया कि डॉक्टर खुद कहते हैं कि “अस्पताल की जांच भरोसेमंद नहीं है”, इसलिए बाहर जांच कराओ। इन खुलासों के बाद महिला आयोग उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को मौके पर ही सख्त निर्देश दिए कि सभी जांचें अस्पताल के भीतर कराई जाएं और दवाएं अस्पताल से ही उपलब्ध हों। उन्होंने 15 दिन के भीतर पूरी व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं बदले तो लखनऊ से बड़ी कार्रवाई तय मानी जाए।
निरीक्षण खत्म होते-होते अस्पताल प्रशासन में भगदड़ जैसी स्थिति दिखी। कर्मचारी फाइलें संभालते नजर आए, अधिकारी सफाई देने में जुट गए, लेकिन बड़ा सवाल अब भी हवा में तैर रहा है।
🔴 रिपोर्ट - संजय चाणक्य