🟡सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है पीडिता का कथित शपथ-पत्र
🔴सवाल पे सवाल, शपथकर्ती को देना होगा जबाब
🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। हिन्दु युवती के साथ दुष्कर्म कर धर्मांतरण कराकर मुस्लिम युवक से निकाह कराने के बाद अलग अलग युवको द्वारा युवती के साथ मुंह काला करने के मामले मे कुशीनगर जनपद के पडरौना कोतवाली मे रफी, छांगुर, नौशाद व आलमगीर समेत तेरह लोगो के खिलाफ संगीन धाराओं में दर्ज हुए मुकदमे में सोशल मीडिया पर एक शपथ-पत्र तैर रहा है। शपथ पत्र युवती की ओर से इलाहाबाद से बनवाया गया दर्शाया गया है। वाकई यह शपथ पत्र लखनऊ मे मीडिया के सामने रुबरु होकर धर्मांतरण व दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली युवती का है तो निसंदेह यह कानून के साथ खिलवाड़ है और इस षड्यंत्र को रचने वालो के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन अगर यह शपथ पत्र पुलिसिया कार्रवाई व विवेचना को प्रभावित करने के लिए प्रायोजित किया गया है तो इस खेल का माहिर खिलाड़ी कौन है ? इस स्क्रिप्ट के जरिए जघन्य अपराध में लिप्त आरोपियों को बचाने का कही प्रयास तो नही किया जा रहा है ? सच्चाई जो भी हो लेकिन यह गहन जांच का विषय है।
शपथपत्र के अंतिम पैरा ग्यारह मे शपथकर्ती ने लिखा है कि मै अनमिका सिंह उर्फ माला रावत पिता भूपेन्द्र सिंह उर्फ उपेन्द्र रावत दोनो एक ही है और शपथपत्र में पैरा 1 लगायत 11 तक मेरी निजी जानकारी में सत्य व सही है। इसमें न कुछ झूठ है और न कुछ छिपाया गया है। शपथ-पत्र मे अनामिका सिंह उर्फ माला रावत पुत्री भूपेन्द्र सिंह उर्फ उपेन्द्र रावत दोनो नाम एक ही व्यक्ति की बतायी जा रही है। आरोपियों के खिलाफ अनामिका सिंह पुत्री भूपेन्द्र सिंह के तहरीर पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। जबकि इसके उपर क्रम संख्या दस मे शपथकर्ती ने कहा है कि जब मुझे उन लोगो द्वारा आधार कार्ड प्राप्त कराया गया तो उसमें मेरा, मेरे पिता का नाम व पता सब गलत लिखा हुआ था। ऐसे मे अनामिका और माला दोनो एक कैसे है?
🔴शपथ पत्र मे आरोपियों का कही नाम नही
अनामिका के तहरीर पर पडरौना कोतवाली मे दर्ज दुष्कर्म व धर्मांतरण के मुकदमे में रफी, नौशाद, छांगुर, आलमगीर, रितेश मिश्रा समेत कुल तेरह लोगो के खिलाफ विभिन संगीन धाराओं में नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। मजे कि बात यह है कि शपथ-पत्र मे शपथकर्ती ने मुकदमा अपराध संख्या तो उल्लेख किया है किन्तु दर्ज मुकदमे मे उन तेरह आरोपियों में से किसी का नाम शपथ-पत्र मे अंकित नही किया है आखिर क्यों? शपथ पत्र बनवाते समय शपथकर्ती जिन लोगो पर झूठे आरोप लगाये थे क्या उनका नाम भूल गयी थी ? शपथकर्ती माला रावत जो खुद को अनामिका सिंह भी बता रही है पैरा पसंख्या छह मे गलत एफआईआर दर्ज होने के कारण अभियुक्तों व उनके परिवार को हुई असुविधा और कठिनाई के लिए खेद व्यक्त कर रही है। क्या किसी भी व्यक्ति पर घटिया और घिनौना आरोप लगाकर मान-सम्मान और जिन्दगी से खिलवाड़ करने के बाद खेद प्रकट कर देने से सब कुछ ठीक हो जायेगा? क्या कानून के साथ खिलवाड़ करने व झूठा आरोप लगाकर तेरह लोगो के मान-सम्मान घूमिल करने वाली युवती के विरुद्ध कोई कार्रवाई नही होगी? तमाम सवाल है जिसका सामना शपथकर्ती को करना पडेगा जो उसने शपथ-पत्र बनवाते समय शायद सोचा नही होगा।
कहना ना होगा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे शपथ-पत्र मे क्रम संख्या तीन व चार मे शपथकर्ती ने कहा है कि यह एफआईआर कुछ लोगों द्वारा दी गई गलत जानकारी और गलतफहमी के चलते दर्ज करायी गई है जिन्होंने मुझे गुमराह किया,मुझे उकसाया और मुझ पर दबाव डालकर ऐसे आरोप लगाए गए जो तथ्यात्मक रूप से गलत और निराधार थे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि दबाव बनाकर तेरह लोगो पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले लोगो का नाम शपथकर्ती ने अपने शपथ-पत्र मे क्यो नही उल्लेख किया है? आखिरकार वह किसके दबाव मे इस घृणित कृत्य को अंजाम दिया, शपथकर्ती किसके हाथो की मोहरा बनी हुई है?
🔴 विवेचक को क्यो नही दी शपथ-पत्र
विधि के जानकार बताते है कि किसी भी मामले मे मुकदमा दर्ज होने के बाद वादी व प्रतिवादी द्वारा अपना पक्ष रखने के लिए विवेचक अथवा पुलिस अधीक्षक को शपथ-पत्र देने का प्राविधान है जबकि यहा तो शपथ-पत्र को सोशल मीडिया पर प्रसारित कर पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठाने की कोशिश की जा रही है आखिरकार सोशल मीडिया पर शपथ-पत्र वायरल करने के पीछे मंशा क्या है? कही आरोपियों को बचाने की कोई कोशिश तो नही? मजे की बात यह है कि शपथकर्ती द्वारा 4 सितम्बर को शपथ-पत्र बनवाया गया है और 9 सितम्बर को यह शपथ-पत्र सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ किन्तु अभी तक यह शपथ पत्र न तो जिले के पुलिस कप्तान के पास पहुचा है और न ही विवेचक को इस शपथ-पत्र के बारे में कोई जानकारी है। मानवाधिकार कार्यकर्त्ता शशिकांत मिश्र द्वारा मांगी गयी सूचना में 13 सितम्बर को पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर ने पुलिस कप्तान को अपनी एक रिपोर्ट सौपी है जिसमे सीओ ने स्पष्ट कर दिया है कि दर्ज मुकदमे की वरिष्ठ उप निरीक्षक रवि भूषण राय द्वारा विवेचना संपादित की जा रही है विवेचना प्रचलित है। इसमे किसी तरह का कोई बयान या शपथ-पत्र अलग से प्राप्त नही हुआ है, तो फिर क्या यह शपथ-पत्र सिर्फ सोशल मीडिया पर उछालने के लिये तैयार किया गया था ? झोल है कही न कही कुछ ना कुछ झोल है जो निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होता दिख रहा है।
🟡रिपोर्ट - संजय चाणक्य







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