हिन्दी भाषा के सहारे भारत में रूस का ‘मीडिया मिशन’! RT ने बदला खेल, बदला नजरिया

🔵अब हिंदी में सुनिए रूस की आवाज! RT की भारत में एंट्री

🔴 रसिया टूडे ने भारत के सबसे बड़े भाषा बाजार में रखा कदम

🔵 युगान्धर टाइम्स न्यूज नेटवर्क 

नई दिल्ली। दुनिया को देखने का नजरिया सिर्फ खबरों से नहीं बनता, खबर कौन सुना रहा है और किस नजरिए से सुना रहा है यह भी उतना ही मायने रखता है। रूस समर्थित सरकारी मीडिया नेटवर्क आरटी रसिया टूडे  ने भारत में अपनी समर्पित हिंदी डिजिटल समाचार सेवा शुरू कर इसी सवाल को नए सिरे से सामने ला दिया है। खास बात यह है कि हिंदी में आरटी की दस्तक ऐसे वक्त हुई है, जब भारत-रूस संबंधों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज है और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की तैयारियों के बीच बीआरआईसीएस को लेकर भी गतिविधियां बढ़ी हुई हैं।

आरटी ने अपनी हिंदी सेवा के प्रचार के लिए जिस अंदाज को चुना है, उसने शुरुआत में ही संदेश साफ कर दिया। प्रचार अभियान में ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स को डिजिटल रूप से बदले हुए भारतीय परिवेश में दिखाया गया है। व्यंग्य के इस अंदाज में भारतीय देसी संदर्भों के जरिए पश्चिमी देशों पर कटाक्ष किया गया है। यानी आरटी की हिंदी एंट्री सिर्फ भाषा बदलने की कवायद नहीं, बल्कि नजरिया बदलने का संदेश भी है।

🔴 हिंदी भाषा क्यों?

 क्योंकि भारत का सबसे बड़ा दर्शक वर्ग यहीं है। अंग्रेजी के जरिए भारतीय दर्शकों तक पहुंच बना चुका आरटी अब हिंदी के विशाल बाजार में उतर रहा है। भारत में हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों तक पहुंचने वाला सबसे बड़ा व शुलभ जनसंचार माध्यम है।यही वजह है कि आरटी (रसिया टूडे) का हिंदी विस्तार महज कारोबारी या तकनीकी फैसला नहीं माना जा सकता। इसके पीछे भारत के आम दर्शक तक सीधे पहुंच बनाने की कोशिश दिखाई देती है।पश्चिमी मीडिया संस्थानों की भारत में वर्षों से बनी पहचान के मुकाबले आरटी अपेक्षाकृत नया खिलाड़ी है। ऐसे में हिंदी उसके लिए भारत के उस विशाल दर्शक वर्ग तक पहुंचने का रास्ता बन सकती है, जो अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को अपनी भाषा में समझना चाहता है।

🔴 पुतिन की यात्रा, BRICS और हिंदी लॉन्च

7 सितंबर को आरटी ने भारत में अपनी हिंदी सेवा शुरू की। इसी दौरान नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को BRICS सम्मेलन और उसके बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा को लेकर गतिविधियां चर्चा में हैं। पुतिन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संभावित मुलाकात में व्यापार, ऊर्जा, पश्चिमी प्रतिबंधों और बीआरआईसीएस के भविष्य जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।ऐसे कूटनीतिक माहौल के बीच रूसी मीडिया नेटवर्क का भारत के सबसे बड़े भाषा बाजार में उतरना स्वाभाविक रूप से सवाल पैदा करता है क्या यह महज मीडिया विस्तार है या रूस की व्यापक सार्वजनिक-कूटनीति रणनीति का हिस्सा? क्योंकि भारत में आरटी की रणनीति अचानक सामने नहीं आई है। नेटवर्क ने पहले भारतीय बाजार में अपना आधार तैयार किया। न्यूजरूम खड़ा किया गया, भारतीय पत्रकारों और चेहरों को आगे लाया तथा भारतीय राजनीति और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को अपने कार्यक्रमों में जगह दी गई। दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में आरटी इंडिया की शुरुआत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और आरटी की प्रधान संपादक मार्गरीटा सिमोनियन की मौजूदगी में हुई थी। इसे भारत और रूस के बीच नए मीडिया सेतु के रूप में प्रस्तुत किया गया।

