कागज गायब, इंजीनियर नदारद! मोतीचक में ठेकेदारों के भरोसे करोड़ों का निर्माण - Yugandhar Times

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Friday, March 13, 2026

कागज गायब, इंजीनियर नदारद! मोतीचक में ठेकेदारों के भरोसे करोड़ों का निर्माण

 

🔴“बिना सूचना पट्ट शुरू हुआ निर्माण, घटिया सामग्री का खेल! पीडब्ल्यूडी की कार्यशैली पर उठे सवाल”

🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। जनपद के मोतीचक विकास खण्ड क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग द्वारा कराए जा रहे सड़क और पुल निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता उजागर हो रही है। हैरत की बात यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से कराए जा रहे इन निर्माण कार्यों में विभाग द्वारा अनिवार्य साइन बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं। बिना सूचना पट्ट के ही निर्माण कार्य शुरू कर दिए गए हैं, जिससे कार्य की लागत, निर्माण अवधि, ठेकेदार और तकनीकी अधिकारियों की जानकारी पूरी तरह गायब है। इससे निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बताया जाता है कि मोतीचक क्षेत्र में करीब आधा दर्जन स्थानों पर पीच सड़क और पुल निर्माण का कार्य चल रहा है, लेकिन अधिकांश  जगहों पर विभागीय इंजीनियरों की मौजूदगी नहीं रहती। ऐसे में ठेकेदार अपनी मर्जी से निर्माण करा रहे हैं और गुणवत्ता मानकों की खुलकर अनदेखी की जा रही है।नगर पंचायत मथौली के वार्ड नंबर 16 लोहेपार में करीब एक किलोमीटर लंबी पीच सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। आरोप है कि संबंधित जेई केवल एक दिन निरीक्षण करने आए थे, उसके बाद से निर्माण स्थल पर विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नजर नहीं आया। इस बीच ठेकेदार द्वारा बिना किसी तकनीकी निगरानी के सड़क निर्माण कराया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।इसी तरह मथौली से रगड़गंज जाने वाले मार्ग पर लक्ष्मीपुर माइनर पर बन रहे पुल में रेत व घटिया बालू के इस्तेमाल की शिकायत सामने आई है। वहीं मां चेड़ा देवी मंदिर के पास पचार में माइनर पर बन रहे पुल में बेहद निम्न स्तर की सरिया लगाए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। इन दोनों निर्माण स्थलों पर भी विभाग की ओर से कोई साइन बोर्ड नहीं लगाया गया है, जो नियमों की खुली अनदेखी मानी जा रही है।


लोहेपार में बन रही पीच सड़क के निर्माण में भी घटिया गिट्टी और बजरी के इस्तेमाल की बात सामने आ रही है। सड़क के दोनों किनारों पर भरी गई मिट्टी रोलर चलने के बाद ही जगह-जगह दरकने लगी है, जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।इतना ही नहीं, सड़क के बीच में एक पोखरी है, लेकिन वहां पानी निकासी के लिए मजबूत आधार तैयार करने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में पोखरी का पानी भरते ही यह सड़क कुछ ही दिनों में ध्वस्त हो सकती है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि लाखों रुपये की इन परियोजनाओं में विभागीय मिलीभगत से भारी गोलमाल किया जा रहा है और निर्माण कार्यों को जल्दबाजी में निपटाने की कोशिश हो रही है। लोगों ने पीडब्ल्यूडी के उच्चाधिकारियों से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। इस मामले में मोतीचक के जेई संजीव श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया को बयान देने का अधिकार नहीं है और इसके लिए उच्च अधिकारियों से संपर्क करे। इसके बाद एक्सियन पीडब्ल्यूडी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।


🔴मार्च क्लोजिंग :आनन-फानन हो रहा निर्माण, उठ रहे सवाल

वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना मार्च सरकारी विभागों में बजट क्लोजिंग का समय होता है। ऐसे में मोतीचक क्षेत्र में एक साथ कई सड़कों और पुलों का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि मार्च क्लोजिंग में अक्सर बजट खपाने के लिए आनन-फानन में निर्माण कार्य शुरू कर दिए जाते हैं, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होती है और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ जाती है।ग्रामीणों ने मांग की है कि इन सभी निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और गुणवत्ता मानकों के अनुसार निर्माण सुनिश्चित कराया जाए, ताकि जनता के पैसे से बनने वाली सड़कें टिकाऊ और सुरक्षित हो सकें।


🔴पांच करोड़ की परियोजना भी सवालों के घेरे में, जिम्मेदार बने धृतराष्ट्र

मोतीचक क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी के निर्माण कार्यों में अनियमितताओं के आरोपों के बीच इससे पहले जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट के सामने बुद्धा पार्क में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से कराए गए निर्माण कार्य भी सवालों के घेरे में आ चुके हैं। यहां व्यायामशाला, कार्यालय कक्ष, गोदाम, शौचालय और पाथ-वे (पार्थ बे) के निर्माण में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी धृतराष्ट्र की तरह आंखें मूंदे बैठे रहे। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े बजट की इस परियोजना के निर्माण स्थल पर भी जरूरी दस्तावेजों का अभाव पाया गया। मौके पर सूचना पट्ट, स्वीकृत नक्शा, डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट), साइट माप रजिस्टर (एमबी), क्वालिटी कंट्रोल रजिस्टर, सामग्री परीक्षण रिपोर्ट, सामग्री खरीदारी रजिस्टर, साइट ऑर्डर बुक, विजिट रजिस्टर, ठेकेदार व सुपरवाइजर डिटेल रजिस्टर, कार्य कार्यक्रम/समय सारिणी रजिस्टर तथा सुरक्षा एवं अनुपालन से जुड़े जरूरी अभिलेख उपलब्ध नहीं मिले।जानकार बताते हैं कि इन सभी दस्तावेजों का निर्माण स्थल पर उपलब्ध रहना न केवल पारदर्शिता बल्कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बावजूद इनका अभाव यह संकेत देता है कि नियमों को ताक पर रखकर कार्य कराया गया।सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि करीब पांच करोड़ रुपये की इस बड़ी परियोजना का निर्माण कार्य भी अधिकांश समय ठेकेदार के सुपरवाइजर के भरोसे ही चलता रहा, जबकि विभागीय इंजीनियरों की मौजूदगी बेहद कम देखने को मिली। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता और खर्च हुए सरकारी धन पर सवाल उठना लाजिमी है।

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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