इलाज नहीं, मौत का इंजेक्शन! मेडिकल स्टोर पर किसान की संदिग्ध मौत

🔵दस्त से तड़पता रहा किसान, मेडिकल स्टोर पर चलता रहा मौत का इलाज 

🔴मौत के बाद भी चलता रहा इलाज! हाटा में मेडिकल स्टोर पर बड़ा खेल

🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। जनपद के हाटा कोतवाली क्षेत्र से इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक मेडिकल स्टोर कथित तौर पर “मिनी अस्पताल” बन गया और इलाज के नाम पर एक किसान को हमेशा हमेशा के लिए मौत की दिन सुला दिया। आरोप है कि दस्त से पीड़ित 47 वर्षीय व्यक्ति को अस्पताल भेजने के बजाय पूरे दिन मेडिकल स्टोर पर बोतल और इंजेक्शन के सहारे रोके रखा गया। हालत बिगड़ती रही, पर इलाज चलता रहा और जब सच सामने आया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

मृतक रामकृपाल यादव हाटा क्षेत्र के रहने वाले थे और खेती-बाड़ी कर परिवार चलाते थे। शनिवार सुबह उन्हें दस्त की शिकायत हुई। परिजन भरोसे में आकर उन्हें बालेसर चौराहा स्थित विनोद पांडेय मेडिकल स्टोर ले गए। आरोप है कि वहां मौजूद कथित झोलाछाप ने डॉक्टर बनकर इलाज शुरू कर दिया।इंजेक्शन लगाए गए, ग्लूकोज चढ़ाया गया और पूरे दिन मरीज को मेडिकल स्टोर पर ही “ट्रीटमेंट” के नाम पर रखा गया।परिजनों का कहना है कि रामकृपाल की हालत लगातार बिगड़ रही थी। परिवार बार-बार बड़े अस्पताल ले जाने की बात कहता रहा, लेकिन मेडिकल संचालक भरोसा दिलाता रहा कि “सब कंट्रोल में है।” उधर मरीज जिंदगी और मौत से जूझता रहा। मृतक के पुत्र उमेंद्र यादव ने पुलिस को दिये गये तहरीर में आरोप लगाया है कि उनके पिता की मौत इलाज के दौरान ही हो चुकी थी, लेकिन मौत को छिपाने के लिए घंटों तक इलाज का नाटक चलता रहा। जब हालत पूरी तरह बिगड़ गई और परिजनों का दबाव बढ़ा, तब आनन-फानन में एंबुलेंस बुलाकर मरीज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हाटा भेजा गया।लेकिन वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने जो बताया, उसने पूरे परिवार को तोड़ दिया। चिकित्सकों ने रामकृपाल यादव को मृत घोषित करते हुए कहा कि उनकी मृत्यु काफी पहले हो चुकी थी। यह सुनते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई।


🔴 शव लेकर परिजन मेडिकल स्टोर पहुचे 

रामकृपाल यादव की मृत्यु के जानकारी के बाद गुस्साए परिजन सीएचसी से शव लेकर दोबारा विनोद पांडेय मेडिकल स्टोर पहुंचे, लेकिन तब तक संचालक मेडिकल स्टोर बंद कर फरार हो गया था। आरोप है कि थोड़ी देर बाद मेडिकल संचालक की तरफ से 10 से 15 लोग मौके पर पहुंचे और परिजनों के साथ मारपीट की। यहां तक आरोप यह भी है कि मृतक के शव के साथ अभद्रता की गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल कायम हो गया।सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह हालात काबू में किए। परिजनों ने मेडिकल स्टोर संचालक, कथित झोलाछाप डाक्टर और मारपीट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

🔴  प्रशासन से सीधा सवाल

क्या मेडिकल स्टोर अब अस्पताल बन चुके हैं?आखिर किसकी शह पर मेडिकल स्टोर पर इलाज चल रहा है? कब तक झोलाछाप डाक्टर  इलाज के नाम पर खुलेआम मौत बाटते रहेगे?बिना डिग्री मरीजों को इंजेक्शन और बोतल चढ़ाने की अनुमति किसने दी?मौत के बाद भी इलाज का नाटक क्यों चलता रहा?अगर समय रहते ही रामकृआल को अस्पताल भेजा जाता, तो क्या उनकी जिंदगी नही जान बच सकती थी?बेशक! यह घटना सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि जिले में फल-फूल रहे अवैध इलाज के उस खतरनाक नेटवर्क का चेहरा है, जहां मेडिकल स्टोरों के पीछे “झोलाछाप क्लीनिक” धड़ल्ले से चल रहे हैं और गरीबों की जिंदगी प्रयोगशाला बन चुकी है।अब देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मौत पर कार्रवाई करता है या फिर कुछ दिनों बाद मामला फाइलों में दफन हो जाएगा और जिले में मौत का यह खेल पहले की तरह चलता रहेगा।



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