बुद्धा पार्क मे पांच करोड के निमार्ण मे भ्रष्टाचार की ' बु ', मामला पहुंचा शासन मे - Yugandhar Times

Breaking

Tuesday, March 24, 2026

बुद्धा पार्क मे पांच करोड के निमार्ण मे भ्रष्टाचार की ' बु ', मामला पहुंचा शासन मे

 

🔵भ्रष्टाचार अन्वेषण एंव मानवाधिकार परिषद ने मुख्यमंत्री पोर्टल व प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन को भेजा मामले की शिकायत 

🔴 कागज़ों में क्लीन-चिट, जमीन पर सवाल पांच करोड़ का मामला शासन तक

🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। कलेक्ट्रेट परिसर के सामने बुद्धा पार्क में लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत से चल रहे निर्माण कार्य का मामला अब जिला स्तर से निकलकर शासन तक पहुंच गया है। भ्रष्टाचार अन्वेषण एवं मानवाधिकार परिषद ने इस पूरे प्रकरण में कथित अनियमितताओं और मानकों की अनदेखी को लेकर शिकायत दर्ज कराते हुए मामले की उच्चस्तरीय व स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।परिषद की ओर से यह शिकायत सीधे मुख्यमंत्री पोर्टल और प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन संजय प्रसाद को भेजी गई है, जिसमें निर्माण कार्य से जुड़े कई गंभीर बिंदुओं को उठाया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता का अभाव है और मौके पर कई अनिवार्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं पाए गए।

बेशक! मुख्यमंत्री पोर्टल व प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन को भेजे गये शिकायत मे जो तस्वीर सामने आई है, वह चौंकाने वाली है।निर्माण स्थल पर न सूचना पट्ट लगा है, न स्वीकृत नक्शा व  डीपीआर उपलब्ध है।  इसके अलावा साइट माप रजिस्टर (एमबी), क्वालिटी कंट्रोल रजिस्टर, सामग्री परीक्षण रिपोर्ट, खरीद रजिस्टर, साइट ऑर्डर बुक, सुरक्षा एवं अनुपालन रजिस्टर आदि दस्तावेज भी  मौके पर नदारत मिले, जिनके बिना किसी भी सरकारी कार्य की निगरानी और भुगतान प्रक्रिया अधूरी मानी जाती है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब रिकॉर्ड ही मौके पर उपलब्ध नहीं, तो काम की गुणवत्ता का प्रमाण आखिर किस आधार पर दिया जा रहा है?


🔴पांच करोड़ का काम, सुपरवाइजर के भरोसे

शिकायत में यह भी आरोप है कि पूरे निर्माण की निगरानी मुख्य रूप से कार्यदायी संस्था के सुपरवाइजर के भरोसे चल रही है। विभागीय अभियंताओं की सक्रिय मौजूदगी और नियमित मॉनिटरिंग स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती। तकनीकी जानकारों के अनुसार, इतनी बड़ी परियोजना में यदि इंजीनियरिंग सुपरविजन कमजोर हो, तो गुणवत्ता से समझौता होना तय माना जाता है।

🔴नोटिस बनाम स्पष्टीकरण 

कहना ना होगा कि मीडिया द्वारा इस प्रकरण को प्रमुखता से उठाने के बाद जिलाधिकारी ने नोटिस जारी किया, जवाब लिया गया और विभागीय स्तर पर कार्य को “मानक के अनुरूप” बताकर मामले खत्म कर दिया गया। लेकिन बिना स्वतंत्र जांच, बिना थर्ड-पार्टी ऑडिट और बिना तकनीकी सत्यापन के यदि किसी निर्माण को क्लीन-चिट दे दी जाती है, तो यह प्रक्रिया खुद सवालों के घेरे में आ जाती है। यह मामला उसी सवालो के घेरे में है।


🔴अब शासन की बारी, निचले स्तर पर बढ़ी जवाबदेही

जानकारों की माने तो मुख्यमंत्री पोर्टल और प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री  संजय प्रसाद के पास शिकायत पहुंचने के बाद अब यह मामला उच्च स्तर पर समीक्षा के दायरे में आ जायेगा। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो स्वतंत्र तकनीकी जांच की संभावना, भुगतान की समीक्षा, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होना जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। मजे की बात यह है कि यह पूरा मामला जिले के प्रशासनिक केंद्र कलेक्ट्रेट के सामने का है। ऐसे मे यहां उठे सवालों का समाधान सिर्फ कागजी प्रक्रिया तक सीमित रहता है, तो यह व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर डाल सकता है। अब सवाल यह उठता है कि यह मामला शासन स्तर पर पहुचने के बाद क्या पांच करोड़ की परियोजना की स्वतंत्र जांच होगी?क्या मौके पर गायब दस्तावेजों की जिम्मेदारी तय होगी? क्या तकनीकी अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा होगी? जब तक इन सवालों का जवाब नहीं सार्वजनिक नही होता है , तब तक बुद्धा पार्क का यह निर्माण एक सामान्य विकास कार्य नहीं, बल्कि विभाग व कार्यदायी संस्था के जवाबदेही की परीक्षा बना रहेगा।

🔵रिपोर्ट - संजय चाणक्य


 

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad

Responsive Ads Here