इंद्रजीत करेगे नेशनल ओपेन खेल मे यूपी का प्रतिनिधित्व

🔴पंख से नही हौसले से उडान होती है

🔴 युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। उसे दो वक्त की रोटी का ठिकाना नहीं है। इस लिए पेट भरने के लिए परिवार को मजदूरी करनी पड़ती है। ऐसे में नौकरी की जगह, खेल को करियर के रूप में चुनना क्या बहते हुए पानी पर कुछ लिखने की कोशिश करने जैसा नही है? ऐसे मे धारा के विपरीत दिशा मे कश्ती को आगे बढाना जिगरा का काम है। कुशीनगर जिले के चिलवान गांव के इंद्रजीत ने अपने आत्मविश्वास और बुलंद हौसले के दम पर यह साबित कर दिया है कि " मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। "

🔴  परिवार को करनी पड़ती मजदूरी

"तू भी है राणा का वंशज, फेंक जहां तक भाला जाए" को आदर्श वाक्य मानने वाला जनपद के रामकोला विकास खंड क्षेत्र के गांव चिलवान निवासी इंद्रजीत सहानी के पिता विजय बहादुर के पास महज 40 डिसमिल जमीन है। इस जमीन से इतना अनाज भी पैदा नहीं होता है कि इंद्रजीत के चार भाईयों और माता-पिता को दो वक्त की रोटी नसीब हो सके। इस लिए पेट भरने के लिए पूरा कुनबा को मजदूरी करता है। सिर छिपाने के लिए इस कुनबे के पास टूटी-फूटी झोपड़ी ही सहारा  है।इंद्रजीत ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय से हासिल किया।

🔴 वीर बहादुर सिंह ने किया तराशने का काम

वर्ष 2018 की बात है, जब गांव के पास रेलवे की खाली पड़ी जमीन पर इंद्रजीत बच्चों के साथ खेला करता था। उसके गेंद फेंकने अंदाज को देख कर एथलीट रहे वीर बहादुर सिंह की नजर उस पर पड़ी। दुर्घटना के कारण खेल की दुनिया से दूर हुए वीर बहादुर सिंह ने उसे तराशने का मन बना लिया और उसे जेवनिल थ्रो का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया। उस समय इंद्रजीत की उम्र महज 14 वर्ष की थी। 

🔴 खेल के आड़े आई गरीबी, लेकिन नहीं रुके कदम

इंद्रजीत की माने तो एक समय ऐसा भी आया जब उसकी गरीबी और लाचारी उसके खेल मे आडे आने लगी। फिर अपने कोच वीर बहादुर सिंह की प्रेरणा से वह सुबिधाओ के आभाव मे विपरीत परिस्थितियों मे भी वह अपने प्रैक्टिस को जारी रखा। आर्थिक तंगी से जूझ रहे इंद्रजीत ने अपने खेल को जारी रखने के लिए एक हॉट मिक्सर प्लांट में मजदूरी और चौकीदारी करने लगा. जिससे छोटा सा कमरा भी मिल गया जिसमें रहकर अपनी पढ़ाई भी करता है. कोच भी थोड़ी बहुत मदद कर देते थे. इंद्रजीत के मुताबिक खेल ग्राउण्ड नहीं होने के कारण रेलवे की खाली जमीन को साफ-सुथरा कर उसी पर जेवनिल थ्रो की प्रैक्टिस करने लगा। 

🔴 यूपी का प्रतिनिधित्व करने का मिला मौका

पहले जिला फिर मंडल स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में इंद्रजीत की शानदार प्रदर्शन के चलते हरदोई में आयोजित प्रदेश स्तरीय खेल में उसे मौका मिला। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता मे इंद्रजीत ने 57 मीटर भाला फेंक कर न सिर्फ शानदार प्रदर्शन किया बल्कि प्रदेश मे अपने नाम का रिकार्ड भी दर्ज कराया। नतीजा यह हुआ है 23 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित ओपन नेशनल जेवनिल थ्रो में यूपी का प्रतिनिधित्व करने के लिए इंद्रजीत को मौका दिया गया है। 

🔴 इंद्रजीत के चयन पर ग्रामीणों में खुशी

संसाधन और सुबिधाओ के अभाव और बगैर किसी प्रशिक्षण के पथरीली जमीन पर प्रैक्टिस कर नेशनल प्रतियोगिता में  अपना जगह बनाने वाले इंद्रजीत की सफलता  से गांव और क्षेत्र को लोग बेहद खुश हैं. इंद्रजीत को भाला फेंकने में मदद कर रहे वीर बहादुर सिंह का कहना है कि इंद्रजीत जेवनिल थ्रो का बेहतरीन खिलाड़ी है. यदि थोड़ी सरकारी सुविधाएं और बेहतर ट्रेनिंग मिल जाय तो वह विदेशों की धरती पर भारत का झंडा गाड़ सकता है।


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