🔵कनोडिया इंटर कॉलेज में श्याम नरायण, विरेंद्र पाण्डेय व देवेन्द्र पाण्डेय द्वारा फर्जी हाजिरी बनाकर सरकारी खजाना लूटने का मामला
🔴फर्जी हाजिरी, फर्जी वेतन, शिक्षा विभाग बेखबर, हाजिरी कागजों में, तनख्वाह बैंक में
🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाला जनपद के कप्तानगंज स्थित श्री गंगा बक्श कनोडिया इंटरमीडिएट कॉलेज के शिक्षक श्याम नरायण पाण्डेय, विरेन्द्र पाण्डेय व बर्खास्तगी के बाद तथ्य गोपन कर नौकरी कर रहे सहायक अध्यापक देवेन्द्र पाण्डेय की कारगुजारी के कारण विद्यालय भ्रष्टाचार की मंडी में तब्दील हो गया है। यहा इन शिक्षको द्वारा भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े और सरकारी धन की लूट की होड मची है। सहायक अध्यापक श्याम नारायण पाण्डेय, विरेन्द्र पाण्डेय और देवेन्द्र पाण्डेय द्वारा विनियमितकरण से पूर्व नियमों को रौंदते हुए फर्जी तरीके से चयन वेतनमान का लाभ लेकर सरकारी खजाने से लाखों रुपये हड़पने का सनसनीखेज खुलासा के बावजूद विभाग-ए-शहंशाह धृतराष्ट्र बने बैठे है। यही वजह है कि डीआईओएस कटघरे मे आ गये है।
जानकारों का कहना है कि कूटरचित व फर्जी दस्तावेज के सहारे तथ्य गोपन कर विनियमितकरण से पूर्व चयन वेतनमान का लाभ लेकर लाखो रुपये सरकारी खजाना लूटने का कृत्य जघन्य भ्रष्टाचार व अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मे डीआईओएस को तत्काल इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए आरोपी शिक्षको श्याम नरायण, विरेंद्र पाण्डेय और देवेन्द्र पाण्डेय से स्पष्टीकरण लेकर वेतन वाधित करके शासन से मार्गदर्शन लेते हुए कार्रवाई करते। किन्तु डीआईओएस द्वारा अब तक न तो इन शिक्षको के विनियमितकरण से पूर्व प्राप्त हो हुए चयन वेतनमान का लाभ से संबंधित आरोप की जांच करायी गयी और न ही दो वर्ष बिना कार्य किये सरकारी खजाने से एरियर के रूप मे लूटे गये लाखो रुपये की जांच कर रिकबरी करायी गयी और न ही विद्यालय का मूल उपस्थिति पंजिका देखा गया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में यहा खुली लूट की होड मची हुई है? क्या बिना विभागीय मिलीभगत के दो वर्षों का फर्जी उपस्थिति और अवैध वेतन भुगतान संभव है?क्या विभागीय लिपिक की साठगाठ और अधिकारियों के सहमति के बिना विनियमितकरण (स्थायीकरण) से पूर्व चयन वेतनमान का लाभ प्राप्त करना नियम सगत है?
🔴वर्ष 2008 में लगा नियम विरुद्ध चयन वेतनमान और विनियमितकरण हुआ 2018 मे
सूत्र बताते है कि श्याम नरायण पाण्डेय, विरेंद्र पाण्डेय व देवेन्द्र पाण्डेय ने फर्जीवाड़ा व तथ्य गोपन कर तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक कुशीनगर पुष्पा रानी श्रीवास्तव के समक्ष अपनी पत्रावली प्रस्तुत कर वर्ष 2008 में चयन वेतनमान का लाभ प्राप्त किया जबकि बिना विनियमितकरण का चयन वेतनमान का लाभ प्राप्त करने का कोई प्रावधान ही नही है। विभागीय सूत्रो की माने तोसहायक अध्यापक श्याम नरायण पाण्डेय, वीरेंद्र पाण्डेय व देवेन्द्र पाण्डेय का विनियमितकरण वर्ष 2018 मे हुआ है शासनादेश के मुताबिक इन शिक्षको को वर्ष 2028 में चयन वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए, फिर वर्ष 2008 से यह तीनो शिक्षक चयन वेतनमान का लाभ कैसे और किसके संरक्षण मे प्राप्त कर रहे है ? बताया जाता है फर्जी तरीके से चयन वेतनमान का लाभ उठा रहे इन शिक्षको ने अब तक लाखो लाख रुपये सरकार का चूना लगाया है जिसकी रिकबरी जनहित मे लाजमी होगा।
नोट-- इस प्रकरण से जुडी खबर अगले अंक में पढे


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