चित्रगुप्त मंदिर समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष को वाद वापस लेने की मिली धमकी

 

🔵न्यायालय में विचाराधीन मामले को प्रभावित करने की कोशिश? ट्रस्ट अध्यक्ष ने उठाए सवाल

🔵युगान्धर टाइम्स न्यूज नेटवर्क 

कुशीनगर। चित्रगुप्त मंदिर समिति न्यास द्वारा पडरौना नगर के श्री चित्रगुप्त मंदिर के रख रखाव, जीणोद्वार, मंदिर निर्माण के साथ साथ मंदिर परिसर में संचालित गौशाला को लेकर चल रहा विवाद अब अदालत की चौखट से निकलकर धमकियों और दबाव की राजनीति तक पहुंच गया है। मंदिर की संपत्ति को बचाने के लिए न्यायालय की शरण लेने वाले चित्रगुप्त मंदिर समिति न्यास (ट्रस्ट) के अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वाद दाखिल होने के दो माह बाद उन्हें फोन कर वाद वापस लेने की धमकी दी गई है।

चित्रगुप्त मंदिर समिति न्यास के अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा का कहना है कि भीटा की जमीन पर वर्षों से चित्रगुप्त मंदिर स्थापित है। कुछ लोग अपने पूर्वजों के नाम फर्जी पट्टा बनवाकर मंदिर की जमीन को अवैध तरीके से कब्जा करने का प्रयास कर रहे है जबकि भीटा की जमीन का कही कोई पट्टा नही होता है यही वजह है कि  वर्तमान समय सरकारी अभिलेखों में मंदिर की यह भूमि आबादी में दर्ज है। उन्होंने कहा कि कायस्थ समाज के स्वयंभू अगुआ मानने वाले कुछ लोगो द्वारा किये जा रहे अवैध कब्जे और निर्माण के प्रयासों के खिलाफ ट्रस्ट ने  सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में वाद दाखिल किया। जैसे ही मामला न्यायालय पहुंचा, वैसे ही कथित कब्जे के प्रयासों में लगे लोगों की बेचैनी बढ़ गई। पहले समझौते के नाम पर दबाव बनाया गया, फिर संदेश भिजवाए गए और जब बात नहीं बनी तो सीधे धमकी का सहारा लिया गया।ट्रस्ट अध्यक्ष का कहना है कि, सोमवार को उनके मोबाइल पर पडरौना कोतवाली क्षेत्र के बेलवा निवासी सतीश श्रीवास्तव का फोन आया और कहा कि यदि अदालत में दायर मुकदमा वापस नहीं लिया गया तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। नरेंद्र वर्मा का दावा है कि बातचीत का लहजा इतना आक्रामक था कि यह किसी सामान्य बातचीत से अधिक खुली चेतावनी प्रतीत हो रही थी।

बतादे कि यह मामला गंभीर इस लिए हो गया है क्योंकि विवाद किसी निजी संपत्ति का नहीं, बल्कि एक धार्मिक स्थल और उससे जुड़ी भूमि का है। ट्रस्ट का दावा है कि मंदिर परिसर की भूमि पर पिछले लगभग 18 वर्षों से गौशाला संचालित हो रही है और वर्षों से मंदिर का रखरखाव, विकास, सुरक्षा एवं धार्मिक आयोजन ट्रस्ट द्वारा किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद कुछ लोग भगवान श्रीचित्रगुप्त के नाम से मिलता-जुलता एनजीओ बनाकर चिटफंड से रजिस्ट्रेशन कराकर मंदिर की भूमि पर अवैध कब्जा करके काम्प्लेक्स,धर्मशाला और व्यवसायिक प्रतिष्ठान का निर्माण कराने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उनको व्यक्तिगत लाभ प्राप्त हो सके। ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा कि भविष्य मे उनके ऊपर या फिर ट्रस्ट के महासचिव संजय चाणक्य, मंदिर के पीठाधीश्वर अजयश्रीदास महाराज, संयोजक देवेन्द्र प्रताप, कोषाध्यक्ष हरेन्द्र वर्मा सहित किसी भी ट्रस्टी पर कोई आंच या खरोच आती है तो सीधे तौर श्री श्री चित्रगुप्त समिति के संरक्षक, अध्याय, कोषाध्यक्ष व धमकी देने वाले सतीश श्रीवास्तव जिम्मेदार होगें। ट्रस्ट अध्यक्ष को मिली धमकी के बाद ट्रस्ट से जुडे ट्रस्ट्रियो में आक्रोश है। उनका कहना है कि जब मामला न्यायालय में है तो फिर धमकियों और दबाव की राजनीति क्यों की जा रही है? चित्रगुप्त मंदिर समिति न्यास (ट्रस्ट) का आरोप है कि मंदिर की भूमि पर कब्जा करने की मंशा रखने वाले लोग अब कानूनी लड़ाई के बजाय भय का माहौल बनाकर अपने उद्देश्य को पूरा करना चाहते हैं।



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