🔴 लूना हॉस्पिटल में इलाज, मौत और भुगतान का गणित, जांच के घेरे में पूरा खेल
🔴मौत के सौदागरों का नया खेल? परिजनों से नकद वसूली, फिर आयुष्मान पर क्लेम का आरोप
🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। जनपद के कसया कस्बे में संचालित लूना अस्पताल में बीते दिनो चिकित्सको की लापरवाही से नर्गिस खातून की हुई मौत के मामले में अब एक नया और गंभीर सवाल सामने आया है। सवाल सिर्फ ऑपरेशन, लापरवाही और इलाज का नहीं, बल्कि तीस हजार रुपये की धनराशि का भी है जो परिजनों से ली गई और बाद में हास्पिटल प्रबंधन द्वारा आयुष्मान भारत योजना के तहत किए गए क्लेम की जानकारी सामने आने के बाद चर्चा का विषय बन गया है।
मृतका के पति मोहम्मद तसनीम कौसर ने जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी एंव उच्चाधिकारियों को दिए गये शिकायती पत्र व बयान में आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी के ऑपरेशन के नाम पर लूना हास्पिटल द्वारा तीस हजार रुपये जमा कराई गई थी। लेकिन नर्गिस के मौत के बाद मृतका के मोबाइल पर आए संदेशों से उन्हें जानकारी हुई कि आयुष्मान भारत योजना के तहत भी पंजीकरण और क्लेम की प्रक्रिया पूरी की गई है।यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।परिजनों का सवाल है कि यदि नर्गिस का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत किया जा रहा था, तो फिर उनसे तीस हजार रुपये अलग से धनराशि क्यों ली गई? और यदि धनराशि ली गई , तो उसका विवरण क्या है? आखिर इलाज किस श्रेणी में किया जा रहा था निजी भुगतान या आयुष्मान योजना के तहत?
🔴एक तरफ मौत का मातम, दूसरी तरफ भुगतान का सवाल
नर्गिस की मौत के बाद परिवार अभी सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि मोबाइल पर आए संदेशों ने उन्हें और चौंका दिया। शिकायतकर्ता का दावा है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना आधार कार्ड और मोबाइल नंबर का उपयोग कर आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत प्रक्रिया पूरी की गई। ऐसे मे यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल चिकित्सकीय लापरवाही व इलाज का अभाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य योजना के क्रियान्वयन और मरीजों से लिए जाने वाले शुल्क की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होंगे।
🔴आखिर पैसा किस बात का लिया गया?
जांच का सबसे अहम बिंदु अब यह भी है कि परिजनों से कितनी धनराशि ली गई?किस मद में ली गई? क्या उसकी रसीद जारी की गई?आयुष्मान योजना के तहत कितना क्लेम किया गया? क्या मरीज और परिजनों को इसकी जानकारी दी गई थी? इन सवालों के जवाब अस्पताल के वित्तीय रिकॉर्ड,आयुष्मान पोर्टल और उपचार से जुड़े दस्तावेजों में छिपे हो सकते हैं।
🔴मौत से बड़ा बनता जा रहा है जवाबदेही का मामला
नर्गिस की मौत ने पहले ही अस्पताल की कार्यप्रणाली व लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए थे। अब आयुष्मान क्लेम और कथित रूप से लिए गए रुपये का मुद्दा सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग के सामने अब केवल यह पता लगाने की चुनौती नहीं है कि नर्गिस की मौत कैसे हुई, बल्कि यह भी देखना होगा कि इलाज और भुगतान की पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
🔴फ्लैशबैक : कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
एक जून 2026 को कसया निवासी नर्गिस खातून को पित्त की थैली में पथरी के ऑपरेशन के लिए लूना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार अगले दिन ऑपरेशन होना था। शिकायत के मुताबिक दो जून की सुबह मरीज को ओटी में ले जाया गया और कुछ देर बाद उसकी हालत गंभीर बताकर दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया गया। बाद में महिला की मौत की पुष्टि हुई। घटना के बाद अस्पताल में हंगामा हुआ, पुलिस पहुंची और परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। अब जिलाधिकारी व सीएमओ को दिए गए बयान में आयुष्मान क्लेम और कथित रूप से लिए गए रुपये का मुद्दा भी सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
🔴साहब! जांच इन विन्दुओ पर भी होनी चाहिए
पूरे मामले में चिकित्सकों की भूमिका की जांच अपनी जगह है, लेकिन उससे बड़ा सवाल अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही का है। अस्पताल में कौन ड्यूटी पर था, किसने मरीज को ओटी में भेजा, किसने रेफर करने का निर्णय लिया, किसने परिजनों को जानकारी दी और किसने आयुष्मान प्रक्रिया पूरी कराई? इन सभी सवालों का जवाब अंततः अस्पताल प्रशासन और प्रबंधन को ही देना होगा। क्योंकि नर्गिस की मौत की जांच सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं रह गई है। यह उस व्यवस्था की जांच बन गई है, जिसमें एक मरीज अस्पताल में भर्ती होती है और कुछ घंटों बाद उसकी मौत हो जाती है और परिजन यह जानने के लिए भटकते रहते हैं कि आखिर हुआ क्या था. घिसा-पीटा सवाल अभी भी वही है कि नर्गिस की मौत कैसे हुई? इसका जवाब तो जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन उससे पहले यक्ष प्रश्न यह है कि "अगर सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ था, तो फिर इतने सवाल क्यों उठ रहे हैं?"
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