सात महीने बाद खुले स्कूल, खिलखिलाये छात्रों के चेहरे

🔴 कोविड-19 के प्रोटोकाल मे चलेगी कक्षाएं

🔴 छात्र, कर्मचारी, शिक्षक सभी ने मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए करना होगा स्‍कूलों में प्रवेश

🔴 युगान्धर टाइम्स न्यूज नेटवर्क 

कुशीनगर। कोरोना महामारी की वजह से पिछले सात महीने से बंद पडे स्‍कूलों में रौनक लौट आई। अनलॉक की प्रक्रिया के तहत  सोमवार से शासन के गाइडलाइंस को ध्यान मे रखते हुए पूरे जनपद मे स्‍कूल खुल गये हैं। नौवीं से बारहवी कक्षा तक के छात्र-छात्राओं को सोशल डिस्‍टेसिंग का पालन करते हुए स्‍कूल आने और क्‍लास करने की इजाजत मिली है। इस दौरान स्‍कूल पहुंचे छात्र-छात्राओं में इसका जबरदस्‍त उत्‍साह देखने को मिला। 

काबिलेगोर है कि पिछले सात महीने से विराम लगी स्‍कूलों की दिनचर्या एक बार फिर पटरी पर लौटती हुई दिखी। हालांकि पहले-दुसरे दिन बेहद कम संख्‍या में विद्यार्थी स्‍कूल मे दिखाई दिये। इस दरम्यान छात्र , कर्मचारी, शिक्षक सभी ने मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए स्‍कूलों में प्रवेश किया।कहना नही होगा कि शासन की ओर से पूरे प्रदेश मे सोमवार से नौवी से बारहवीं कक्षा तक के विद्यालय खोलने की तारीख व तिथि मुर्कर कर दिया गया था इसको ध्यान मे रखते हुए जिले मे विद्यालय खोलने की तैयारी व औपचारिकताए रविवार को ही विद्यालय प्रशासन द्वारा पूर्ण कर लिया गया था। बच्‍चे और अभिभावक भी लगातार विद्यालय प्रशासन से संपर्क कर विद्यालयों के खुलने के समय की जानकारी प्राप्त कर चुके थे। तमाम स्‍कूलों ने वाट्सअप के जरिए भी छात्रों को विद्यालय के समय और खुलने की जानकारी दे दी थी।

🔴 अभिभावकों की सहमती है जरूरी

हालांकि कुछ अभिभावक कोविड-19 के खौफ से अभी भी असमंजस के स्थिति में हैं कि वह अपने बच्चों को विद्यालय भेजे या   न भेजे। इसके लिए सरकार और प्रशासन ने सभी विद्यालयों को निर्देश दिया है कि जो बच्चा विद्यालय आएगा उसे एक प्रोफार्मा अपने अभिभावक से भरवाकर लाना होगा। जिसमें उसे उसके अभिभावक द्वारा विद्यालय आने की अनुमति दी गयी है। उस फार्म को विद्यालय में जमा करने के बाद ही छात्र को पढ़ने के लिए कक्षाओं में बैठने दिया जाएगा। 

🔴 जारी रहेगा अॉनलाइन पढाई

उल्लेखनीय है कि शासन द्वारा विद्यालयों के खोले जाने के निर्देश के साथ ही यह भी कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान जिस प्रकार से विद्यालयों की तरफ से ऑनलाइन कक्षाएं चलायी जा रही थीं वे चलती रहेंगी। ताकि जिन बच्चों के अभिभावक अपनो बच्चों को विद्यालय आने की अनुमति नहीं देंगे वे बच्चे घर से पढ़ाई कर सकें।



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