🔴 पडरौना के पूर्व चेयरमैन नरेन्द्र वर्मा का नाम मतदाता सूची से गायब, नोटिस मिलने से मचा हड़कंप
🔵युगान्धर टाइम्स न्यूज नेटवर्क
कुशीनगर। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान अब केवल आम मतदाताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी आँच सीधे राजनीतिक नेतृत्व तक पहुँच गई है। पडरौना नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन नरेन्द्र वर्मा का नाम मतदाता सूची से गायब होने के बाद इलाके में हलचल मच गई है। हैरानी की बात यह है कि पूर्व चेयरमैन को बाकायदा नोटिस जारी कर जवाब माँगा गया है, जिससे एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बतादे कि सूबे के उत्तर प्रदेश में लगभग 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर सूची से हटाए गए हैं।इसका मुख्य कारण यह बताया गया है कि वे मर चुके हैं या फिर दूसरे स्थान पर चले गए हैं, उनका पता नहीं मिला या मैपिंग (वर्ष 2003 की सूची से मिलान) नहीं हुई। ऐसे मतदाताओं को दावा-आपत्ति प्रक्रिया के तहत दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए नोटिस के माध्यम से मौका दिया जा रहा है।
🔴SIR ने चौंकाया, पूर्व चेयरमैन भी ‘अपात्र’?
एसआईआर के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में जब पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष नरेन्द्र वर्मा ने अपना नाम तलाशा, तो वह सूची से नदारद मिले।इसके बाद निर्वाचन तंत्र द्वारा उन्हें नोटिस थमा दिया गया, जिसमें तय समयसीमा के भीतर दस्तावेज़ प्रस्तुत कर दावा करने के लिए कहा गया है। मजे की बात यह कि जिस व्यक्ति ने वर्षों तक नगर का नेतृत्व किया, अपने मत का प्रयोग किया और लोकतंत्र की रक्षा का दायित्व निभाया, उसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से कट जाना प्रशासनिक लापरवाही है या फिर व्यवस्था की खामी का नजीर।
🔴 पूर्व चेयरमैन नरेन्द्र वर्मा बोले
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष नरेन्द्र वर्मा ने मतदाता सूची से नाम कटने के बाद नाराजगी जताते देते हुए कहा कि“मैं वर्षों से पडरौना का स्थायी निवासी हूँ। “मैं पिछले पचास वर्षों से लगातार विधानसभा, लोकसभा और नगर पालिका, तीनों स्तरों के चुनावों में मतदान करते आ रहा हूँ। इसके अलावा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नगर पालिका अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद पर रहकर जनता की सेवा की है। इसके बावजूद एसआईआर के नाम पर मेरा नाम मतदाता सूची से काट दिया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। मेरा नाम कभी किसी चुनाव में मतदाता सूची से नहीं कटा, फिर अचानक एसआईआर के नाम पर मुझे अपात्र साबित करने की कोशिश की जा रही है।”उन्होंने कहा कि“यह मामला सिर्फ मेरा नहीं है, बल्कि हर उस नागरिक का है, जिसका मताधिकार प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है।अगर एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को नोटिस देकर अपनी नागरिकता और मतदाता होने का प्रमाण देना पड़ रहा है, तो आम आदमी की स्थिति का अंदाज़ा सहज लगाया जा सकता है।”नरेन्द्र वर्मा ने तल्ख लहजे मे कहा कि “मैं नियमानुसार अपने सभी दस्तावेज़ प्रस्तुत करूँगा, लेकिन साथ ही निर्वाचन प्रशासन से यह भी पूछना चाहता हूँ कि बिना पूर्व सूचना और ठोस सत्यापन के नाम काटने की जिम्मेदारी किसकी है?” उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि“अगर इस तरह एसआईआर के नाम पर मतदाताओं के अधिकारों से खिलवाड़ जारी रहा, तो जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा लोकतंत्र में वोट देने का अधिकार किसी की दया पर नहीं, संविधान की गारंटी है।”
🔴 नोटिस और दावा-आपत्ति
जानकारों की माने तो जिनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, उन्हें नोटिस भेजा गया है।नोटिस प्राप्त मतदाता निर्धारित समय सीमा में अपने दस्तावेज़ प्रस्तुत कर दावा दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए मतदाता को पहचान और निवास दस्तावेज़ों के साथ दावा फॉर्म 6,7 और 8 भरना होगा। तय समय सीमा के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी, जिसमें दावे स्वीकार होने के बाद नाम जोड़े जा सकते हैं।
🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य



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