जिले मे नही है बालू का ठेका, फिर भी हो रहा है खनन

 

🔴 विभाग और पुलिस की मिलीभगत से हो अवैध बालू खनन  

🔵कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कोरमपूर्ति, माफियाओ पर शिकंजा कसने मे प्रशासन नाकाम 

🔴 बाल  माफिया मस्त, प्रशासन पस्त 

🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर । खनन विभाग और स्थानीय पुलिस की संरक्षण में सफेद बालू खनन का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। प्रशासन द्वारा कार्रवाई के नाम पर सिर्फ माफियाओ की नावें तोड़ी जा रही हैं। खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने मे प्रशासन पुरी बौना बना हुआ है। यही वजह है कि जिले में करीब बीस नदी के घाटों पर बदस्तूर बालू का अवैध खनन हो रहा है, जबकि एक भी बालू घाट का ठेका नहीं है। पूर्व में बरवापट्टी एसओ और सिपाही बालू खनन कराने के आरोप में निलंबित भी हो चुके हैं। कुंभकर्णी निद्रा मे सोये खनन विभाग का दावा है कि अवैध खनन की जानकारी होने पर कार्रवाई की जाती है।

जिले के कप्तानगंज तहसील क्षेत्र में छोटी गंडक नदी में खोटही, हरदी छपरा, बालाछत्तर, पगार मुरलीछपरा, सुअरहा, बड़हरा लक्ष्मीपुर, टेढ़िया, मदरहवा, बभनौली, सेमरा, भूतहिया, कोटिया, बालाछत्तर, मिश्रौली, मलुकही, अथरहा सहित कई घाटों पर अवैध रूप से बालू खनन किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो कुछ घाटों पर रात में तो कुछ घाटों पर दिन के उजाले में नदी से बालू निकाला जा रहा है और फिर दिन के उजाले में पहले तय स्थान पर पहुंचा दिया जाता है। इसी तरह हाटा तहसील क्षेत्र के लालीपार, स्वांगीपट्टी, पिपरा, दुबौली, गड़ेरीपट्टी, मुड़िला हरपुर, रगड़गंज, अकटहां में गंडक नदी के घाटों पर अवैध तरीके से बेखौफ दिन में बालू खनन किया जाता है। बालू खनन से जहां प्रति माह लाखो रुपये राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं नदी के किनारे किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन ऊसर होती जा रही है। 


अवैध बालू खनन की शिकायत क्षेत्रीय लोग दर्जनों बार कर चुके हैं, लेकिन अभी तक माफियाओ पर कोई कार्रवाई नही हुई है। कोरमपूर्ति के तौर पर प्रशासन ने दो माह पूर्व फरदहां, रगड़गंज, सुअरहा, अकटहां के बालू घाटों पर पहुंचकर नावों को तोड़वाया था और बाहर निकाले गए बालू को नदी में फेंकवा दिया था। सूत्रों का कहना है कि बरवापट्टी थाना क्षेत्र के धोकरहा घाट, बरवापट्टी घाट, जमुआन घाट और किशुनवा घाट पर पुलिस की मिलीभगत से गंडक नदी में बालू माफिया अवैध रूप से बालू खनन कर रहे है। कहना न होगा कि मई माह में एक बालू तस्कर और पुलिस के बीच तय रकम के लेन देन को लेकर हुई बातचीत की रिकार्डिंग सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। पुलिस अधीक्षक ने इसको संज्ञान से लेते हुए मामले की गंभीरता से जांच करायी, जांच मे खनन माफियाओं से मिलीभगत की पुष्टि होने पर तत्कालीन एसओ सुरेशचंद्र राव और सिपाही मंगेश चौहान निलंबित कर दिया था। बताया जाता है कि इन दिनों बालू माफिया फिर सक्रिय हो गये है। नतीजतन बालू खनन का अवैध कारोबार जोरो पर चल रहा है। कसया के बैदौली निवासी मुन्ना निषाद की बीते माह  महुआडीह घाट पर रात को बालू खनन करते समय बालू के अड़ार में दबकर मौत हो गई थी। इसकी वजह से कुछ दिनो तक बालू खनन बंद रहा, लेकिन इन दिनों बालू खनन फिर जोर पकड़ा है। इस घाट पर रात को बालू का खनन होता है। रात में ही डीसीएम से बालू को तय स्थानों पर पहुंचा दिया जाता है। 

🔴माफियाओं के हैं लंबे हाथ

बेशक! बालू माफियाओं की ऊंची पहुच और विभागीय संरक्षण के कारण अधिकारी इन अवैध कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से कतराते हैं। जानकार बताते है कि जब मामला फसता  है या फिर हाई-प्रोफाइल होता है तो अधिकारी कार्रवाई के नाम पर जुर्माना लगाकर बडी आसानी से खनन माफियाओं को बचा लेते है। एक माह के अंदर खनन विभाग और कप्तानगंज तहसील प्रशासन की ओर से 20 हजार से अधिक जुर्माना सफेद बालू लदे वाहनों पर लगाया है, लेकिन बालू माफियाओ पर कोई कार्रवाई नहीं किया गया है और न ही उन्हें चिह्नित करने का प्रयास किया जाता है।  खनन अधिकारी का दावा है कि जिले में बालू खनन घाट का एक भी ठेका नहीं है और सफेद बालू खनन पर रोक लगी है। खनन अधिकारी का कहना है कि बड़ी गंडक नदी या छोटी गंडक व बांसी नदी में अवैध बालू खनन की सूचना मिलने पर बालू घाटों पर छापा मारा जाता है। नावों को तोड़ दिया जाता है और खनन सामग्री को कब्जे में ले लिया जाता है। बालू लदे वाहनोंं को थाने के सुपुर्द कर जुर्माना लगाया जाता है।


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