🔵रमेश तिवारी रिलीव, सुभाष पर मेहरबानी! शासनादेश पर भारी पड़ा सुभाष यादव का रसूख?
🔴 बलिया का तबादला, कुशीनगर में डेरा! सुभाष यादव को कार्यमुक्त करने में परहेज क्यों?
🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में शासन के आदेश के पालन को लेकर दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। वर्षों से एक ही जनपद में तैनात लिपिकों के स्थानांतरण के शासनादेश के तहत कार्यालय के दो कर्मचारियों का तबादला हुआ। आदेश के क्रम में रमेश तिवारी को महराजगंज और सुभाष प्रसाद यादव को बलिया भेजा गया। डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त ने रमेश तिवारी को तो तत्काल कार्यमुक्त कर दिया, लेकिन सुभाष यादव अब भी कार्यालय मे कुण्डली जमाये बैठे हैं। सुभाष को कार्यमुक्त करने के बजाय लोकायुक्त की जांच के जद मे घिरे डीआईओएस द्वारा स्थानांतरण रुकवाने के प्रयास की चर्चा जोरो पर हैं।
बतादे कि शासन ने लंबे समय से एक ही जनपद में तैनात लिपिकों के स्थानांतरण का निर्णय लिया। इसी क्रम में डीआईओएस कार्यालय कुशीनगर के लिपिक रमेश तिवारी का स्थानांतरण महराजगंज और सुभाष प्रसाद यादव का ट्रान्सफर बलिया किया गया। डीआईओएस ने आदेश के अनुपालन में रमेश तिवारी को कार्यमुक्त कर दिया गया जबकि इसके विपरीत सुभाष यादव को अभी तक कार्यमुक्त नहीं किया है। भरोसेमंद सूत्र बताते है कि लोकायुक्त जांच के जद में घिरे जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्त अपने कारखास कर्मचारी सुभाष यादव का स्थानांतरण रुकवाने का प्रयास कर रहे है। यदि यह सही है तो सवाल यह है कि शासन के स्थानांतरण आदेश के बाद किसी कर्मचारी को रोकने का अधिकार किसके पास है और किस आदेश के तहत?
🔴साढे तीन दशक पूर्व हुई थी परिचारक के पद पर नियुक्ति
कहना ना होगा कि सुभाष प्रसाद यादव की मूल नियुक्ति भी इस पूरे मामले का अहम हिस्सा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 1991 में उनकी नियुक्ति अनौपचारिक शिक्षा परियोजना में कसया विकासखंड में परिचारक के पद पर हुई थी। उस समय कुशीनगर, देवरिया जनपद का हिस्सा था।बताया जाता है कि परिचारक के रूप में उन्होंने 16 अप्रैल 2001 तक सेवा की। लेकिन अनौपचारिक शिक्षा परियोजना के समाप्त होने के बाद उनकी सेवा किस आधार पर जारी है, यह सबसे बड़ा सवाल है। अनौपचारिक शिक्षा से जुड़े रहे महेश कुमार, रामनरेश भारती और सूर्य प्रकाश का कहना है कि परियोजना समाप्त होने के बाद अनुदेशकों को सर्व शिक्षा अभियान से जोड़ा गया था, जबकि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को हटा दिया गया था। बाद में सर्व शिक्षा अभियान भी समाप्त हो गया। ऐसे में विभागीय रिकॉर्ड से यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि परियोजना समाप्ति के बाद सुभाष यादव की सेवा किस आदेश के आधार पर जारी रही।
🔴 रिश्तेदार परियोजना अधिकारी थीं
सूत्रों का दावा है कि नियुक्ति के समय सुभाष यादव की एक रिश्तेदार परियोजना अधिकारी थीं और उन्हीं के कार्यकाल में उनकी नियुक्ति परिचारक के पद पर हुई। इस दावे की पुष्टि मूल नियुक्ति अभिलेखों से होनी बाकी है।मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कोई सवाल है तो उसकी जांच आज के पद या स्थानांतरण से नहीं, बल्कि मूल नियुक्ति पत्र से शुरू होनी चाहिए।
🔴कागज बताएंगे नौकरी वैध या अवैध
सुभाष यादव की नौकरी को लेकर कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल जैसे आरोप भी लगाए जा रहे हैं। इस लिए इसकी सच्चाई का फैसला दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच से ही होगा। ऐसे मे मूल नियुक्ति आदेश, परियोजना समाप्ति का आदेश, सेवा निरंतरता संबंधी आदेश, पदोन्नति आदेश, पद की स्वीकृति और सेवा पुस्तिका की जांच जरूरी है। इसके बाद ही दूध का दूध पानी का पानी साफ होगा।
🔴 डीआईओएस को देना होगा जवाब
सवाल यह नहीं कि सुभाष यादव किसके करीबी हैं। सवाल यह है कि क्या शासन का स्थानांतरण आदेश सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगा?अगर रमेश तिवारी को उसी आदेश के तहत कार्यमुक्त किया जा सकता है तो फिर सुभाष यादव को क्यों नहीं? यदि उन्हें रोकने का कोई वैधानिक आदेश है तो वह आदेश क्या है और किस सक्षम अधिकारी ने जारी किया है?शासन ने जब सुभाष यादव का स्थानांतरण किया है तो कार्यमुक्ति की कार्रवाई किसके आदेश से रोकी गई है?
🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य


