🔵न्याय की कीमत तय! धाराएं घटाने के नाम पर 50 हजार लेते पकड़ा गया दरोगा
🔴खाकी की नीलामी: 50 हजार की रिश्वत लेते दरोगा को एंटी करप्शन ने दबोचा,मिठाई की दुकान पर खाकी निलाम
🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
महराजगंज। कानून के रखवाले जब खुद कानून को बेचने लगें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाज़मी है।शनिवार को ऐसा ही शर्मनाक नज़ारा तब सामने आया,जब गोरखपुर की एंटी करप्शन इकाई ने महराजगंज कोतवाली में तैनात एक भ्रष्ट उप निरीक्षक को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोचा।एंटी करप्शन की कार्रवाई ने पूरे पुलिस महकमे की कथित ईमानदारी की पोल खोल कर रख दी।
भ्रष्टाचार निवारण संगठन गोरखपुर इकाई के निरीक्षक शिवमनोहर यादव के नेतृत्व में चली यह कार्रवाई किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी। लेकिन यह सिनेमा नहीं, सिस्टम का कड़वा सच था। पवन स्वीट्स की दुकान के सामने जहां आम लोग मिठाई खरीदते हैं वहीं न्याय की कीमत तय हो रही थी। जैसे ही रिश्वत की गड्डी दरोगा की जेब में गई, वैसे ही खाकी की हेकड़ी जमीन पर आ गिरी। पीड़ित सईदुल्लाह पुत्र रियाजुद्दीन, निवासी ग्राम पकड़ी खुर्द, के खिलाफ दर्ज मुकदमे में धाराएं कम करने के नाम पर खुली फिरौती मांगी गई थी पचास हजार दो, वरना कानून का डंडा चलेगा। यह कोई इशारों में बात नहीं थी, बल्कि खुला सौदा, खुली धमकी थी। पीडित ने जब हिम्मत जुटाकर एंटी करप्शन का दरवाज़ा खटखटाया, और शिकायत की पुष्टि के बाद एंटी करप्शन ने जाल बिछाया तो दरोगा जाल में फंस गया, जैसे ही नोट दरोगा की हथेली में पहुंचा, कानून ने उसकी गर्दन दबोच ली।मौके से पूरी रिश्वत की रकम बरामद हुई। यह गिरफ्तारी महज एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस सड़े हुए तंत्र की तस्वीर है, जहां न्थायाय का चौखट थाना, वसूली का केंद्र बनते जा रहे हैं सवाल यह नही है कि एक दरोगा पकड़ा गया बल्कि सवाल यह है कि ऐसे कितने दरोगा रोज़ गरीबों से न्याय की कीमत वसूल रहे हैं? ऐसे में कहना मुनासिब होगा कि जब तक भ्रष्ट खाकी पर बुलडोजर जैसी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक न्याय फाइलों में बंद और रिश्वत नोटों में जिंदा रहेगी।




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