पर्यटक नगरी में खुलेआम जिस्मफरोशी का कारोबार , छापेमारी से पहले लीक हो जाती है सूचनाए

 

🔵बुद्ध की नगरी में ‘जिस्म का जाल’!

🔴हाईवे के होटल-रेस्टोरेंट बने देह कारोबार के अड्डा, संरक्षण के आरोपों से घिरी खाकी और कथित कलमकार

🔵देह व्यापार पर उठे बड़े सवाल, स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश

🔴युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। दुनिया को शांति, संयम और सदाचार का संदेश देने वाली तथागत बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली इन दिनों एक ऐसे काले कारोबार की गिरफ्त में  है, जिसने बुद्धनगरी की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी के रूप में विकसित हो रहे कुशीनगर में हाईवे के किनारे संचालित तमाम होटल, लॉज और रेस्टोरेंट अब सिर्फ खाने-ठहरने तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि उनके भीतर “जिस्म के कारोबार” का संगठित नेटवर्क बेखौफ फल-फूल रहा हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हिरनहापुर से लेकर गोपालगढ़ तक नेशनल हाईवे के किनारे और पकवाइनार व पथिक निवास के पीछे चल रहे कई होटल और रेस्टोरेंट दिन के उजाले में देह व्यापार कारोबार का अड्डा बन चुका हैं।आरोप यह भी है कि इस पूरे खेल को स्थानीय स्तर पर संरक्षण प्राप्त है, जिस कारण कार्रवाई केवल दिखावे तक सिमट कर रह जाती है।सूत्रों की मानें तो होटल और रेस्टोरेंट की आड़ में चल रहे इस नेटवर्क में दलालों, संचालकों और कथित संरक्षणदाताओं की एक पूरी श्रृंखला सक्रिय है। चर्चा है कि कुछ स्थानों पर बाहर से आने वाले ग्राहकों के लिए बाकायदा “सेटिंग सिस्टम” संचालित होता है। देर रात लग्जरी वाहनों की आवाजाही और संदिग्ध लोगों की मौजूदगी को लेकर आसपास के लोग लंबे समय से सवाल उठाते रहे हैं।

🔴छापेमारी से पहले कारोबारियों को सूचना 

स्थानीय नागरिकों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि जब भी पुलिस की कार्रवाई होती है, उससे पहले ही देह व्यापार के कारोबार से जुडे लोगों को भनक लग जाती है। लोगों का आरोप है कि कई बार छापेमारी केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है। छोटे स्तर पर काम करने वालों को पकड़कर कार्रवाई का प्रचार किया जाता है, जबकि बड़े नेटवर्क तक हाथ नहीं पहुंचता।कुछ कारोबारियों द्वारा खुलेआम यह दावा किए जाने की भी चर्चा है कि “महीना व्यवस्था” के चलते उनका धंधा निर्बाध चलता रहता है। यही कारण है कि मीडिया में खबरें आने और शिकायतों के बावजूद अवैध गतिविधियों पर स्थायी रोक नहीं लग पा रही है।


🔴मंदिर क्षेत्र तक पहुंचा अवैध कारोबार

सिर्फ हाईवे ही नहीं, बल्कि मंदिर क्षेत्र के आसपास संचालित कुछ होटलों को लेकर भी स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले इलाके में इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ सामाजिक वातावरण को दूषित कर रही हैं, बल्कि विदेशी पर्यटकों के बीच भी गलत संदेश जा रहा है।पर्यटन नगरी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली इन गतिविधियों को लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ  हैं चर्चा जोरो पर है कि लगातार शिकायतें हो रही है, चहुओर अवैध कारोबार को लेकर चर्चा भी हैं, तो फिर बड़े स्तर पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

🔴मजबूरी, लालच और चमक-दमक का अंधेरा

सूत्र बताते हैं कि इस नेटवर्क में शामिल महिलाओं और युवतियों की कहानियां भी अलग-अलग हैं। कुछ आर्थिक तंगी और पारिवारिक दबाव के कारण इस दलदल में उतरीं है, तो कुछ तेजी से पैसा और आधुनिक जीवनशैली पाने की चाह में इसमें फंसती चली गईं।चर्चा है कि कॉलेज में पढ़ने वाली कुछ युवतियां भी “लक्जरी लाइफ” और आसान कमाई के आकर्षण में इस नेटवर्क का हिस्सा बन रही हैं। मोबाइल, महंगे कपड़े, होटल पार्टियां और खर्चीली जिंदगी की चाह उन्हें ऐसे रास्ते तक खींच ला रही है, जहां से बाहर निकलना आसान नहीं होता।


🔴सवालों के घेरे में व्यवस्था

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बुद्ध की नगरी में चल रहे इस कथित काले कारोबार पर लगाम कौन लगाएगा? क्या कार्रवाई केवल छोटे खिलाड़ियों तक सीमित रहेगी, या फिर उन लोगों तक भी जांच पहुंचेगी जिन पर संरक्षण देने के आरोप लगते रहे हैं?कुशीनगर की पहचान दुनिया में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में है। ऐसे में यदि पर्यटन नगरी की जमीन पर अनैतिक गतिविधियों का यह साया गहराता रहा, तो आने वाले समय में यह सिर्फ कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि पूरे जिले की प्रतिष्ठा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

नोट-- बुद्ध नगरी के तमाम होटल रेस्टोरेंट व लाजो मे बेखौफ संचालित हो रहे देह व्यापार के कारोबार से संबंधित खबरे  अंगले अंक में पढे। 


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