बुद्धा पार्क में पांच करोड़ के निर्माण कार्य पर उठे पारदर्शिता के सवाल - Yugandhar Times

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Thursday, February 19, 2026

बुद्धा पार्क में पांच करोड़ के निर्माण कार्य पर उठे पारदर्शिता के सवाल

 

🔵क्या दफन हो जायेगा नोटिस की ओट में पांच करोड़ रुपये के निर्माण की गुणवत्ता व मानक पर उठ रहे सवाल?

🔴क्या पांच करोड की परियोजना का सच सिर्फ स्पष्टीकरण से होगा तय होगा?

🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। जिला मुख्यालय रवीन्द्रनगर स्थित कलेक्ट्रेट के ठीक सामने बुद्धा पार्क में लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत से चल रहे निर्माण कार्य पर उठे गंभीर सवालों का जिस प्रकार औपचारिक स्तर पर निस्तारण किया गया, उसने पारदर्शिता और जवाबदेही के दावों की साख पर गहरी चोट की है। मीडिया में गुणवत्ता, मानक और निगरानी को लेकर गंभीर आरोप सामने आए पर जिलाधिकारी ने नोटिस जारी किया, कार्यदायी संस्था के अधिशासी अभियंता ने स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया और इसके साथ ही प्रकरण को लगभग समाप्त मान लिया गया। किन्तु सवाल यह है कि क्या सार्वजनिक धन से जुड़ी इतनी बड़ी परियोजना का सच महज विभागीय स्पष्टीकरण से सच साबित हो जायेगा? क्या बिना स्वतंत्र तकनीकी जांच और पारदर्शी परीक्षण के किसी भी निर्माण को ‘मानक के अनुरूप’ घोषित कर देना पर्याप्त प्रशासनिक प्रक्रिया माना जा सकता है?कलेक्ट्रेट के दहलीज के सामने करोडो की लागत से कराये गये निर्माण अब उस व्यवस्था की विश्वसनीयता की परीक्षा बन गया है जो पारदर्शिता का दावा कर रही है?

बतादे कि बुद्धा पार्क स्थल कलेक्ट्रेट के सामने व मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय और अन्य विभागीय दफ्तरों से सटा हुआ है। यह क्षेत्र प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। विशेषज्ञो का कहना है कि इस स्थान पर हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और मानकों को लेकर संदेह पैदा हो रहा है और उसका समाधान सिर्फ कार्यदायी संस्था यूपीआरएनएस के अधिशासी अभियंता के स्पष्टीकरण तक सीमित है, तो यह व्यापक निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न उठना स्वभाविक है।

🔴जांच या कोरमपूर्ति ?

जानकारो की माने तो तकरीबन पांच करोड़ रुपये की परियोजना, वह भी प्रशासनिक मुख्यालय के सामने, यदि आरोपों के घेरे में हो तो सामान्यतः अपेक्षा की जाती है कि स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए, निर्माण सामग्री की लैब रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए,माप-पुस्तिका (एमबी) और भुगतान विवरण की समीक्षा हो,इसके अलावा थर्ड-पार्टी ऑडिट कराया जाए।अब तक ऐसी किसी स्वतंत्र जांच की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कार्रवाई केवल औपचारिकता निभाने तक सीमित रही? अभियंता का तर्क है“कार्य मानक के अनुरूप है।”लेकिन सवाल यह है मानक की पुष्टि किसने की? क्या किसी स्वतंत्र एजेंसी ने गुणवत्ता परीक्षण किया?क्या सैंपल की लैब रिपोर्ट सार्वजनिक की गई?क्या माप-पुस्तिका का सत्यापन कराया गया?जब जांच का आधार सिर्फ वही विभाग हो जिस पर आरोप लगा है, तो निष्पक्षता पर सवाल उठना लाज़मी हैं। 

🔴 बोले विधि विशेषज्ञ

विधि विशेषज्ञों के अनुसार, सार्वजनिक धन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता केवल दावा नहीं, बल्कि दस्तावेजी प्रमाण और स्वतंत्र सत्यापन होती है। विधि विशेषज्ञो का कहना है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में पारदर्शिता केवल दावा नहीं, बल्कि प्रक्रिया के  तहत स्वतंत्र एजेंसी द्वारा विन्दुवार व निष्पक्ष जांच से सिद्ध होती है। निर्माण कार्य के गुणवत्ता व मानक पर उठे सवालो के बाद अगर इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही के सिद्धांत से विपरीत है।

नोट - अगले अंक में पढे इस खबर का ग्राउण्ड रिपोर्ट

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य



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