🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। जनपद के कसया कस्बे में संचालित लूना अस्पताल में बीते मंगलवार को हुई नर्गिस की मौत के बाद से परिवार जहा लगातार इंसाफ की मांग कर रहा है, वहीं हास्पिटल प्रशासन स्वास्थ्य विभाग से लगायत स्थानीय पुलिस प्रशासन को मैनेज कर मामले को किसी तरह से निपटाने में जुटा है। ऐसा सूत्रो का दावा है, इस दावे मे कितनी सच्चाई है यह गहन जांच का विषय है। लेकिन इस बात से इंकार नही किया जा सकता है पथरी के आपरेशन मे मरीज की मृत्यु होना कही न कही चिकित्सक की घोर लापरवाही को दर्शा रहा है।
बताया जाता है कि नर्गिस की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन की बढ़ी गतिविधियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन का पूरा ध्यान इलाज से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय मामले को शांत कराने और विवाद को बढ़ने से रोकने पर केंद्रित दिखाई दे रहा है। परिवार का दावा है कि विभिन्न स्तरों पर बातचीत और समझौते के प्रयास कर दबाव बनाये जा रहे है।, ताकि मामला आगे न बढ़ सके।हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन घटना के बाद अस्पताल परिसर के बाहर लगातार चल रही बातचीत को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोगों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि आखिर मौत के बाद हास्पिटल की इतनी बेचैनी किस बात की है?
नगर पालिका परिषद कसया के वार्ड संख्या-4 निवासी नर्गिस पत्नी तसलीम गाल ब्लैडर में पथरी की समस्या से पीड़ित थीं। परिजनों के अनुसार बेहतर इलाज की उम्मीद में उन्हे कसया स्थित लूना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि चिकित्सकों ने ऑपरेशन को सामान्य बताते हुए मरीज को भर्ती कर लिया और जल्द स्वस्थ होने का भरोसा दिलाया। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद नर्गिस की हालत बिगड़ने लगी। आरोप है कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद न तो विशेषज्ञ चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई और न ही समय रहते किसी उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर किया गया। इसी बीच उपचार के दौरान नर्गिस की मौत हो गई।
🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य


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