सीएम की वर्चुअल मीटिंग में अध्यक्ष की जगह पति! शासनादेश के बीच की मौजूदगी पर उठे सवाल?

🔵शासनादेश के मुताबिक निर्वाचित महिला पदाधिकारी अपने कर्तव्यों का करे स्वतंत्र रूप से निर्वहन

🔴जिलाधिकारी, सांसद, विधायक, प्रमुख व निकाय अध्यक्षों की मौजूदगी वाली बैठक मे अध्यक्ष किरन के पति राकेश की उपस्थिति पर सवाल

🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। मुख्यमंत्री की वर्चुअल बैठक में नगर पालिका परिषद कुशीनगर की निर्वाचित अध्यक्ष किरन जायसवाल की जगह उनके पति राकेश जायसवाल की मौजूदगी  सवालों के घेरे में है। बैठक में जिलाधिकारी के साथ जिले के सांसद, विधायक, ब्लॉक प्रमुख और नगर निकायों के अध्यक्षों की मौजूदगी रही है। ऐसे में सवाल यह है कि जब बैठक निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए थी तो कुशीनगर नगर पालिका का प्रतिनिधित्व अध्यक्ष की जगह उनके पति ने किस हैसियत से किया?

बेशक! मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि उत्तर प्रदेश शासन के नगर विकास विभाग ने 10 अक्टूबर 2012 को शासनादेश संख्या 3905/नौ-1-2012-8ई/1995 जारी कर स्थानीय निकायों में निर्वाचित महिला पदाधिकारियों के पति अथवा संबंधियों के निकाय के प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप को लेकर तल्ख दिशा-निर्देश जारी किए है। शासनादेश का विषय ही इसी हस्तक्षेप से संबंधित है।

🔴 अध्यक्ष की जगह पति क्यों?

 वर्चुअल बैठक में जिले के निर्वाचित और अधिकृत जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच राकेश जायसवाल की उपस्थिति को लेकर अब सबसे सीधा सवाल यह है क्या उन्हें नगर विकास मंत्रालय की ओर से अध्यक्ष की प्रतिनिधित्व करने के लिए विधिवत अधिकृत किया गया है?यदि हां, तो किस आदेश के तहत? किस अधिकारी अथवा सक्षम प्राधिकारी ने अनुमति दी?क्या इसका कोई लिखित आदेश नगर पालिका के अभिलेख में मौजूद है?और यदि ऐसा कोई आदेश नहीं है तो फिर नगर पालिका अध्यक्ष की जगह बैठक में उनकी मौजूदगी का प्रशासनिक आधार क्या था?

🔴महिला जनप्रतिनिधि मौजूद थीं, फिर यह अपवाद क्यों?

बैठक में अन्य महिला जनप्रतिनिधियों के मौजूद रहने की स्थिति में कुशीनगर नगर पालिका अध्यक्ष की जगह उनके पति की मौजूदगी का सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है। यहां सवाल राकेश जायसवाल के व्यक्तिगत रूप से बैठक में मौजूद रहने का नहीं, बल्कि नगर पालिका के प्रतिनिधि के रूप में उनकी हैसियत का है। क्या वे निजी तौर पर बैठक में मौजूद थे?या नगर पालिका अध्यक्ष के प्रतिनिधि के रूप में?अगर प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे थे तो प्रतिनिधित्व का लिखितअधिकार किसने दिया?

🔴 2012 का शासनादेश क्या कहता है?

10 अक्टूबर 2012 के शासनादेश में शासन ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं कि निर्वाचित महिला पदाधिकारी के पति अथवा संबंधी निकाय के प्रशासनिक कार्यों में कदापि हस्तक्षेप न करें। शासनादेश में यह भी कहा गया है कि निर्वाचित अथवा पदेन पदाधिकारी से भिन्न व्यक्ति को निकाय की बैठकों में शामिल होने तथा अपने मत की अभिव्यक्ति करने की अनुमति न दी जाए। शासनादेश में आगे यह व्यवस्था भी बताता है कि निर्वाचित महिला पदाधिकारी अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का स्वतंत्र रूप से स्वयं निर्वहन करें और उनके स्थान पर या उनके साथ संबंधियों अथवा अन्य व्यक्तियों को निकाय के कार्यों में शामिल न किया जाए। शासनादेश में यह व्यवस्था पुरुष पदाधिकारियों पर भी लागू किए जाने की बात कही गई है और निर्देशों के उल्लंघन की स्थिति में सत्यापित तथ्यों के आधार पर शासन को अवगत कराकर नियमों के तहत प्रभावी अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।

🔴 अब सवाल बैठक से बड़ा हो गया

यदि राकेश जायसवाल को मुख्यमंत्री की वर्चुअल बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष की जगह बैठने के लिए विधिवत अधिकृत किया गया था तो वह आदेश सार्वजनिक होना चाहिए। यदि उन्हें अधिकृत नहीं किया गया था तो फिर किस आधार पर उन्होंने नगर पालिका का प्रतिनिधित्व किया?और यदि उन्हें “अध्यक्ष प्रतिनिधि” के रूप में भेजा गया था तो उस प्रतिनिधित्व की वैधानिक सीमा क्या है?क्या अध्यक्ष का प्रतिनिधि मुख्यमंत्री की बैठक में अध्यक्ष की जगह बैठ सकता है? क्या वह नगर पालिका की ओर से आधिकारिक रूप से पक्ष रख सकता है?क्या ऐसे प्रतिनिधित्व के लिए शासनादेश में कोई व्यवस्था है? इन सवालों का जवाब अब नगर पालिका प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को देना होगा।


🔴बैठक की तस्वीर से लेकर शासनादेश तक  जरूरी है जवाब 

नगर पालिका में पहले से ही राकेश जायसवाल की भूमिका को लेकर यह सवाल उठते रहे हैं कि वे ईओ के साथ निर्माण कार्यों का निरीक्षण किस अधिकार से करते हैं और पालिका कार्यालय में किस हैसियत से बैठते हैं।अब मुख्यमंत्री की वर्चुअल बैठक में अध्यक्ष की जगह उनकी मौजूदगी का सवाल भी जुड़ गया है।मुद्दा किसी व्यक्ति की मौजूदगी मात्र का नहीं है। मुद्दा यह है कि सरकारी व्यवस्था में किसी निर्वाचित पदाधिकारी के स्थान पर कोई दूसरा व्यक्ति किस शासनादेश, किस लिखित अधिकार और किस नियम के तहत सरकारी मंच पर उसका प्रतिनिधित्व कर सकता है? नगर पालिका प्रशासन को इस सवाल का जबाब चुप्पी साधकर नही बल्कि अभिलेखीय रिकार्ड सामने रखकर देना पडेगा।

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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