कसया थाने की नाक के नीचे पनपता रहा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, अब जवाबदेही किसकी?

 

🔵453 नेपाली युवाओं की बरामदगी के बाद बड़ा सवाल, क्या सो रही थी कसया पुलिस ?

🔴कसया में चार महीने तक सजा रहा ठगी का दरबार, पुलिस को भनक तक नहीं

🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। यह कैसी विडम्बना है कि पडोसी राष्ट्र नेपाल सीमा से सटे कुशीनगर जनपद के कसया कस्बे में चार महीने तक कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क अपना जाल बुनता रहा। सैकड़ों नेपाली युवक-युवतियां कसया में रहकर प्रशिक्षण लेते रहे। किराये के मकान भरे रहे। करोड़ों रुपये का खेल चलता रहा। स्थानीय स्तर पर चर्चा-ए-सरेआम होती रहीं। लेकिन कसया पुलिस , खुफिया विभाग  और जिम्मेदार लोगो को इसकी भनक तक नहीं लगी। हैरानी की बात यह है कि जिस नेटवर्क का सुराग कुशीनगर पुलिस नहीं खोज सकी, उसकी जानकारी नेपाल दूतावास तक पहुंच गई। दूतावास की सूचना पर हुई कार्रवाई में 453 नेपाली युवक-युवतियों की बरामदगी ने न सिर्फ एक कथित ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, बल्कि जिले के पूरे निगरानी तंत्र को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।

बेशक! अगर नेपाल दूतावास की सूचना न आती तो शायद कुशीनगर में चल रहा यह कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क आज भी बेरोजगार युवाओं के सपनों का सौदा कर रहा होता। सबब यह है चार महीने तक सैकड़ों नेपाली युवक-युवतियां कसया में डेरा डाले रहे, करोड़ों का खेल चलता रहा और पूरा सिस्टम आंख मूंदे बैठा रहा।" नेपाल दूतावास की सूचना पर जब बीते शनिवार को पुलिस ने छापेमारी की तो 453 नेपाली युवक-युवतियां बरामद हुईं। इस कार्रवाई ने जितने सवाल ठगी गिरोह पर खड़े किए हैं, उससे कहीं अधिक सवाल जिले के सुरक्षा और निगरानी तंत्र पर खड़े कर दिए हैं।


🔴आखिर चार महीने तक सोता रहा सिस्टम?

सूत्रो की माने तो फरवरी 2026 से कसया के सपहा रोड पर दो बड़े प्रशिक्षण केंद्र संचालित हो रहे थे। सैकड़ों नेपाली युवक-युवतियां वहां पहुंच रही थीं। आठ से दस किराये के मकानों में उनका रहना-खाना चल रहा था। प्रतिदिन बैठकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम और भीड़भाड़ होती थी।स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में नेपाली युवाओं की संख्या अचानक इतनी बढ़ गई थी कि यह चर्चा का विषय बन गया था। फिर भी न स्थानीय पुलिस ने कोई पड़ताल की, न एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) सक्रिय हुई और न ही किसी अन्य एजेंसी ने यह जानने की कोशिश की कि आखिर कसया में यह सब चल क्या रहा है। बावजूद इसके जिम्मेदारो से कोई हिसाब - किताब नही लिया गया। 

🔴453 विदेशी नागरिक और किसी को खबर नहीं!

जानकारो का कहना है कि यह कोई छोटा आंकड़ा नहीं है। 453 विदेशी नागरिक किसी गांव या कस्बे में चार महीने तक रहें और प्रशासन को इसकी जानकारी न हो, यह अपने आप में गंभीर मामला है।आखिर उनके दस्तावेजों का सत्यापन किसने किया? अगर सत्यापन नही किया गया तो क्यो नही किया गया? क्या स्थानीय थाने को इसकी सूचना दी गई थी? क्या स्थानीय पुलिस ने इतनी बडी तादाद में नेपाली युवक-युवतियो के जमावड़े के बारे मे कभी जानने या पूछताछ करने की जहमत उठायी  थी? यदि नही तो फिर क्यो नही? क्या मकान मालिकों ने किरायेदारों की जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराई थी?

🔴सिर्फ गिरोह नहीं, सिस्टम की भी होनी चाहिए जांच 

पुलिस ने नौ  नेपाली नागरिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सलाखों के पीछे भेज अपनी कार्रवाई पूरी कर ली है, लेकिन क्या केवल गिरफ्तारियां ही पर्याप्त हैं?जिस जिले में चार महीने तक कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क चलता रहा, वहां यह भी जांच होनी चाहिए कि आखिर निगरानी तंत्र कहां था। स्थानीय पुलिस क्या कर रही थी? यदि नेपाल दूतावास की सूचना के बाद ही कार्रवाई संभव हुई, तो यह स्थानीय सूचना तंत्र व पुलिस की बड़ी विफलता मानी जाएगी। 

🔴यह बरामदगी नहीं, सिस्टम की पोल खुलने की कहानी है

कसया से 453 युवाओं की बरामदगी सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है जो दावा तो सुरक्षा और निगरानी की करती है, लेकिन चार महीने तक अपने ही इलाके में चल रहे एक बड़े नेटवर्क को देख नही पायी।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस गतिविधि की जानकारी नेपाल दूतावास तक पहुंच गई, वह कुशीनगर के जिम्मेदार तंत्र की नजर से कैसे ओझल रही?क्या जिले की खुफिया व्यवस्था पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है?क्या विदेशी नागरिकों की मौजूदगी और गतिविधियों की निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है? या फिर मामला कुछ ऐसा है जिसे देखने के बावजूद अनदेखा किया गया? कहना ना होगा कि कुशीनगर नेपाल सीमा से जुड़ा संवेदनशील जिला है। यहां विदेशी नागरिकों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखने की व्यवस्था है। एलआईयू, पुलिस, खुफिया एजेंसियां और अन्य विभाग लगातार सूचनाएं जुटाने का दावा करते हैं।लेकिन कसया प्रकरण ने इन सभी दावों की हवा निकाल दी है। सवाल वही घिसा-पीटा हैं कि जब सैकड़ों विदेशी नागरिक महीनों तक एक ही इलाके में रह रहे थे, तब खुफिया रिपोर्टों में इसका उल्लेख क्यों नहीं हुआ?

🔴नेपाल दूतावास की शिकायत

बतादे कि नेपाल दूतावास को शिकायत मिली थी कि कुशीनगर जनपद में बड़ी संख्या में नेपाली नागरिकों को कथित चेन मार्केटिंग सिंडिकेट एवं ऑनलाइन ठगी से जुड़ी गतिविधियों में जबरन शामिल किया गया है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि कुछ लोगों को अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया तथा उनके मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। दूतावास ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय अधिकारियों से हस्तक्षेप कर संबंधित व्यक्तियों को मुक्त कराने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। कसया थाना क्षेत्र में संचालित नेटवर्क मार्केटिंग गतिविधियों को लेकर कई लोगों ने पुलिस से शिकायत की थी। आरोप था कि बेरोजगार युवाओं को नौकरी और अधिक आय का लालच देकर नेटवर्क से जोड़ा गया तथा उनसे धनराशि जमा कराई गई। बाद में निवेश की गई रकम वापस नहीं मिलने पर पीड़ितों ने शिकायत की।

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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