'' बिजली विभाग मे कम्प्यूटर ऑपरेटरो की भर्ती मे "डेढ़ से दो लाख''रुपये लेकर नौकरी देने के आरोपों पर पर्दा डालने की कोशिश चर्चा भर्ती घोटाले से ज्यादा उस रहस्यमयी खामोशी की है, जो कई बड़े सवाल खड़े कर रही है।"
🔵आखिर किसके वरदहस्त से बच रहे हैं भर्ती खेल के कथित खिलाड़ी? विभाग की चुप्पी ने बढ़ाए संदेह
🔴 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। बिजली विभाग में कम्प्यूटर ऑपरेटर भर्ती के नाम पर कथित धन उगाही और नियमों की धज्जियां उड़ाकर की गई नियुक्तियों को लेकर लगातार मीडिया द्वारा प्रमुखता से खबरें प्रकाशित करने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई न होना अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा खेल संचालित हुआ है। बार बार मामला सार्वजनिक होने के बाद भी न विभाग जागा, न प्रशासन और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटी।

कहते हैं कि अगर आरोप झूठे हों तो उनका जवाब दिया जाता है, और यदि आरोप सच हों तो उन्हें दबाने की कोशिश की जाती है। बिजली विभाग में कम्प्यूटर ऑपरेटर भर्ती को लेकर प्रकाशित खबरों के बाद भी विभागीय अधिकारियों और प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी तमाम सवाल खड़े कर रही है। कहना ना होगा कि मीडिया ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर कई गंभीर सवाल उठाए है। आरोप है कि बिजली विभाग में एक कम्पनी द्वारा बिना सार्वजनिक विज्ञापन निकाले, बिना खुली चयन प्रक्रिया और बिना मेरिट सूची के नियुक्तियां कर दी गईं। इतना ही नहीं, अभ्यर्थियों से डेढ़ लाख से दो लाख रुपये तक लिए जाने की चर्चाएं भी आम हैं। लेकिन आश्चर्य यह है कि इन आरोपों के बाद भी न कोई जांच समिति बनी, न कोई स्पष्टीकरण जारी हुआ और न ही किसी अधिकारी ने सामने आकर सच्चाई बताने की जरूरत समझी।जिले के बेरोजगार युवाओं के बीच चर्चा सरेआम है यदि सब कुछ नियमों के तहत हुआ है तो विभाग रिकॉर्ड सार्वजनिक करने से क्यों बच रहा है? भर्ती का विज्ञापन कहां है? चयन का आधार क्या था? आवेदन कब आमंत्रित किए गए? और यदि प्रक्रिया वैध है तो उसके दस्तावेज सामने लाने में हिचकिचाहट किस बात की है? यदि नियुक्तियां पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई हैं तो विभाग व कम्पनी को सामने आकर यह बताना चाहिए कि विज्ञापन कब निकला, आवेदन कितने आए, चयन किस आधार पर हुआ और चयन समिति में कौन-कौन लोग शामिल थे।सूत्रों का दावा है कि यह मामला केवल कुछ नियुक्तियों तक सीमित नहीं है। चर्चा यह भी है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो भर्ती प्रक्रिया की कई परतें खुल सकती हैं। यही कारण है कि जिम्मेदार लोग पूरे मामले पर चुप्पी की चादर ओढ़े हुए हैं।
🔴 पडरौना समेत जिले के अन्य विद्युत उपकेंद्रो पर हुई है नियुक्ति
जानकारों का कहना है कि पडरौना विद्युत उपकेंद्र समेत जिले के कई उपकेंद्रों पर हुई नियुक्तियों को लेकर उठ रहे सवाल अब केवल भर्ती तक सीमित नहीं रह गया हैं। चर्चा जोरो पर है कि मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो कई बड़े नामों की भूमिका उजागर हो सकती है। यही वजह है कि पूरा मामला फाइलों में दबाकर समय बिताने की कोशिश की जा रही है।बताया जाता है प्रशासन व विभाग के खामोशी के कारण बेरोजगार युवाओं में भी गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि जब नौकरी पाने के लिए योग्यता से ज्यादा पैसे की जरूरत पड़ने लगे और शिकायत के बाद भी कार्रवाई न हो, तो युवाओं का व्यवस्था से भरोसा उठना स्वाभाविक है।
🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य