“कानून के नाम पर बदला ? ”अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, जांच एजेंसी की साख कटघरे में - Yugandhar Times

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Saturday, January 3, 2026

“कानून के नाम पर बदला ? ”अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, जांच एजेंसी की साख कटघरे में

🔴सबूत कहां हैं? ” पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने पूछा सबूत कहा है?विवेचक को लगी लताड़,अदालत ने कहा अब जांच हम देखेंगे

🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

देवरिया। कानून के नाम पर की गई कार्रवाई जब खुद कानून के कठघरे में खड़ी हो जाए, तो उसे न्याय नहीं ज्यादती कहा जाता है। शनिवार को देवरिया की सीजेएम अदालत में ठीक यही दृश्य देखने को मिला, जब पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी पर सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार किया।धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में जेल भेजे गए अमिताभ ठाकुर की पेशी के दौरान जांच अधिकारी अदालत के सामने बिना सबूत, बिना तर्क और बिना जवाब के खड़े नजर आए। करीब 30 मिनट चली सुनवाई में अदालत के सवालों ने पूरी विवेचना की पोल खोल दी।

लखनऊ से आए विवेचक से जब अदालत ने पूछा कि आखिर गिरफ्तारी की जरूरत  क्या थी, तो विवेचक कोई ठोस आधार नहीं बता सके। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि “अब तक की विवेचना में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह साबित हो कि गिरफ्तारी अनिवार्य थी या आरोप प्रथम दृष्टया टिकाऊ हैं।”इसके साथ ही अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि अब इस केस की जांच कोर्ट की निगरानी में चलेगी, जो अपने आप में जांच एजेंसी पर एक बड़ा अविश्वास है।

🔴जांच एजेंसी कटघरे में, विवेचक पर सवालों की बौछार

सुनवाई के दौरान अदालत ने विवेचक से एक के बाद एक सवाल दागे। गिरफ्तारी का समय?साक्ष्य कहां हैं?किस आधार पर आरोपी बनाया गया? 25 साल तक मामला ठंडे बस्ते में क्यों रहा? लेकिन किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस पर कोर्ट ने विवेचना की निष्पक्षता और मंशा पर सवाल उठाते हुए जांच एजेंसी की भूमिका को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया।

🔴अमिताभ ठाकुर का  आरोप: “यह कानून नहीं, सियासी बदला है”

पेशी के बाद अमिताभ ठाकुर ने कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह चुनिंदा और प्रतिशोधात्मक है।उन्होंने दो टूक कहा“मैंने जैसे ही पूर्व सांसद धनंजय सिंह और कुछ ताकतवर नेताओं से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक किया, मेरे खिलाफ साजिश रच दी गई। पुराने मुकदमों को जिंदा कर मुझे जेल भेज दिया गया।”उनका कहना था कि असली आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं और उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने सत्ता से सवाल पूछे।

🔴‘रात मे उठाया गया तो एनकाउंटर का था डर'

पूर्व आईपीएस ने खुलासा किया कि मुकदमा दर्ज होने के अगले ही दिन रात करीब दो बजे पुलिस उन्हें उठाकर ले गई।उन्होंने कहा “जिस तरह रात के सन्नाटे में मुझे गिरफ्तार किया गया, उससे लगा कि कहीं मेरा एनकाउंटर न कर दिया जाए।”उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोडीन कफ सिरप केस में जानबूझकर फंसाया गया, जबकि इस पूरे नेटवर्क में शिवम जायसवाल सिर्फ एक मोहरा है और असली सरगना अब भी सुरक्षित हैं।

🔴  अचानक गिरफ्तारी, न्याय या नाटक?

अमिताभ ठाकुर के अधिवक्ता अभिषेक शर्मा ने अदालत में तीखी दलील देते हुए कहा कि मामला लगभग ढाई दशक पुराना है। उन्होंने सवाल उठाया“जब 25 साल में कोई ठोस सबूत नहीं मिला, तो अब अचानक गिरफ्तारी क्यों? क्या यह कानून है या दबाव में लिया गया फैसला?”वकील ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करार दिया।

🔴 कोर्ट ने कहा नही चलेगी मनमानी 

अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 6 जनवरी तय करते हुए साफ कर दिया कि इस मामले में अब हर कदम कोर्ट की निगरानी में होगा।अमिताभ ठाकुर ने बताया कि न्यायालय के भरोसे के बाद उन्होंने अपना आमरण अनशन 15 जनवरी तक स्थगित कर दिया है। फिलहाल जेल में उनकी मेडिकल निगरानी जारी है।

🔴 तो फिर आम आदमी का क्या होगा? 

जब एक पूर्व आईपीएस अधिकारी को बिना ठोस सबूत जेल भेजा जा सकता है,तो आम आदमी की सुरक्षा का क्या?

🔴क्या है मामला  जिसमें अरेस्ट हुए अमिताभ ठाकुर 

लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विराम खंड निवासी अमिताभ ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने साल 1999 में देवरिया में एसपी रहते हुए अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम औद्योगिक क्षेत्र में एक प्लाट खरीदा था। प्लाट आवंटन के दौरान पत्नी नूतन ठाकुर का नाम 'नूतन देवी' और पति का नाम 'अभिजात' अंकित कराया गया था, जबकि उनका वास्तविक नाम अमिताभठाकुर है। इस प्लाट का एलाटमेंट नूतन इंडस्ट्रीज के नाम पर हुआ था। लेकिन, 3 साल तक एक ईंट नहीं रखी गई।सितंबर, 2002 में नूतन ठाकुर ने इस जमीन की लीज डीड शराब और कंस्ट्रक्शन कारोबारी संजय प्रताप सिंह को ट्रांसफर कर दी। 6 हजार स्क्वायर फीट का यह प्लॉट देवरिया शहर से लगे औद्योगिक क्षेत्र में है। यह B-2 श्रेणी का है। यहां कोई उद्योग नहीं लगा है। अभी यहां पर श्रीनेत शांडिल्य कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड का ऑफिस है। यह संजय प्रताप सिंह का है। संजय देवरिया के शराब और कंस्ट्रक्शन के बड़े कारोबारियों में शामिल हैं।देवरिया के औद्योगिक क्षेत्र में 26 साल पहले यही प्लॉट पूर्व आईपीएस अमिताभठाकुर की पत्नी को अलॉट हुआ था। सितंबर 2025 में लखनऊ के तालकटोरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।मामले की गंभीरता को देखते हए बाद में जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। जांच के दौरान देवरिया सदर कोतवाली में भी इस मामले में केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने 10 दिसंबर को शाहजहांपुर में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय में पेश किया था। यहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य 



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