तहसील में ‘हिसाब-किताब’ का खेल! वायरल ऑडियो में शिक्षक और एसडीएम की कथित सेटिंग उजागर

🔵तहसील से क्लासरूम तक भ्रष्टाचार की गूंज! शिक्षक और एसडीएम कथित ऑडियो बना चर्चा का विषय

🔴जब शिक्षक ही बन जाए बिचौलिया, वायरल ऑडियो में एसडीएम से कथित डीलिंग पर उठे सवाल

🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। जिले के कसया तहसील में धारा 80 के तहत कार्रवाई कराने के लिए लेन-देन की डिलिंग का वायरल हुए ऑडियो प्रकरण ने अब नया मोड़ ले लिया है। पहले जहां वायरल ऑडियो में एसडीएम कसया और एक कथित दलाल के बीच पैसों की बातचीत की चर्चा थी, वहीं अब उस व्यक्ति की पहचान को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। सूत्रों की मानें तो एसडीएम से खुलकर “लेन-देन” की बात करने वाला कोई आम ग्रामीण या बिचौलिया नहीं, बल्कि एक इण्टर कालेज का शिक्षक है, जिसका नाम विजय पाण्डेय बताया जा रहा है।

ऐसी चर्चा है कि वायरल ऑडियो में इंटर कालेज के अध्यापक विजय पाण्डेय कथित तौर पर 16 कट्ठा जमीन पर धारा 80 की कार्रवाई को लेकर एसडीएम से बातचीत कर रहे है। बातचीत का तरीका और आत्मविश्वास यह संकेत दे रहा है कि वह एसडीएम कसया के बेहद करीबी नेटवर्क का हिस्सा है और पहले भी कई मामलों में कथित तौर पर “डीलिंग” कर चुका है।

🔴फ्लैशबैक : वायरल ऑडियो में क्या-क्या हुई बातचीत

वायरल कथित ऑडियो में एसडीएम सबसे पहले पूछते हुए सुनाई दे रहे है “धारा 80 वाला 16 कट्ठा है या 18 कट्ठा? ”इस पर सामने वाला व्यक्ति यानि कि विजय पाण्डेय जवाब देते है 16 कट्ठा वाला है। जिसमें एक कट्ठा में मकान बन रहा है  इसके बाद कथित तौर पर एसडीएम पूछते हैं “नीचे से रिपोर्ट लगवा लिए या नहीं?”जवाब आता है “अभी कुछ नहीं हुआ है…आप जब कहेंगे तब नीचे से लगेगा न” यानी बातचीत से यह संकेत मिलता है कि रिपोर्ट लगवाने की प्रक्रिया भी कथित तौर पर “इशारे” पर तय होती है।फिर जमीन की स्थिति पर चर्चा होती है। एसडीएम पूछते हैं 

16 कट्ठे वाला बिल्कुल खाली है?”सामने से कथित अध्यापक विजय कहते है कि “हां खाली है.. एक कट्ठा वाले में घर बन रहा है ”इसके बाद जमीन की लोकेशन को लेकर सवाल होता है “कसाडा के बाहर का है या अंदर का?” फिर जवाब आता है यहीं का है… हम लोगों के गांव का है… ग्रामीण है ”लेकिन बातचीत का सबसे विस्फोटक हिस्सा तब सामने आता है जब कथित तौर पर एसडीएम पूछते हैं 16 कट्ठा वाले में क्या है?इस पर विजय पाण्डेय कथित तौर पर जवाब देते है कि इसमें ठीक-ठाक हो जाएगा, जो होगा हिसाब से होगा। इसके बाद  एसडीएम कहते हैं “तो ठीक है कर दूंगा… कितना करेगा, कुछ तो बात दो ”जिस पर विजय का जवाब आता है कि शाम को सात बजे बता दूंगा। 


🔴सवालों के घेरे में तहसील और शिक्षा विभाग

अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक सरकारी शिक्षक की तहसील प्रशासन में इतनी गहरी पैठ कैसे है? क्या वह सिर्फ “सिफारिश” कर रहा था या फिर राजस्व मामलों में कथित तौर पर बिचौलिये की भूमिका निभा रहा था? वायरल ऑडियो में जिस सहजता से रिपोर्ट लगवाने, हिसाब और कितना करेगा जैसी बातें हो रही हैं, उससे पूरे सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का दावा है कि विजय पाण्डेय का नाम पहले भी कई विवादित मामलों में चर्चा में रहा है और तहसील के कुछ अधिकारियों से उसकी नजदीकियां जगजाहिर रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

🔴प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

वायरल ऑडियो सामने आने के बाद आम लोगों में खूब चर्चा है। सवाल जोरो पर हैं कि क्या अब तहसीलों में कानून से ज्यादा सेटिंग चल रही है? क्या धारा 80 जैसी कानूनी कार्रवाई भी धनबल और रसूख के आधार पर तय हो रही है। हालांकि, इस वायरल ऑडियो की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि मीडिया द्वारा नहीं की गई है। बावजूद इसके, ऑडियो ने प्रशासनिक पारदर्शिता और सरकारी तंत्र की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना है शासन और जिला प्रशासन इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराती है या फिर मामला को दबाने की कोशिश की जाएगी।

🔴जब गुरु ही ‘घूस का गणित’ पढ़ाने लगे तो समाज का क्या होगा?

जानकारों का कहना है कि भ्रष्टाचार केवल घूस लेने से नहीं, बल्कि घूस देने और उसके लिए प्रेरित करने से भी जन्म लेता है। कानून की नजर में घूस लेना और घूस देना दोनों अपराध की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में यदि कोई सरकारी शिक्षक किसी अधिकारी को कथित तौर पर हिसाब और सेटिंग का भरोसा देकर कार्रवाई कराने की कोशिश कर रहा है, तो यह केवल व्यक्तिगत आचरण का मामला नहीं बल्कि पूरे तंत्र की नैतिक गिरावट का संकेत है। इस संबध मे आरोपी शिक्षक विजय पाण्डेय से उनका पक्ष लेने के लिए उनके मोबाइल नम्बर पर लगातार सम्पर्क किया गया लेकिन विजय पाण्डेय ने हर बार फोन कट कर दिया। यहां तक कि उनके वाटसप पर मैसेज कर उनका पक्ष लेने का प्रयास किया गया किन्तु विजय पाण्डेय ने कोई जबाब नही दिया। अब यक्ष प्रश्न यह है कि जो व्यक्ति विद्यालय में बच्चों को नैतिकता की पाठ पठाता है, अगर वही पर्दे के पीछे सरकारी दफ्तरों में कथित तौर पर डीलिंग करता नजर आए, तो नई पीढ़ी को आखिर कौन-सा आदर्श मिलेगा? हालांकि, इस वायरल ऑडियो की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि मीडिया द्वारा नहीं की जा रही है। लेकिन यदि जांच में बातचीत सही पाई जाती है, तो कार्रवाई सिर्फ अधिकारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। क्योंकि यदि कोई शिक्षक कथित तौर पर घूस की पेशकश कर रहा है, तो वह भी उतना ही जिम्मेदार और दोषी है, जितना रिश्वत लेने वाला अधिकारी।

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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