सरकारी दवा पर ‘धंधा’, पकड़े गए तो ‘ड्रामा’, कप्तानगंज के स्वास्थ्य विभाग का शर्मनाक चेहरा बेनकाब - Yugandhar Times

Breaking

Saturday, January 31, 2026

सरकारी दवा पर ‘धंधा’, पकड़े गए तो ‘ड्रामा’, कप्तानगंज के स्वास्थ्य विभाग का शर्मनाक चेहरा बेनकाब

🔵दवा गरीब की, कमाई कर्मचारियों की  कुशीनगर में सिस्टम बेनकाब

🔴सेवा की जगह सौदा, सरकारी अस्पताल में शर्मनाक सच

🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। “नॉट फॉर सेल” लिखी दवाओं पर खुलेआम ‘सेल’ का खेल करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की कुकृत्य का सच जब कैमरे में कैद हो गया तो आरोपियों ने पश्चाताप नहीं, बल्कि पलटवार का रास्ता चुन लिया है । इनके द्वारा पीड़ित को ही कटघरे में खड़ा कर खुद को बेगुनाह बताने की कोशिश यह साबित करती है कि यह भूल नहीं, बल्कि बाकायदा चल रहा पेशेवर धंधा है। सवाल यह है कि क्या सरकारी अस्पताल अब सेवा केंद्र नहीं, वसूली केंद्र बन रहा हैं?

कहना ना होगा कि मीडिया ने जब इस काले कारनामे की परतें उधेड़ीं, तो उम्मीद थी कि कप्तानगंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के जिम्मेदार निर्लज्जता को त्यागकर शर्म से सिर झुकाएंगे। लेकिन यहां तो बेशर्मी ने सारी हदें तोड़ दीं। आरोपियों ने उल्टे कप्तानगंज थाने में तहरीर देकर यह राग अलापना शुरू कर दिया कि “सरकारी कार्य में बाधा” डाली गई। ऐसे मे यक्ष प्रश्न यह है कि क्या मुफ्त दवा, बेचना ही सरकारी कार्य है? क्या गरीब मरीजो को डरा-धमकाकर पैसा वसूलना सरकारी कार्य है? और क्या भ्रष्टाचार उजागर करना अपराध की श्रेणी में आ गया है?

पुलिस को दिये गये तहरीर में आरोपी मीरा का बयान भी अपने आप में हास्यास्पद है। कहती हैं  “मुझे लगा शीला ने पैसा लिया है, इसलिए मैंने भी मान लिया।” लेकिन वायरल वीडियो इस सफाई को सीधे तौर पर ध्वस्त कर रहा है जहां खुद आरोपी महिला यह कहती हुई दिख रही है कि वह “पैसा ली है, और वापस कर देती हूं।” कागज की कहानी और कैमरे की सच्चाई के बीच का फर्क साफ दिख रहा है।असल मुद्दा सिर्फ  लेन-देन का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जहां गरीबों के हिस्से की दवा कुछ कर्मचारियों की जेब गर्म करने का जरिया बन गया है। सरकारी अस्पताल, जहां मरीज भरोसे की सांस लेने आता है, वहीं अगर वहा के जिम्मेदार मरीज का जेब काटने लगे तो यह सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सीधा प्रहार है। ऐसे मे कहना मुनासिब होगा कि प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है एक ओर मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों  के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना, दूसरी ओर यह संदेश देना कि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्योंकि यह मामला महज कुछ रुपये के लेन-देन का नहीं, बल्कि उस नैतिक जिम्मेदारी का है जो सार्वजनिक सेवा से जुड़ी है। देखना दिलचस्प होगा कि समाज के अंतिम पायदान पर खडे आम व्यक्ति को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित सूबे की योगी सरकार सरकारी छत के नीचे गरीबो के जिन्दगी का सौदा कर शोषण करने वाले इन आरोपियो के गुनाह को कितना गंभीरता से लेती है ? या फिर अन्य मामलो की तरह कार्रवाई ठंडे बस्ते मे डाल आरोपियो के हौसले बुलंद करती है।

🔴 रिपोर्ट - संजय चाणक्य



No comments:

Post a Comment

Post Top Ad

Responsive Ads Here