केशवकुंज में गूंजा भारतीय ज्ञान परंपरा का स्वर, धातुशास्त्र पर हुआ गंभीर विमर्श

🔴भारत की प्राचीन धातु विज्ञान परंपरा विश्व में अद्वितीय — डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय

🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो

दिल्ली। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना एवं माधव सेवा न्यास के संयुक्त तत्वावधान में 9 मई 2026 को केशवकुंज, झंडेवालान स्थित सभागार में “प्राचीन भारतीय धातु शास्त्र का पुनर्मूल्यांकन” विषय पर मासिक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर से जुड़े शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्वानों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के मुख्य मार्गदर्शक डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय ने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा का साक्ष्य आधारित एवं वैज्ञानिक अध्ययन समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन धातुशास्त्रीय परंपरा विश्व में अद्वितीय रही है, जिसे नए परिवेश में शोध एवं पुनर्मूल्यांकन के माध्यम से सामने लाने की जरूरत है। उन्होंने भारतीय संस्कृति, गुरु परंपरा एवं पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण पर भी बल देते हुए “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य को आत्मसात करने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता आचार्य रूबी मिश्रा ने अपने व्याख्यान में प्राचीन भारतीय धातुशास्त्र की वैज्ञानिकता, तकनीकी दक्षता एवं ऐतिहासिक साक्ष्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय धातु विज्ञान केवल ऐतिहासिक गौरव नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान के लिए भी प्रेरणास्रोत है। विशिष्ट अतिथि डॉ. योगेश्वर मिश्र ने वैदिक एवं पौराणिक साहित्य की वैज्ञानिक अवधारणाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शून्य की खोज जैसी उपलब्धियां भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य देन हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्यावरण प्रमुख गोपाल आर्य ने भारतीय जीवनशैली को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए प्रकृति अनुकूल जीवन पद्धति अपनाने की अपील की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रीना कपूर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अजय सिंह ने किया। इस अवसर पर आचार्य अनुराग मिश्रा, डॉ. सौरव मिश्रा, डॉ. रमेश मिश्रा, डॉ. शिशिर कुमार मिश्रा समेत विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के अनेक विद्वान उपस्थित रहे।



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