स्वामी का भाजपा को नेस्तनाबूद करने का दावा, बडबोलापन है या जनाधार
🔴 संजय चाणक्य कुशीनगर । कभी बसपा सुप्रीमो मायावती का चरण वंदन कर सक्रिय राजनीति मे अपना पहचान बनाने वाले व अवसरवादी नेताओ मे शुमार स्वामी प्रसाद मौर्या, बेशक मौसम वैज्ञानिकों की तरह सत्ता सुख का दूरदृष्टि के अच्छे जानकार कहे जा सकते है। लेकिन इस बात से इंकार नही किया जा सकता है कि इनकी राजनीति जमीन उसड है। मार्या के राजनीति सफरनामे पर नजर दौडाये तो यह कभी हाथी की बदमस्त चालो के साथ कदमताल कर लाल बत्ती का सुख हासिल किये तो कभी खिलते कमल के पखरुखियो के सहारे अपने डूबते अस्तित्व की बेडा पार करने मे सफल हुए है। मतलब यह कि मौर्या के सिर पर जीत का चेहरा कभी बसपा के कैडर वोटरो ने बांधा तो कभी मोदी लहर ने। ऐसे मे यह सवाल उठना लाजमी है कि मौर्या का अपना जनाधार क्या है? सपा मे शामिल होने के बाद स्वामी अपने दम पर सपा को क्या लाभ पहुचा सकते है। यह तो भविष्य के गर्भ मे छिपा है लेकिन पिछड़ी जाति का बडे नेता होने का अगर उन्हे गुमान है तो उन्हें इस गफलत मे नही रहना चाहिए कि वह देश व प्रदेश के इकलौते पिछडी जाति के नेता नही है। अगर मौर्या पिछडी जाति के सबसे बडे नेता है तो फिर पीए...