नकल माफियाओं ने भेदा चक्रव्यूह : वाइस रिकॉर्डिंग बंद, कक्षों में गूंजा इमला का खेला - Yugandhar Times

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Tuesday, February 24, 2026

नकल माफियाओं ने भेदा चक्रव्यूह : वाइस रिकॉर्डिंग बंद, कक्षों में गूंजा इमला का खेला

🔴सीटिंग व्यवस्था पर चोट कर  ‘नकल महायज्ञ’ जारी

🔵वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक व स्टेटिक मजिस्ट्रेट ने डीआईओएस को पत्र देकर किया खुलासा

🔴शिकायत करने वाले वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक हटे

🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। जिले में संचालित हो रही बोर्ड परीक्षा सवालों के घेरे में है। आरोप है कि नकल माफियाओं ने शासन-प्रशासन के तमाम दावों और निगरानी के चक्रव्यूह को भेदते हुए “नकल महायज्ञ” की परंपरा को डंके की चोट पर कायम रखा है। चर्चा-ए-सरेआम है कि जिन परीक्षा केन्द्रों पर वाइस रिकॉर्डिंग और कैमरों की व्यवस्था प्रभावी नहीं है,वहां इमला बोलकर प्रश्नपत्र हल कराए जा रहे हैं। सूत्र बताते है कि जिन छात्रो ने पैसा नही दिये है  उनको सबक सिखाने की गरज से सीटिंग प्लान को प्रभावित कर सुनियोजित तरीके से नकल कराया जा रहा है।यह सनसनीखेज खुलासा महर्षि वाल्मीकि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पिपरैचा केन्द्र के वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक व स्टेटिक मजिस्ट्रेट ने जिला विद्यालय निरीक्षक को संयुक्त पत्र देकर किया है। मजे की बात यह है इस खुलासे के बाद भी डीआईओएस द्वारा केन्द्र व नकल माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय शिकायत करने वाले वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक को हटा दिया गया है। जो चर्चा का विषय बना हुआ है। 

गौरतलब है कि 18 फरवरी से जनपद में 194 परीक्षा केंद्रों पर माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षा चल रही है। बताया जाता है कि वर्ष 2026 में कुल 108159 छात्र पंजीकृत हैं, जिसमें हाईस्कूल में बालक 29,268 व 29,014 बालिकाएं समेत कुल 58282 परीक्षार्थी हैं, जबकि इंटरमीडिएट में  25,920 बालक व 25,441 बालिकाओं के अलावा ट्रासजेंडर समेत कुल 51361 छात्र शामिल हैं। 

🔴वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक व स्टेटिक मजिस्ट्रेट ने की शिकायत 

महर्षि वाल्मीकि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पिपरैचा हाटा के वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक विजय यादव व स्टेटिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार द्वारा डीआईओएस को दिये गये संयुक्त शिकायत में उल्लेख है कि केन्द्रों पर बाहरी और आंतरिक परीक्षार्थियों को मिलाकर बैठाने के बजाय विद्यालय द्वारा अपने छात्रों को अलग कमरों में समूहबद्ध कर दिया गया है। इससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सीधे सवाल उठ रहा है। आरोप है कि इसी ‘अलगाव’ का फायदा उठाकर विद्यालय अपने छात्रो को सुनियोजित तरीके से इमला बोलकर लिखवा रहा है। पत्र में कहा गया है कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य “मिश्रित सीटिंग व्यवस्था” का पालन नहीं किया जा रहा है। विद्यालय के अपने छात्रों को अलग कमरों में बैठाया गया, जिससे उन्हें विशेष “सुविधा” मिल सके।

🔴वाइस रिकॉर्डिंग गायब, इमला जारी

शिकायत पत्र के मुताबिक, कई कक्षों में वाइस रिकॉर्डिंग की व्यवस्था नहीं थी। इसी कमी का लाभ उठाते हुए कथित तौर पर छात्रों को बोलकर उत्तर लिखवाए जा रहे है। ऐसे मे यदि यह आरोप सही हैं, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि परीक्षा प्रणाली पर सीधा प्रहार है। 

🔴कार्रवाई उल्टी दिशा में

चौंकाने वाली बात यह है कि नकल माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त ने शिकायत करने वाले बाह्य केन्द्र व्यवस्थापक को ही उस केन्द्र से हटा दिया। इस फैसले ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। शिक्षा जगत में चर्चा है कि क्या यह कदम नकल माफियाओं के दबाव में उठाया गया? क्या सच उजागर करने वालों को हटाकर नकल “महायज्ञ” की परंपरा को बचाया जा रहा है? हालाकि डीआईओएस का कहना है कि शिकायत पर जांच करायी गयी केन्द्र व्यवस्थापक को नोटिस दिया गया है और वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक की तवीयत ठीक नही होने के कारण उनको इलाज कराने के लिए लखनऊ जाने हेतु उनके स्थान पर दुसरे वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक की तैनाती की गयी है। अब सवाल यह है कि जिन केन्द्रों पर कैमरा और वाइस रिकॉर्डिंग नहीं है, उनकी जिम्मेदारी किसकी? क्या सीटिंग व्यवस्था में गड़बड़ी करने वालो के खिलाफ कार्रवाई होगी? 

🔴वाइस रिकॉर्डिंग बंद, मिश्रित सीटिंग की उड़ रहीं धज्जियां

सूत्रो का कहना है कि तमाम परीक्षा केन्द्रों पर कैमरा और वाइस रिकॉर्डिंग व्यवस्था को जानबूझकर प्रभावित किया जा रहा है, ताकि मिश्रित सीटिंग व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा सकें और सुनियोजित तरीके से इमला बोलकर नकल कराई जा सके।चर्चाओं के मुताबिक, जिन कक्षों में सीसीटीवी कैमरे या तो बंद हैं या उनकी निगरानी प्रभावी नहीं है, वहीं वाइस रिकॉर्डिंग की व्यवस्था भी या तो अनुपस्थित है या औपचारिकता बनकर रह गई है। ऐसे में विद्यालय के अपने छात्रों को अलग कमरों में बैठाकर उन्हें बोल-बोलकर उत्तर लिखवाने का खेल जारी है जबकि बोर्ड परीक्षा के नियमों के मुताबिक परीक्षार्थियों को “मिश्रित सीटिंग” में बैठाया जाना अनिवार्य है, ताकि किसी एक विद्यालय के छात्रों को समूह में बैठाकर अनुचित लाभ न दिया जा सके। लेकिन आरोप है कि इस व्यवस्था को दरकिनार कर ‘सेटिंग’ के तहत सीटिंग प्लान तैयार किए जा रहे हैं।

🔴अभिभावकों और मेधावी छात्रों में रोष 

अभिभावकों और मेधावी छात्रों कहना है कि यदि बोर्ड परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में भी पारदर्शिता नहीं रहेगी, तो मेहनत और ईमानदारी का कोई मूल्य नहीं बचेगा। ऐसे मे नकल विहीन, निष्पक्ष व पारदर्शी परीक्षा कराने के दावों मतलब क्या है? कहना ना होगा कि   कुशीनगर में चल रहे इस कथित “नकल महायज्ञ” ने शिक्षा व्यवस्था की साख पर गहरा दाग लगा दिया है।

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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