🔵इलाज नहीं, इंजेक्शन के नाम पर धनउगाही, वायरल वीडियो ने खोली स्वास्थ्य विभाग की पोल
🔴मुफ्त दवा बनी कमाई का धंधा, कप्तानगंज सीएचसी का काला खेल कैमरे में कैद
🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। जहां अस्पतालों में जिन्दगी बचाने की शपथ ली जाती है, वहीं अगर इलाज के नाम पर मजबूरी का सौदा होने लगे तो यह सिर्फ अनियमितता नहीं, मानवता पर खुला प्रहार और जघन्य अपराध है। कुशीनगर के कप्तानगंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का सामने आया वायरल वीडियो इस सच्चाई को उजागर कर रहा है, जहां सरकारी दवा पर ‘नॉट फॉर सेल’ लिखे शब्द, लालच के आगे बौना साबित हो रहा है। कहना ना होगा कि वायरल वीडियो स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि सरकारी छत के नीचे चल रही वसूली की फैक्ट्री को बेनकाब कर रहा है। ‘नॉट फॉर सेल’ लिखे इंजेक्शन को बेचकर मरीजों के परिजनों से हजारों रुपये ऐंठना इस बात का सबूत है कि यहां बीमारी से नहीं, व्यवस्था की भूख से मौत का खतरा ज्यादा है। यह वीडियो केवल कुछ चेहरों की नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम की असली तस्वीर है जिसने गरीबो की मजबूरी को कमाई का जरिया बना लिया है।
चर्चा-ए-सरेआम है कि कप्तानगंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मुफ्त मिलने वाली जीवनरक्षक दवाओं और इंजेक्शन को निजी माल बताकर बेचा जा रहा है, जबकि उन पर साफ शब्दों मे नाट फार सेल लिखा है। वायरल वीडियो में परिजन खुलेआम पैसे देने व नर्स पैसा लेने की बात स्वीकार करते दिख रही हैं, मामला अब तूल पकड़ लिया है। गंभीर आरोप यह है कि यह धन उगाही का खेल प्रभारी चिकित्साधिकारी के संरक्षण में फल-फूल रहा है। सूत्रों के मुताबिक बिना उच्च स्तर की मिलीभगत के सरकारी अस्पताल में इस तरह का संगठित खेल संभव नहीं है। यही कारण है कि अब सवाल सिर्फ स्टाफ नर्सों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था कटघरे में खड़ी है।
🔴 इलाज नहीं, डर का कारोबारस्थानीय लोगों का कहना है कि गरीब मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर हास्पिटल स्टाफ द्वारा लूटा जा रहा है। “इलाज के नाम पर डर दिखाया जाता है, कहा जाता है कि इंजेक्शन नहीं लगा तो जान को खतरा है,”सूत्र बताते है कि मरीज के परिजनों से यह कहा गया कि अगर यह इंजेक्शन नहीं लगाया गया तो जान बचना मुश्किल हो जायेगा, जिससे खौफजादा परिजन जेब ढीली करने और अस्पताल के अंदर खुलेआम लूट का शिकार बनने के लिए मजबूर हैं। सवाल यह है कि क्या गरीब की जान की कीमत अब 3500 रुपये तय कर दी गई है?
🔴संरक्षण के बिना संभव नहीं यह खेल
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यह धन उगाही का संगठित खेल प्रभारी चिकित्साधिकारी के संरक्षण में चल रहा है। बिना उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के सरकारी दवाओं का इस तरह से अवैध बिक्री संभव नहीं है यही वजह है कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद भी विभागीय चुप्पी लोगों को और अधिक संदेह में डाल रही है।
🔴 स्वास्थ्य विभाग की साख कटघरे में
बतादे कि वीडियो वायरल होने के बाद भी अभी तक न तो नर्स व चिकित्सक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया, न ही नर्स व स्टाफकर्मियो को निलंबित किया गया और न ही जिम्मेदारों पर ही कोई कार्रवाई हुई। ऐसे मे कहना लाजमी होगा कि स्वास्थ्य विभाग खुद अपने ही सिस्टम की सड़ांध ढकने में लगा है जबकि वायरल वीडियो कप्तानगंज सीएचसी व्यवस्था की पोल खोल रहा है।
🔴 क्या है मामला
जिले के नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के नेवार छपरा निवासी ज्योति पाण्डेय पत्नी अभिषेक पाण्डेय प्रसव पीडा से ग्रसित थी जिन्हे परिजनों ने 21 जनवरी को कप्तानगंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया था। परिजनों के मुताबिक हास्पिटल की स्टाफ नर्स ने कहा कि चार हजार रुपये का एक इंजेक्शन लगाना है यह बहुत जरूरी है लेकर आये। बाहर वह इंजेक्शन नही मिलने पर स्टाफ नर्स ने 3500 रुपये मे वह इंग्जेशन अपने पास से लगाने की बात कही, इस पर हम लोग राजी हो गये इसके बाद स्टाफ नर्स ने 3500 रुपये लेकर "नाट फार सेल" वाला इंग्जेशन लगा दिया जब हम लोगो ने नाट फार सेल वाले इंग्जेशन का विरोध किया तो हो-हल्ला शुरू हो गया। परिजनों ने सीएचसी पर तैनात चिकित्सक नीरज गुप्ता, स्टाफ नर्स मीरा राय व शीला पर पैसा लेने का आरोप लगाया है।
🔴 फोन कटता रहा, जवाब नहीं आया
कप्तानगंजसीएचसी के एमवाईसी सूरजभान कुशवाहा का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर बार-बार संपर्क साधा गया, लेकिन उनके द्वारा हर कॉल बीच में ही काट दी गई। देर शाम तक न तो फोन उठाने की ज़हमत उठाई गई और न ही कोई कॉल बैक आया। खबर लिखे जाने तक उनकी चुप्पी बरकरार रही, जिसने इस पूरे प्रकरण पर संदेह की सुई और तेज कर दी।”





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