🔵लूना हॉस्पिटल पर सवाल बरकरार, सिस्टम की चुप्पी से टूट रहा पीड़ित परिवार
🔴दर-दर भटक रहा नर्गिस का परिवार, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है लूना हॉस्पिटल?
🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। जिले के कसया में संचालित लूना हॉस्पिटल में पित्त की थैली के ऑपरेशन के दौरान हुई नर्गिस खातून की मौत का मामला दिन-ब-दिन गंभीर होता जा रहा है, किन्तु अफसोस कार्रवाई के नाम पर अब तक सन्नाटा पसरा हुआ है। एक ओर मृतका का परिवार न्याय की उम्मीद में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अधिकारियों के दफ्तरों की चौखट नाप रहा है, तो दूसरी ओर शिकायतों और आरोपों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है।
मृतका के पति मोहम्मद तसनीम कौसर ने जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी तक लिखित शिकायतें देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायतों में ऑपरेशन प्रक्रिया, चिकित्सकीय व्यवस्था, अस्पताल प्रबंधन की भूमिका और आयुष्मान भारत योजना के तहत हुए कथित क्लेम तक की जांच की मांग की गई है। लेकिन परिवार का आरोप है कि अब तक न तो किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हुई और न ही जांच की प्रगति से उन्हें अवगत कराया गया।
🔴शिकायत और दर्जनों सवाल लेकिन जवाब एक भी नहीं
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि जिस समय ऑपरेशन की तैयारी चल रही थी, उस समय सर्जन की मौजूदगी को लेकर सवाल उठे। परिजनों का दावा है कि उन्हें डॉक्टर के आने का इंतजार करने को कहा जा रहा था, जबकि मरीज को ऑपरेशन थियेटर में ले जाया जा चुका था।इसके अलावा परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि ऑपरेशन के नाम पर धनराशि ली गई, जबकि बाद में आयुष्मान भारत योजना के तहत क्लेम की जानकारी सामने आई। यदि ऐसा है तो जांच एजेंसियों को यह स्पष्ट करना होगा कि उपचार की वास्तविक वित्तीय प्रक्रिया क्या थी।
🔴मौत से ज्यादा बेचैन कर रही है कार्रवाई की सुस्ती
नर्गिस की मौत के बाद अस्पताल परिसर में हंगामा हुआ, शिकायतें दी गईं, बयान दर्ज हुए और जांच की मांग उठी। लेकिन समय बीतने के साथ परिवार का दर्द कम होने के बजाय और बढ़ता जा रहा है। कारण यह है कि उन्हें अब तक यह भी नहीं बताया गया कि उनकी शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई, किस स्तर पर जांच चल रही है और कब तक सच्चाई सामने आएगी।परिवार का कहना है कि यदि किसी सरकारी अस्पताल में ऐसी घटना हुई होती तो अब तक कई अधिकारियों की जवाबदेही तय हो चुकी होती। लेकिन निजी अस्पताल का मामला होने के कारण कार्रवाई की रफ्तार सवालों के घेरे में है।
🔴किसका इंतजार कर रहे हैं जिम्मेदार?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के पास शिकायत पहुंच चुकी है, तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? क्या लूना हॉस्पिटल के मेडिकल रिकॉर्ड जब्त किए गए? क्या ऑपरेशन करने वाले चिकित्सकों और स्टाफ से पूछताछ हुई? क्या सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराए गए? क्या प्रथम दृष्टया दोष के आधार पर मजिस्ट्रेट के मौजूदगी में लूना हॉस्पिटल को सील किया गया? क्या आयुष्मान क्लेम की जांच शुरू हुई? ऐसे तमा सवाल हैं जिनका जवाब न केवल पीड़ित परिवार बल्कि पूरा जनपद जानने के लिए व्याकुल है।
🔴इंसाफ के लिए भटक रहा पीड़ित परिवार
कहना ना होगा की हास्पिटल की की घोर लापरवाही के वजह से नर्गिस की मौत ने एक परिवार से उसकी दुनिया छीन ली। अब वही परिवार न्याय की उम्मीद लेकर दर-ब-दर दफ्तर-दफ्तर भटक रहा है। परिवार का कहना है कि हर आवेदन के साथ उम्मीद बंधती है, और हर बीतते दिन के साथ वह उम्मीद टूट जाती है। मामला सिर्फ एक महिला की मौत का नहीं रह गया है। यह उस व्यवस्था पर तमाचा है, जो अक्सर पीड़ित को न्याय दिलाने का दावा करती है।
🔴फ्लैशबैक
कसया के वार्ड संख्या-4 निवासी नर्गिस खातून को 1 जून 2026 को पित्त की थैली में पथरी के ऑपरेशन के लिए लूना हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 2 जून को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतका के पति मोहम्मद तसनीम कौसर ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं। बाद में डीएम, एसपी और सीएमओ को दिए गए प्रार्थना पत्रों में चिकित्सकीय लापरवाही, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, मेडिकल रिकॉर्ड और आयुष्मान भारत योजना के तहत हुए कथित क्लेम की जांच की मांग की गई। बावजूद इसके अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।


