🔵रामकोला ब्लाक प्रशासन कटघरे में! सरकारी कागज़ों पर फर्जी हस्ताक्षर, जालसाजी का बड़ा मामला उजागर
🔴 जनता दर्शन से खुला राज, सूचना के नाम पर फ्राड, सचिव और लिपिक सवालों के घेरे में
🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। जनपद में सरकारी कार्यालयों की फाइलों में चल रहे कागज़ी खेल का एक सनसनीखेज और चौंकाने वाला मामला सामनेआया है, जिसने प्रशासनिक ईमानदारी को कटघरे खडा कर दिया है। मामला जिले के रामकोला विकास खण्ड क्षेत्र के ग्राम पंचायत लाला छपरा से जुडा है जहां सेक्रेटरी सुनीता देवी पर फर्जी हस्ताक्षर कर सूचना भेजने, झूठी आख्या लगाने और सुनियोजित जालसाजी करने का गंभीर आरोप जनता दर्शन में दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र मे लगाये गये है। शिकायतकर्ता राकेश कुमार श्रीवास्तव ने जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर को दिए गए प्रार्थना पत्र में स्पष्ट किया है कि उनके नाम से दर्शायी गई सूचना की प्राप्ति कभी हुई ही नहीं, फिर भी सरकारी अभिलेखों में उनके नाम से प्राप्ति दिखाकर मामला निस्तारित करने का षडयंत्र रचा गया है।
🔴आख्या बनाम हकीकत : तारीखों ने खोल दी साजिश
खण्ड विकास अधिकारी रामकोला की आख्या एवं ग्राम पंचायत सचिव द्वारा जिला विकास अधिकारी को दिए गए स्पष्टीकरण में दावा किया गया है कि शिकायतकर्ता राकेश कुमार श्रीवास्तव को 17 फरवरी 2025 को पंजीकृत डाक से सूचना भेज दी गई थी और इसकी प्रति राज्य सूचना आयोग, लखनऊ में भी प्रस्तुत की गई। लेकिन आख्या के साथ संलग्न दस्तावेज़ों में जो तथ्य सामने आए, वह पूरे मामले को संदेह के कटघरे में खड़ा कर दिया। पेज संख्या-तीन पर शिकायतकर्ता के नाम से संबोधित पत्र पर 07 फरवरी 2025 को प्राप्ति दर्शाते हुए हस्ताक्षर अंकित हैं। जबकि स्वयं सचिव ग्राम पंचायत यह स्वीकार कर चुकी हैं कि यह हस्ताक्षर शिकायतकर्ता के नहीं हैं बल्कि जन सूचना लिपिक का है। अब सवाल यह उठता है कि जब सूचना लिपिक को 18 फरवरी 2025 को दस्तावेज़ प्राप्त कराया गया है, तो उससे 11 दिन पूर्व शिकायतकर्ता के नाम से जारी पत्र पर हस्ताक्षर कैसे हो गए?शिकायतकर्ता का दावा है कि यह पूरा मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही बल्कि सोची-समझी दस्तावेज़ी जालसाजी का स्पष्ट उदाहरण है। उनका कहना है कि सचिव ग्राम पंचायत द्वारा स्वयं यह स्वीकार कर लिया गया है कि हस्ताक्षर शिकायतकर्ता के नहीं हैं, जिससे उनके लगाए गए आरोप स्वतः ही सत्य सिद्ध होते हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि सचिव द्वारा यह मान लेना कि हस्ताक्षर शिकायतकर्ता का नहीं हैं, अपने-आप में अपराध की स्वीकारोक्ति है। यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें फ्राड, जालसाजी और सरकारी अभिलेखों में कूटरचना जैसी गंभीर अपराध है
🔴 डीएम से दो टूक मांग
शिकायतकर्ता द्वारा प्रार्थना पत्र में जिलाधिकारी से मांग की गई है कि इस अक्षम्य अपराध के लिए ग्राम पंचायत सचिव सुनीता देवी के विरुद्ध तत्काल विभागीय कार्रवाई करते हुए पूरे प्रकरण में फ्राड व जालसाजी का मुकदमा दर्ज कराया जाए। शिकायतकर्ता ने जन सूचना लिपिक को कारण बताओ नोटिस जारी कर लिखित स्पष्टीकरण लिये जाने का भी अनुरोध किया।
🔴 सिस्टम की साख दांव पर
फर्जी हस्ताक्षर, झूठी आख्या व सुनियोजित जालसाजी का यह मामला अब एक व्यक्ति की शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही की अग्नि-परीक्षा बन चुका है। ऐसे मे इस प्रकरण में कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो इस बात से इंकार नही किया जा सकता है कि सरकारी फाइलों में फर्जी हस्ताक्षर कर सच को दबाया जाता है। अब देखना दिलचस्प है कि जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर का कानूनी डंडा दोषियों पर चलेगा, या यह फर्जी हस्ताक्षर कांड भी अन्य प्रकरणों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा?
🔵रिपोर्ट - संजय चाणक्य




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