🔵आवेदन गायब, चयन बरकरार! जिला प्रोबेशन कार्यालय की भर्ती पर बड़ा सवाल
🔴भर्ती में भाई-भतीजावाद की पुष्टि, फिर भी कार्रवाई से परहेज!
🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। जिला प्रोबेशन कार्यालय कुशीनगर में हुई आउटसोर्सिंग भर्ती का मामला अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े करने लगा है। एक तरफ अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) की जांच आख्या में भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि की गई, वहीं दूसरी तरफ जांच रिपोर्ट आने के 20 दिन बाद भी न तो भर्ती निरस्त हुई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई हुई। अब शिकायतकर्ता ने मंडलायुक्त गोरखपुर से हस्तक्षेप कर एफआईआर दर्ज कराने और पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की है।
शिकायतकर्ता अभिषेक कुमार यादव द्वारा 9 जुलाई को मंडलायुक्त को भेजे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यकाल में शासनादेशों की अनदेखी कर भर्ती प्रक्रिया को मनमाने तरीके से संचालित किया गया, जिससे पात्र अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन हुआ और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका भी पैदा हुई।
🔴जांच रिपोर्ट ने खोली ‘सेटिंग वाली भर्ती’ की पोल
शिकायतकर्ता अभिषेक कुमार यादव की शिकायत पर हुई जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं।जांच में पाया गया कि शासनादेशों की अनदेखी करते हुए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई गई। इतना ही नहीं, जहां एक पद के लिए कम से कम पांच अभ्यर्थियों को अवसर देने का प्रावधान था, वहीं 174 आवेदनों के बावजूद कुछ पदों पर चुनिंदा लोगों को ही साक्षात्कार में शामिल किया गया।
🔴चयनित अभ्यर्थी का आवेदन ही गायब!
जांच रिपोर्ट का सबसे विस्फोटक खुलासा यह है कि जिस अभ्यर्थी का चयन जिला मैनेजर/कोऑर्डिनेटर जैसे महत्वपूर्ण पद पर किया गया, उसके आवेदन से संबंधित आवश्यक अभिलेख तक उपलब्ध नहीं मिले। सवाल यह है कि जब आवेदन का रिकॉर्ड ही नहीं है, तो चयन किस आधार पर हुआ? क्या नियमों से ऊपर किसी की सिफारिश चल रही थी?
🔴हार गई योग्यता जीत गयी रिश्तेदारी
जांच में यह भी सामने आया कि चयनित 10 अभ्यर्थियों में से 8 एक ही जाति से संबंधित हैं। यह तथ्य भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह पैदा करता है। आखिर क्या पूरे जिले में योग्य अभ्यर्थी केवल एक ही जाति में थे, या फिर चयन समिति ने मेरिट की जगह ‘अपनों’ को तरजीह दी?
🔴एडीएम ने कहा- पुनः समीक्षा कराइए, प्रशासन बोला- सब चंगा
जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा कि चयन प्रक्रिया में पाई गई विसंगतियों के मद्देनजर चयन की पुनर्समीक्षा कराई जानी चाहिए। लेकिन रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। यदि जांच सही है तो कार्रवाई क्यों नहीं? और यदि कार्रवाई नहीं करनी थी तो फिर जांच कराई ही क्यों गई?
🔴अब मंडलायुक्त के दरबार में पहुंचा मामला
जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई न होने से नाराज शिकायतकर्ता अभिषेक कुमार यादव ने मंडलायुक्त गोरखपुर को शिकायती पत्र भेजकर पूरी चयन प्रक्रिया निरस्त करने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराने तथा विवादित भुगतान की रिकवरी कराने की मांग की है।




