🔴सूत्रो का दावा: जिला समिति द्वारा बनाये गये 56 सेंटरो से की गई पचास लाख से अधिक की वसूली
🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित हाईस्कूल व इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा के लिए जिले में बनाये गये परीक्षा केंद्रो को लेकर न सिर्फ सवाल पे सवाल उठ रहे हैं बल्कि सेन्टर आवंटन मे नियम व मानक की उडाई गयी धज्जियाँ से भ्रष्टाचार की "बु" आ रही है। चर्चा-ए-सरेआम है कि खुलेआम धन उगाही कर मानकविहीन विद्यालयो को केन्द्र बनाया गया है। यही वजह है कि जनपद के इतिहास मे पहली दफा 194 परीक्षा केन्द्र बनाये गये है जबकि पिछले वर्ष के अपेक्षा इस साल सात हजार छात्रो की संख्या कम है। ऐसे मे 194 परीक्षा केन्द्र बनाने के पीछे डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त की मंशा क्या है अपने आप में सवाल बना हुआ है।
🔴डीआईओएस ने नियम विरुद्ध तरीके से किये 56 परीक्षा केन्द्र आवंटित
बतादे कि वर्ष 2025-26 में परीक्षाओं की शुचिता, पवित्रता, गुणवत्ता, विश्वसनीयता और नकलविहीन परीक्षा संपन्न कराने के उद्देश्य से यूपी बोर्ड की ओर जिले मे 143 परीक्षा केन्द्र चयनित किया गया था। बोर्ड की तरफ मे बनाये परीक्षा केन्द्रों की सूची जारी होने के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर सूची चस्पा कर दी गयी। बोर्ड ने आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि 4 दिसम्बर निर्धारित किया था। जानकार बताते है कि इसका निस्तारण डीआईओएस स्तर से करने के पश्चात जनपदीय केन्द्र निर्धारण समिति के अनुमोदन से डीआईओएस को पांच-दस परीक्षा केन्द्र घटाने-बढाने का अधिकार प्राप्त है। किन्तु कुशीनगर में डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त ने बोर्ड के सभी गाइडलाइन व नियम को ताक पर रखकर पांच-दस या बीस नही बल्कि 56 परीक्षा केन्द्र आवंटित कर सारे रिकार्ड तोड़ दिया।
सूत्रो की माने तो इस वर्ष आगामी माह मे शुरू होने वाले यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए जनपद मे बनाये गये परीक्षा केन्द्रों में वित्तविहीन विद्यालयो को ज्यादा तरजीह दी गई है इसके पीछे सूत्रो का तर्क है कि उन विद्यालयो सें मोटी रकम वसूल किया गया है। जानकारों की माने तो बोर्ड परीक्षा में पहली प्राथमिकता राजकीय विद्यालय, फिर एडेड उसके बाद वित्तविहीन विद्यालयो को मानक के अनुरूप पाये जाने के बाद सेन्टर बनाने का प्राविधान है। जानकार बताते है कि यह सभी परीक्षा केन्द्र सीसीटीवी, बाउंड्रीवाल, बिजली, पानी, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह लैस होना चाहिए, इसमें किसी प्रकार की कमी व लापरवाही बोर्ड परीक्षा के गाइडलाइन, निष्पक्ष व पारदर्शी परीक्षा का उल्लंघन माना जायेगा। इसके अलावा केंद्र निर्धारण में विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता (जैसे परीक्षा परिणाम) और सुरक्षा व्यवस्था (स्ट्रांग रूम, डबल लॉक अलमारियां) महत्वपूर्ण हैं जो मानक के अनुरूप पाये जाने के बाद ही परीक्षा केन्द्र बनाये जाने की अर्हता को पूर्ण करती है। विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा बनाये 56 परीक्षा केन्द्रो की बारीकी से जांच करा दी जाये तो इसमे अधिकाशं परीक्षा केन्द्र शासन की गाइडलाइन के न सिर्फ विपरीत पायी जायेगी बल्कि डीआईओएस के नेक नीयत मंशा की पोल भी खोलकर रख देगी।





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