वायवाड से प्रियंका गांधी लडेगीं चुनाव

🔵पहली बार चुनावी रणभूमि में ताल ठोकेगीं प्रियंका

🔴राहुल गांधी के सीट छोडने के बाद वायवाड मे उप चुनाव  की धोषणा

🔵 युगान्धर टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क 

नई दिल्ली।  चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों के साथ ही 15 राज्यों की 48 विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव का तारीख की घोषणा कर दी है।  इनमें केरल की वायनाड लोकसभा सीट भी शामिल है, जहां से राहुल गांधी ने जीतने के बाद इस्तीफा दे दिया था। भारत निर्वाचन आयोग के मुताबिक 13 नवंबर को 47 विधानसभा और 1 लोकसभा सीट पर उपचुनाव होंगे. जबकि 20 नवंबर को एक लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है। कांग्रेस ने केरल की वायनाड सीट से प्रियंका गांधी की उम्मीदवारी का ऐलान कर दिया है। प्रियंका गांधी पहली बार चुनावी मैदान में होंगी।

बतादे कि इसी साल हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दो सीटों- केरल की वायनाड और यूपी की रायबरेली से चुनाव लड़ा था. उन्होंने दोनों ही सीटों पर जीत दर्ज की थी. इसके बाद उन्होंने वायनाड लोकसभा सीट छोड़ने की घोषणा कर दी थी और रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद बने रहने का फैसला किया था. तब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तरफ से ऐलान किया गया था कि राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी वाड्रा वायनाड से उपचुनाव लडेगीं। राहुल गांधी दूसरी बार वायनाड से  जीते थे वर्ष 2019 में उन्‍होंने वायनाड से  4.31 लाख वोटों से जीत दर्ज की थी. वहीं इस बार राहुल गांधी 3,64,422 वोटों से जीते. इन्‍होंने सीपीआई नेता एनी राजा का हराया था. राहुल गांधी 2019 की तरह इस बार भी 2 सीटों रायबरेली और वायनाड से चुनाव मैदान में थे. राहुल गांधी को वायनाड सीट पर कुल 6,47,445 वोट मिले थे। राहुल गांधी ने यूपी में पारिवारिक सीट रायबरेली को बरकरार रखने के लिए वायनाड की सीट खाली कर दी थी। प्रियंका गांधी भले ही कभी चुनाव नहीं लड़ीं, लेकिन वो राजनीति में काफी पहले से सक्रिय हैं।

🔴 प्रियंका की राजनीति में कब हुई एंट्री?

प्रियंका गांधी ने वर्ष 1999 में राजनीति में एंट्री ली थी, जब वो अपनी मां सोनिया गांधी के लिए चुनाव प्रचार करने उतरी थीं। इस दौरान उन्होंने पहली बार राजनीतिक मंच से बीजेपी उम्मीदवार अरुण नेहरू के खिलाफ प्रचार किया था। लेकिन इन 25 सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ, जब प्रियंका गांधी ने चुनाव लड़ा हो। हालांकि उनके चुनाव लड़ने की चर्चा कई बार हुई। कांग्रेस समर्थक प्रियंका गांधी से यूपी में अपनी दादी और मां की विरासत को आगे बढ़ाने की आशा टिकाए हुए थे।

🔴कांग्रेस के कई पदों को संभाला

प्रियंका गांधी अपनी सूझबूझ के लिए जानी जाती हैं। वर्ष 2017 में यूपी विधानसभा में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन और सीट बंटवारे में प्रियंका गांधी ने बड़ी भूमिका निभाई। कांग्रेस यूपी चुनाव में 110 सीटों की मांग कर रही थी, जबकि अखिलेश यादव की पार्टी ने 100 सीटें देने की पेशकश की थी। जनवरी 2019 तक प्रियंका को पूर्वी यूपी में कांग्रेस का महासचिव बनाया गया था, जहां कांग्रेस के गढ़ अमेठी और रायबरेली हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के बाद, सितंबर 2020 तक, उन्हें पूरे उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव नियुक्त किया गया था। हालांकि दिसंबर 2023 में संगठनात्मक फेरबदल में उनसे उत्तर प्रदेश का प्रभार छीन लिया गया, लेकिन वो पार्टी की महासचिव बनी रहीं।

🔴वायनाड से चुनाव लड़ने का क्यों लिया फैसला?

प्रियंका गांधी वायनाड से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो गई हैं। लेकिन ये बस इतनी सी कहानी नहीं है। दरअसल कांग्रेस दक्षिण भारत खासतौर पर केरल में अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है। पार्टी कर्नाटक और तेलंगाना में सत्ता में है और अपनी सहयोगी डीएमके के साथ तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज है। उत्तर भारत के विपरीत, जहां बीजेपी की पकड़ मजबूत है, वहीं कांग्रेस दक्षिण में जीत हासिल करने की कोशिश में है।

🔴 पहली बार संसद में हो सकते है गांधी परिवार के तीन सदस्य

अगर प्रियंका गांधी वायनाड से जीतती हैं, जिसे कांग्रेस के लिए सुरक्षित सीट माना जा रहा है, तो यह पहली बार होगा जब नेहरू-गांधी परिवार के तीन सदस्य एक साथ संसद में होंगे। पहली बार राहुल और प्रियंका गांधी लोकसभा में और सोनिया गांधी राज्यसभा में होंगी।

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