डीआईओएस दफ्तर से ‘आउटसोर्स राज’ खत्म करने का फरमान, शिक्षा निदेशक सख्त - Yugandhar Times

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Monday, March 23, 2026

डीआईओएस दफ्तर से ‘आउटसोर्स राज’ खत्म करने का फरमान, शिक्षा निदेशक सख्त

 

🔴 'आउटसोर्सिंग कर्मचारी ' पर चला शासन का बुलडोज़र

 🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। जिला विद्यालय निरीक्षक  कार्यालय में लंबे समय से सुलग रहा ‘आउटसोर्सिंग तैनाती’ का विवाद अब निर्णायक अंजाम की ओर बढ़ता दिख रहा है। सबब यह है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारी सर्वेश्वर तिवारी उर्फ सोनू तिवारी का मामला अब जिला और मंडल स्तर की सीमाएं लांघकर शासन तक पहुंच गया है। नतीजतन शिक्षा निदेशक ने सख्त आदेश जारी कर सर्वेश्वर तिवारी उर्फ सोनू तिवारी को तत्काल प्रभाव से डीआईओएस कार्यालय  से हटाने का फरमान जारी किया है। निदेशक के इस आदेश ने न सिर्फ डीआईओएस कार्यालय में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि उन तमाम सवालों को भी हवा दे दी है, जो अब तक दबे हुए थे आखिर किसके संरक्षण में एक आउटसोर्स कर्मचारी नियमों को ठेंगा दिखाकर जिला स्तरीय कार्यालय में जमे रहा?


बतादे कि सर्वेश्वर तिवारी उर्फ सोनू तिवारी पडरौना के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में आउटसोर्सिंग कर्मचारी (ऑफिस ब्वाय) हैं, लेकिन हकीकत में डीआईओएस कार्यालय में ‘बाबूगिरी’ करते हुए फाइलों, गोपनीय दस्तावेजों, न्यायालय और संवेदनशील कार्यों तक पहुंच रखने के आरोपों से घिरे रहे। सवाल यह उठता रहा कि आखिर किसके संरक्षण में यह सब चल रहा है?शिक्षक संघ ने इस पूरे मामले को खुलकर “नियमों की हत्या” बताया और मोर्चा खोल दिया। चेतावनी दी है कि अगर अवैध तैनाती खत्म नहीं हुई तो डीआईओएस दफ्तर का घेराव और मूल्यांकन बहिष्कार कर दिया जाएगा। हालात बिगड़ते देख पहले मुख्य विकास अधिकारी वंदिता श्रीवास्तव ने 16 मार्च को  तल्ख पत्र जारी कर  रिपोर्ट मांगी थी। बताया जा रहा है कि सीडीओ के आदेश को डीआईओएस कार्यालय द्वारा नजर अंदाज किया जा रहा था तब तक शिक्षा निदेशक ने सीधे कार्रवाई का आदेश देकर पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

निदेशक के आदेश के बाद अब यह साफ हो गया है कि मामला सिर्फ एक कर्मचारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे की पूरी ‘चेन’ जांच के घेरे में आ सकती है। सूत्र बताते है कि शिक्षा निदेशक के आदेश का पालन नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। जानकार बताते है कि  शिक्षा निदेशक के आदेश ने यह साफ कर दिया है कि शासन अब इस मामले में ‘नो टॉलरेंस’ की नीति पर है।नियमों के विरुद्ध चल रही व्यवस्थाओं को अब बख्शा नहीं जाएगा।

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