" समाधान दिवस " के मंच पर संवेदनहीनता! फरियादी सामने, अफसर मोबाइल में गुम - Yugandhar Times

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Sunday, February 22, 2026

" समाधान दिवस " के मंच पर संवेदनहीनता! फरियादी सामने, अफसर मोबाइल में गुम

 

🔵जनसुनवाई के नाम पर डिजिटल व्यस्तता का खेल

🔴कैमरे में कैद लापरवाही: फरियादी सामने खड़ा, अफसर मोबाइल मे मशगूल!

🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

 कुशीनगर। जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए हर शनिवार को आयोजित होने वाला ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ इस बार खुद कठघरे में खड़ा नजर आया। पडरौना तहसील में आयोजित कार्यक्रम की एक तस्वीर ने पूरे तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कैमरे में कैद तस्वीर बयां कर रही है कि सामने फरियादी हाथ में प्रार्थना पत्र लिए खड़ा है और जिम्मेदार अधिकारी मोबाइल स्क्रीन में व्यस्त हैं।यह कोई सामान्य दृश्य नहीं, बल्कि उस दूरी का प्रतीक है जो व्यवस्था और जनता के बीच बढ़ती जा रही है। उपजिलाधिकारी की अगुवाई और पुलिस क्षेत्राधिकारी की मौजूदगी में चल रहे इस समाधान दिवस में उम्मीद थी कि शिकायतों पर गंभीरता से सुनवाई होगी, लेकिन मौके की तस्वीर ने कुछ और ही कहानी बयान कर दी।

🔴 फरियादी की आवाज या नोटिफिकेशन की घंटी?

ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग अपनी जमीन, कब्जे, पुलिस कार्रवाई, पेंशन और राजस्व विवाद जैसी गंभीर समस्याओं को लेकर घंटों इंतजार करते रहे। लेकिन जब उनकी बारी आई, तो संवाद के बजाय उदासीनता का सामना करना पड़ा। कई फरियादियों ने बताया कि उनकी बात पूरी सुनी ही नहीं गई, कुछ को औपचारिक आश्वासन देकर टाल दिया गया।तस्वीर में साफ दिख रहा है कि फरियादी की उपस्थिति के बावजूद अधिकारी मोबाइल स्क्रीन पर नजर गड़ाए हुए हैं। सवाल उठता है क्या डिजिटल व्यस्तता अब जनसुनवाई पर भारी पड़ने लगी है?

🔴शासन की मंशा बनाम जमीनी हकीकत

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बार-बार प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और संवेदनशीलता पर जोर दिया है। समाधान दिवस को जनविश्वास का सशक्त माध्यम बनाने का संकल्प भी दोहराया गया है। लेकिन पडरौना की यह तस्वीर उन संकल्पों की जमीनी हकीकत पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।

🔴तस्वीर से उठे तीखे सवाल

क्या समाधान दिवस औपचारिकता बनकर रह गया है?क्या फरियादियों की पीड़ा से ज्यादा जरूरी हो गए हैं मोबाइल संदेश?क्या ऐसे रवैये पर जवाबदेही तय होगी?जनता का भरोसा कागजी घोषणाओं से नहीं, बल्कि संवेदनशील व्यवहार और ठोस कार्रवाई से बनता है। यदि जिम्मेदार मंच पर ही गंभीरता न दिखे, तो फिर ‘सम्पूर्ण समाधान’ का दावा कैसे सार्थक होगा?फिलहाल, कैमरे में कैद यह तस्वीर प्रशासन को आईना दिखा रही हैजनता उम्मीद लेकर खड़ी है, और व्यवस्था स्क्रीन में उलझी हुई।

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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