खाकी,खादी और तथाकथित पत्रकार मेहरबान, जुआ माफिया बने पहलवान - Yugandhar Times

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Saturday, September 13, 2025

खाकी,खादी और तथाकथित पत्रकार मेहरबान, जुआ माफिया बने पहलवान

🟡कुशीनगर में जुए का जंजाल : कसया थाना क्षेत्र बना अवैध कारोबार का प्रमुख केंद्र

🟣सुबह से लेकर शाम तक और रात्रि आठ बजे से लेकर भोर तक चलता है अवैध जुआ का कारोबार।

🔴जुआ कारोबारियों को प्राप्त है तथाकथित पत्रकार, कुछ पुलिसकर्मियों और सफदपोशो का संरक्षण

🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। नपद में जुआ का अवैध कारोबार कोरोना वायरस की तरह फैल गया है कुछ पुलिसकर्मियों के संरक्षण व सफेदपोशो के रहनुमाई और कथित पत्रकारों के मैनेजमेंट में फलफूल रहा यह अवैध कारोबार जिले कई थाना क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया है। इस धंधे से जुडे कारोबारियों व इस धंधे मे लाखो रुपये दाव पर लगाकर अपना सब कुछ गवाने वाले लोगो की माने तो बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली कुशीनगर का कसया थाना देह व्यापार के अनैतिक कारोबार के बाद अवैध जुआ प्रमुख केन्द्र बन गया है, जहां जुआरियों का नेटवर्क बेखौफ बिना किसी रोक-टोक के संचालित होता है। ऐसी चर्चा है कि यह कारोबार केवल स्थानीय स्तर पर ही नही बल्कि अंतरजनपदीय स्तर पर भी सक्रिय है। यही वजह है कि यहां हर दिन विभिन्न जनपदों के लोग आकर लाखो रुपये लगाते है। कोई जीत का जश्न रोटी, बोटी और दारु के साथ मनाता है तो कोई हार के गम में मायूस होकर घर लौट जाता है। इस दौरान मारपीट भी होती है, मामला पुलिस के पास भी जाता है लेकिन कार्रवाई के नाम पुलिस अपना जेब भरकर दोनो पक्ष को हड़का कर वापस भेज देती है।

बात कर रहे जनपद के कसया थाना क्षेत्र के सपहा नहर की पटरी के नीचे बागीचा का, जहां एक मछली व्यवसायी व उसके भाई द्वारा सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक और रात नौ बजे से भोर के पांच बजे तक खुलेआम अवैध रूप से जुआ का अड्डा चलाया जा रहा है। इसी तरह सूत्रो की माने तो कसया कस्बे में स्थित पुराने थाना से लगभग तीस मीटर की दूरी पर बरगद मोहल्ले के एक मकान में रात्रि आठ बजे से सुबह पांच बजे तक, पुरानी फाजिलनगर रोड लूना हॉस्पिटल के सामने स्थित बगीचे में दोपहर 12बजे से शाम 5 बजे तक और साखोपार शराब भट्ठी के पीछे बगीचे में 12 दिन से शाम 5 बजे तक जुआ का अवैध कारोबार बेखौफ संचालित होता जोरो है। ऐसा नही है कि इस अवैध कारोबार का किसी को भनक नही है, बूढ़े-बच्चे और नौजवान से लगायत खाकी के लोग भी ताश के पत्ते पर प्रतिदिन हो रहे लाखो रुपये के वारा-न्यारा से वाकिफ है। बावजूद इसके पुलिस प्रशासन इस कारोबार को रोकने और जुआ कारोबारियों पर नकेल कसने में नाकाम साबित हो रही है। नतीजतन इस अवैध और गैर कानूनी कारोबार की कोख से चोरी, छिनैती और मारपीट के साथ साथ पारिवारिक कलह भी बढ रहा है। 

🔴इन थाना क्षेत्रों में होता है जुए का अवैध कारोबार

सूत्रो के मुताबिक जिले के रामकोला, कप्तानगंज, तुर्कपट्टी, हाटा, और रविंद्रनगर  थाना क्षेत्रों में जुए का कारोबार लंबे समय से चला आ रहा है। सूत्रों का कहना है कि रामकोला थाना क्षेत्र के धर्मशमधा मंदिर के समीप स्थित साम्वे माता मंदिर के पर आनलाइन जुआ का खेल 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक, कप्तानगंज थाना क्षेत्र के पीजी कॉलेज के पीछे दिन में 2:00 बजे से 8:00 बजे रात्रि तक, तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के सूर्य मंदिर के समीप दिन में 12:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक सहित हाटा और रविन्द्र नगर घुस थाना क्षेत्र में जुए का कारोबार फल- फूल रहा है। बीते दिनो कप्तानगंज थाना क्षेत्र में स्वाट टीम ने छापेमारी कर 18 जुआरियों को गिरफ्तार किया था,और रविंद्रनगर धूस से पुलिस ने पांच जुआरियों को लगभग आठ हजार रुपये नकद और ताश की गड्डियों के साथ दबोचा था। हालांकि, ये कार्रवाइयां नाकाफी साबित हो रही हैं, क्योंकि जुआ कारोबारी हर दिन नए-नए तरीकों से इस धंधे को जारी रखते हैं। सूत्रो का दावा है कि बगैर स्थानीय बीट पुलिस और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के यह कारोबार संचालित करना संभव नहीं है।


🔴जुआ माफियाओ को प्राप्त है सफेदपोशो का सरंक्षण

कहना ना होगा कि कसया सहित तुर्कपट्टी, रामकोला, कप्तानगंज, हाटा व रविन्द्र नगर घुस थाना क्षेत्रो मे संचालित हो रहे अवैध जुआ माफियाओ को कुछ पुलिसकर्मियों के संरक्षण व सफेदपोशो के रहनुमाई और तथाकथित पत्रकारों का मैनेजमेंट प्राप्त है। यही वजह है कि यह माफिया अपने अवैध कारोबार को बेखौफ होकर संचालित कर रहे है। सूत्र बताते है कि कसया के सपहा के समीप बगीचे में संचालित जुआ अड्डा पर गोरखपुर, देवरिया, बिहार व कुशीनगर जनपद के बडे-बडे जुआरियों का जमावड़ा होता रहता है। जानकारों का मानना है कि जुएं के बढते व्यापार के कारण शहर में चोरी, मारपीट जैसे आपराधिक वारदातों में इजाफा हो रहा है। सूत्रों की माने तो जुआ माफिया द्वारा संचालित किए जाने वाले जुएं के खेल में दांव (फड़) लगाने वाले जुआरियों को सुरक्षित माहौल मुहैया करवाने के नाम पर भी रुपये लिए जाते हैं। यह रकम जुआरियों से वसूल की जाती है। यही नहीं कारोबारी जुंए में हारने वाले जुआरियों को मोटे ब्याज पर कर्ज भी मुहैया करवाते हैं। परिणाम स्वरूप हारने वाले जुआरियों को उधार रुपये देकर कारोबारी उन्हें मोटे ब्याज में चंगुल में फंसा लेते है, फिर कुछ ही दिनों में ब्याज की रकम मूल रकम से दोगुनी हो जाती है, कुछ लोग रकम न चुका पाने के वजह से जुआ माफिया के प्रताड़ना से ब्लैकमेल का शिकार होते है।

🟡रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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