🔴 भारतीय चेहरे, भारतीय मुद्दे और रूसी नजरिया

आरटी (रसिया टूडे) इंडिया की संपादकीय रणनीति में भारतीय चेहरों को खास महत्व दिया गया है। पत्रकार रुंझुन शर्मा इसकी प्रमुख संपादकीय भूमिकाओं में दिखाई देती हैं और भू-राजनीतिक मामलों से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय हैं। इसके अलावा कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने औपनिवेशिक इतिहास और भारत में ब्रिटिश विरासत से जुड़े ‘इंपीरियल रिसीट्स’ कार्यक्रम के जरिए आरटी के मंच पर उपस्थिति दर्ज कराई है। पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद भी आरटी के ‘इन कन्वर्सेशन विद’ कार्यक्रम में दिखाई दे चुके हैं। आरटी ने भारत के सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती के साथ मीडिया सहयोग से जुड़े समझौते भी किए हैं।यह सब मिलाकर तस्वीर यह बताती है कि रूस सिर्फ रूस की खबरें भारत में दिखाने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि भारत के मीडिया स्पेस में अपने लिए एक स्थानीय पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है।

🔴असल लड़ाई दर्शक की नहीं, नजरिए की 

आरटी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारत में वह दर्शक तो जुटा लेगा, लेकिन क्या वह भरोसा भी जुटा पाएगा?भारत की विदेश नीति किसी एक खेमे के साथ पूरी तरह खड़े होने के बजाय रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित रही है। रूस भारत का पुराना और महत्वपूर्ण साझेदार है, लेकिन भारत अमेरिका, यूरोप और अन्य वैश्विक शक्तियों के साथ भी अपने संबंध लगातार मजबूत कर रहा है।ऐसे माहौल में आरटी का संदेश सीधे तौर पर भारत को किसी एक पक्ष को चुनने के लिए कहना नहीं हो सकता। उसकी रणनीति इससे अधिक सूक्ष्म हो सकती है दुनिया को केवल पश्चिमी नजरिए से देखने की जरूरत नहीं है।यही संदेश भारतीय दर्शकों के बीच ज्यादा सहज तरीके से जगह बना सकता है।

🔴आरटी की सबसे बड़ी चुनौती विश्वसनीयता

भारत में बीबीसी जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने दशकों में अपनी पहचान बनाई है। आरटी के लिए चुनौती अलग है। उसे भारतीय दर्शकों के बीच अपनी विश्वसनीयता और संपादकीय पहचान स्थापित करनी होगी। इसीलिए भारतीय पत्रकारों, स्थानीय मुद्दों, राजनीतिक हस्तियों और भारतीय संदर्भों को उसके मंच पर बढ़ती जगह मिलना महज संयोग नहीं माना जा सकता। रणनीति साफ दिखती है चेहरा भारतीय हो, विषय भारतीय हो और दुनिया को देखने का नजरिया अलग हो।यही वह जगह है जहां आरटी हिंदी का प्रयोग महज भाषा विस्तार से आगे निकल जाता है।

🔴 फर्क नजरिए का फर्क 

आरटी का संदेश है“फर्क नजरिए का।”बात सुनने में साधारण है, लेकिन इसके भीतर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की बड़ी बहस छिपी है। दुनिया एक ही है, घटनाएं भी वही हैं, लेकिन उन्हें देखने और समझाने का नजरिया अलग-अलग हो सकता है।पश्चिमी मीडिया एक घटना को जिस तरह प्रस्तुत करता है, रूस समर्थित मीडिया उसी घटना की दूसरी व्याख्या सामने रख सकता है।और यहीं आरटी हिंदी की असली परीक्षा शुरू होती है। भारत में उसका मुकाबला केवल दूसरे समाचार पत्रिकाओं व चैनलों से नहीं होगा, बल्कि दर्शकों के भरोसे, संपादकीय विश्वसनीयता और सूचना के अलग-अलग स्रोतों से होगा।किंग चार्ल्स से शुरू हुआ मजाक, लेकिन सवाल गंभीर है। आरटी के प्रचार अभियान में किंग चार्ल्स का भारतीय अंदाज में नजर आना भले ही व्यंग्य हो, मगर इसके पीछे का संदेश गंभीर है। रूस भारतीय दर्शकों से कह रहा है कि दुनिया को देखने के लिए सिर्फ एक खिड़की क्यों? लेकिन सवाल अब यह है कि जब मॉस्को भारतीयों से दुनिया को “अलग नजरिए” से देखने की अपील कर रहा है, तो आखिर वह चाहता है कि भारतीय उस खिड़की से क्या देखें?

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