खुले आसमान के नीचे सो रहे लोगों को डूडा विभाग की टीम ने पहुचाया आश्रय गृह

 

🔴डूडा विभाग ने पडरौना नगर पालिका परिषद के जलकल परिसर में कराया 50 बेड के आश्रय गृह का निर्माण 

🔵 युगान्धर टाइम्स न्यूज नेटवर्क 

कुशीनगर । हाड़ कपकपाने वाली ठंड मे खुले आसमान के नीचे सो रहे लोगों को डूडा विभाग की टीम ने रात्रि भ्रमण अभियान चलाकर पडरौना नगर पालिका के जलकल परिसर में संचालित आश्रय गृह में पहुंचाया।

बतादे कि शासन के मंशा के अनुरूप जिलाधिकारी रमेश मिश्रा के दिशा निर्देशन में लगातार अभियान चलाकर खुले में सो रहे आश्रयविहीन लोगों को डूडा विभाग के टीम व पडरौना नगर पालिका परिषद द्वारा डे–एनयूएलएम योजना अन्तर्गत संचालित आश्रय गृह में पहुंचाया जा रहा हैं। डूडा के शहर मिशन प्रबंधक राजदीप यादव   का कहना है कि  जनपद के पडरौना नगर पालिका परिषद के जलकल परिसर में 50 बेड के आश्रय गृह का निर्माण डूडा विभाग की ओर से कराया गया हैं जिसे पडरौना नगर पालिका परिषद के देख–रेख में संचालित किया जा रहा हैं जहां कोई भी निराश्रित व आश्रयविहीन व्यक्ति आश्रय गृह में आधार कार्ड से एंट्री कराकर आसरा ले सकता हैं जिसका कोई भी शुल्क नहीं लिया जाता हैं। शहर मिशन प्रबंधक ने कहा कि समस्त नगर निकायों में अस्थाई रैन बसेरा भी संचालित किया जा रहा हैं। निराश्रित व्यक्ति जिसके पास कोई आसरा नही है वह वहां पर जाकर अपना आधार कार्ड दिखाकर निःशुल्क आश्रय ले सकता हैं। कहना न होगा कि प्रदेश सरकार लगातार यह मॉनिटरिंग कर रही है कि किसी भी जनपद में कोई भी व्यक्ति ठंड में बाहर न सोए इसके लिए  डूडा के शहर मिशन प्रबंधक राजदीप ,सीएलटीसी डूडा मनेन्द्र यादव ,सामुदायिक आयोजक शेषमणि सिंह व नगर पालिका पडरौना के कर्मचारियों द्वारा रात्रि अभियान चलाते हुए लोगो को जागरूक किया जा रहा हैं। यहां बताना जरूरी है कि  जिला प्रशासन की ओर से अपर जिलाधिकारी वैभव मिश्रा व डिप्टी कलेक्टर/प्रभारी परियोजना अधिकारी डूडा जफर द्वारा  आश्रय गृह  व रैन बसेरों का स्थलीय निरीक्षण करके आश्रय गृह में उपलब्ध सुविधाओं का जायज़ा लिया गया हैं जहां अपर जिलाधिकारी वैभव मिश्रा ने अधिशासी अधिकारी पडरौना को निर्देशित किया है  कि प्रत्येक चौक-चौराहों  पर बैनर और पोस्टर के माध्यम से आश्रय गृह का प्रचार-प्रसार करे। इसके अलावा रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड पर आश्रय गृह के बारे में  अनाउंसमेंट कराया जाय जिससे अधिक से अधिक लोगो को इस बारे में जानकारी मिल सके।  ताकि कोई भी व्यक्ति खुले आसमान के नीचे सोने के बजाय में आश्रय गृह व रैन बसेरा में जायें।



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