बिजली विभाग में 'पावरफुल' लूट! काम बिना पूरा किए डकार गए करोड़ों, अधिशासी अभियंता के ट्रांसफर के बाद भी निकले 70 लाख रुपये

 

🔵खंभे गड़े नहीं, ट्रांसफार्मर लगे नहीं... फिर भी निकल गए करोड़ों रुपये 

🔴सेवरही में बिजली नहीं, भ्रष्टाचार दौड़ रहा है तारों पर!

🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। घर-घर बिजली पहुंचाने वाले विभाग में ही अगर भ्रष्टाचार का हाई-वोल्टेज करंट दौड़ने लगे तो जनता को अंधेरे में रहने से कौन बचाएगा? सेवरही विद्युत वितरण खंड में सामने आए कथित करोड़ों रुपये के महाघोटाला ने पूरे महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि जहां जमीन पर ट्रांसफार्मर नहीं लगे, वहां फाइलों में विकास पूरा दिखा दिया गया और करोड़ों रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। इतना ही नहीं, अधिकारी के स्थानांतरण के बाद भी लाखों रुपये की रकम जारी होने के आरोप हैं। ओटीएस योजना से लेकर बिजनेस प्लान तक, हर फाइल में सवालों का ऐसा जाल दिखाई दे रहा है जिसने ऊर्जा विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।मामला ऊर्जा मंत्री के दरबार तक पहुंच चुका है और पूरे बिजली महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

बेशक ? यह कोई साधारण अनियमितता नहीं, बल्कि सरकारी धन की ऐसी संगठित लूट का आरोप है जिसने पूरे विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है।इस कथित महाघोटाले के केंद्र में तत्कालीन अधिशासी अभियंता अरुण कुमार यादव हैं, जिन पर ठेकेदारों के साथ मिलकर सरकारी धन और राजस्व को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। इनके कार्यकाल की कई फाइलें अब सवालों के घेरे में हैं।

🔴फाइल खुली तो निकलेगा 'भूतिया ट्रांसफार्मर

बिजनेस प्लान 2023-24 के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर क्षेत्र में ट्रांसफार्मर क्षमता वृद्धि और नए ट्रांसफार्मर लगाने की योजना बनाई गई। कागजों में काम पूरा हो गया, भुगतान भी हो गया, लेकिन जब मीडिया ने पडताल किया तो  कई जगह ट्रांसफार्मर के नट-वोल्ट भी नही मिला, ट्रांसफार्मर तो दूर की बात रही। ग्रामीणों को ट्रांसफार्मर नहीं दिखे, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में वे पूरी शान से खड़े है।  सवाल यह है कि जब ट्रांसफार्मर लगा ही नहीं तो माप किसका हुआ? सत्यापन किसने किया? भुगतान किस आधार पर हुआ? और सबसे बड़ा सवाल क्या सरकारी धन को योजनाबद्ध तरीके से ठिकाने लगाया गया?


🔴OTS योजना बनी ‘उगाही योजना’?

गरीब उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गयी ओटीएस योजना भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि योजना के नाम पर उपभोक्ताओं से धन वसूली किया गया और राजस्व के आंकड़ों में ऐसा खेल खेला गया कि सरकार का भी नुकसान हुआ और जनता भी ठगी गई। जिस योजना का उद्देश्य  गरीबो को राहत पहुताना था, वह कथित तौर पर अधिशासी अभियंता अरुण यादव व कारखास लोगों के लिए कमाई का साधन बन गया। 

🔴 जमीन पर ठेंगा, कागजों पर विकास

बिजनेस प्लान 2024-25 को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई कार्य फाइलों में पूरे दिखा दिए गए जबकि धरातल पर उनकी मौजूदगी तलाश पर भी दिखाई नही पड़ रही है। ऐसा प्रतीत होता है मानो विभाग में एक नया फार्मूला चल रहा हो बिना काम कराये सरकारी धन की लूट की होड मची हुई है। मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू वह भुगतान है जो संबंधित अधिकारी के स्थानांतरण के बाद भी जारी रहा। लगभग 70 लाख रुपये का भुगतान आखिर किस हड़बड़ी में किया गया?क्या यह महज संयोग था या फिर किसी बड़े खेल का आखिरी किस्त

🔴 साहब! जवाब चाहिए, सफाई नहीं

विभाग से ताल्लुकात रखने वाले जानकारों का का कहना है कि आरोप सही हैं तो यह सनसनीखेज मामला सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि जनता की जेब पर डाका और सरकारी व्यवस्था के मुंह पर तमाचा है।ऐसे मे सवाल ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन और शासन से लाजमी है क्या इस गंभीर प्रकरण की निष्पक्ष जांच होगी? क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? क्या सरकारी धन की रिकवरी होगी? या फिर करोड़ों रुपये का यह कथित खेल भी अन्य फाइलों की तरह टेबल पर धूल फांकता रह जाएगा?क्योंकि यहा करोडो रुपये सरकारी खजाने से गायब हुई है  जवाबदेही गायब हुई है जो योगी सरकार की ईमानदारी की प्रतिष्ठा बनी हुई है।

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य



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